संदेश

जनवादी कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षणों का सच

चित्र
  इन दिनों उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण पर पूरी दुनिया में मीडिया ने शोर मचा रखा है तो क्या इसी मीडिया के मुताबिक क्या उत्तर कोरिया किसी युद्ध की तैयारी कर रहा है?  तो इसका जवाब है  नहीं! उत्तर कोरिया सिर्फ जायज तरीके से अपने बचाव के लिए ऐसा कर रहा है.  लोगों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि अमेरिका ने 9 सितम्बर 1945 से ही कोरिया के दक्षिणी हिस्से (दक्षिण कोरिया) पर कब्जा कर रखा है और वहाँ अपने सैनिक अड्डे बना रखे हैं. इसके अलावा जापान के ओकिनावा द्वीप, गुआम और फिलीपींस में भी अमेरिकी सैनिक अड्डे मौजूद हैं. अमेरिकी परमाणु हथियारों का बड़ा जखीरा दक्षिण कोरिया में मौजूद है. ये दावा किया जाता है कि अमेरिका ने वहाँ से  अपने परमाणु हथियार हटा लिए हैं पर इसकी कभी स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की गई है. इसके अलावा अमेरिका ने उत्तर कोरिया से 3425 किमी दूर अपने कब्जाए हुए गुआम द्वीप में अपनी परमाणु पनडुब्बी यूएसएस नेवादा (USS Nevada) और परमाणु हथियारों से लैस युद्धक विमानों को तैनात कर रखा है. उत्तर कोरिया को अमेरिका की फासिस्ट कठपुतली दक्षिण कोरिया से भी खतरा है. अमेरिक...

बच्चों की मुस्कान के लिए

चित्र
  इन दिनों समाजवादी देश उत्तर कोरिया में नए साल के नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने से पहले  देश के सभी छात्रों को हर साल की भांति इस बार भी मुफ्त में काॅपी, किताब, स्टेशनरी का सामान, बैग और स्कूल ड्रेस देने के लिए संबंधित कारखानों में जोर शोर से उत्पादन कार्य हो रहा है.   पार्टी सेक्रेटरी किम जंग उन के निर्देश पर 2016 में आधुनिकतम मशीनों और तकनीक से लैस नोटबुक फैक्ट्री लगाई गई जिसमें छात्रों के लिए बढ़िया किस्म के नोटबुक तैयार किए जाते हैं. फैक्ट्री के मजदूरों ने इस शैक्षणिक सत्र के लिए जरूरी नोटबुक का उत्पादन कार्य पूरा कर लिया है. उधर देश की दो प्रमुख स्टेशनरी फैक्ट्रियों में स्कूली छात्रों के लिए बढ़िया किस्म की स्टेशनरी ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तैयार की जा रहीं हैं. छात्रों के लिए पेंसिल समेत स्टेशनरी सामानों का निर्माण उत्तर कोरिया की आजादी के बाद से ही पार्टी और सरकार की पहली प्राथमिकता रही है. स्टेशनरी फैक्ट्रियों में और भी बेहतर  किस्म के सामान बनाने के लिए अनुसंधान कार्य भी जोर शोर से चलता रहता है यही चीज स्कूल की किताबें छापने वाली प्रेस में भी हो रही...

जनवादी कोरिया में फ्रांसीसी संगीत और भारतीय फ़िल्म

चित्र
ये कैसे संभव है हमें तो दावे के साथ मीडिया और विशेषज्ञों द्वारा ये बताया जाता है कि उत्तर कोरिया में विदेशी संगीत और फिल्मों पर प्रतिबंध है और उसका उल्लंघन करने पर मौत की सजा तक का प्रावधान है तो फिर कैसे उत्तर कोरिया में फ्रांसीसी संगीत बजाया जा रहा है और भारतीय फिल्म खुल्लमखुल्ला दिखाई जा रही है?  वीडियो में उत्तर कोरिया का सामजीयन बैंड फ्रांस का शास्त्रीय संगीत Carmen Overture बड़े उत्साह से बजा रहा है.  इसके अलावा उत्तर कोरिया  घूमने गए पर्यटकों ने इस बात की तस्दीक भी की है कि वहाँ की सबसे बड़ी पब्लिक लाइब्रेरी के म्यूजिक सेक्शन में बीटल्स (The  Beatles) जैसे पश्चिमी संगीतकारों के अलावा दुनिया भर का संगीत एल्बम मौजूद है जिसका लुत्फ़  कोई भी आम उत्तर कोरियाई नागरिक उठा सकता है. सिंगापुर के पत्रकार आरम पान (Aram Pan) का कोरोना के पहले अक्सर उत्तर कोरिया जाना होता था.  फ्यंगयांग शहर के एक इलाके में घूमते हुए एक इमारत जो सिनेमा थिएटर थी उसकी तस्वीर लेते समय उन्हें पता चला कि वहाँ एक भारतीय हिन्दी फिल्म भी दिखाई जा रही है. उनके मुताबिक फिल्म का कोई पोस्टर नह...

वर्कर्स पार्टी की पोलिट ब्यूरो की हालिया बैठक का निर्णय

चित्र
 19 जनवरी 2022 को उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी की पोलिट ब्यूरो की बैठक हुई जिसमें कोरियाई प्रायद्वीप की ताजा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर चर्चा की गई. इस बैठक में खासकर अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीतियों से कोरियाई प्रायद्वीप में बिगड़ते हालातों का विश्लेषण किया गया.  हाल के महीनों में अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया पर लगभग 20 बार प्रतिबंध लगाए गए,  यहाँ तक कि बच्चों के लिए कार्टून फिल्में बनाने वाले एक स्टूडियो को भी नहीं बख्शा गया(अब कार्टून स्टूडियो का परमाणु हथियारों से क्या संबंध हो  सकता है ये कोई समझा दे. ये अमेरिकी जंगखोर  अब और ज्यादा पागल ही हो चुके हैं और खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली हरकतें कर रहे हैं).    अमेरिका ने हाल के वर्षों में अपने सबसे वफादार गुलाम दक्षिण कोरिया के साथ उत्तर कोरिया के खिलाफ कई दफे साझा सैनिक अभ्यास किए और अब वो दक्षिण कोरिया में खतरनाक हथियारों का जखीरा  जमा करने के साथ साथ कोरिया प्रायद्वीप के आस पास परमाणु पनडुब्बियों को भी तैनात कर रहा है. साफ है कि अमेरिका ने उत्तर कोरिया के प्रति अपने शत्रुतापूर्ण इरादे ...

जनवादी कोरिया में आम माफी

चित्र
 उत्तर कोरिया की संसद की स्थायी समिति ने देश  के अपराधियों को आम माफी देने का एलान किया है. ये  आम माफी देश के नेताओं किम इल संग और किम जंग इल की 110 वीं और 80 वीं जयंती के अवसर पर दी गई.  उत्तर कोरिया में पिछले 10 सालों में चौथी बार देश और जनता के अपराधियों को माफी दी गई है .  वहीं उत्तर कोरिया को मानवाधिकार का नरक कहने वाले अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में इस तरह से कभी आम माफी नहीं दी जाती है. उत्तर कोरिया में अपराध के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता है जिसमें अपराधियों को सख्त सजा देने के बजाय उनकी शिक्षा दीक्षा और पुनर्वास पर जोर दिया जाता है. साम्राज्यवादी और उसके पिछलग्गू तथाकथित मानवाधिकारवादी लिबरल हमेशा चिल्लाते रहते हैं कि उत्तर कोरिया में लाखों लोग जेल कैंपों में बंद हैं पर जब वहाँ अपराधियों को इस तरह से आम माफी दी जा रही है तो फिर जेल कैंपों में इतनी बड़ी तादाद में लोग कैसे बंद रह सकते हैं? 

एक आम अमेरिकी मध्यमवर्गीय महिला की नजर में जनवादी कोरिया के लोगों का जीवन स्तर

चित्र
  उत्तर कोरिया के निवासियों के जैसे रहने के लिए अमेरिका के निवासियों को कितना खर्च करना पड़ेगा?  कर दी ना बेतुकी बात! अब भला दुनिया के "गरीबतम" मुल्कों में गिने जाने वाले उत्तर कोरिया के लोगों का जीवन स्तर की तुलना दुनिया के "सबसे अमीर" मुल्क अमेरिका के लोगों के जीवन स्तर से  की जा सकती है भला! एक बार दोनों देशों की GDP तो देख लेते!  कहाँ राजा भोज और कहाँ गंगू तेली! फिर भी दोनों देशों के लोगों की जीवन स्तर की तुलना कर के देखने में क्या हर्ज है अमेरिका के लास ऐंजेलेस (Los Angeles) शहर में रहने वाली दक्षिण कोरिया मूल की अमेरिकी नागरिक वी छान मी ने कई दफे उत्तर कोरिया की यात्रा की और सितम्बर 2017 में  तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी नागरिकों के उत्तर कोरिया जाने पर पूर्ण प्रतिबंध (जो  अभी भी जारी है) लगाने से पहले 2016 में आखिरी बार उत्तर कोरिया की यात्रा की और उन्होंने उत्तर कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग और अपने शहर लास ऐंजेलेस के लोगों के जीवन स्तर की तुलना करते हुए एक लेख लिखा जो अमेरिका में दक्षिण कोरियाई प्रवासियों के प्रगतिशील संगठ...

खमदक खदान शहर

  नए साल 2022 की पूर्व संध्या पर 30 और 31 दिसंबर 2021 को समाजवादी देश उत्तर कोरिया की सरकार ने उत्तर हामग्यंग प्रांत में पहाड़ी घाटी में अवस्थित खमदक खदान क्षेत्र के निवासियों को नए घरों की सौगात दी. खमदक देश का प्रमुख जस्ता(Zinc) उत्पादन क्षेत्र है. यहाँ खदान मजदूरों की बस्ती हुआ करती थी पर अगस्त सितम्बर 2020 में चक्रवाती तूफान माईसाक के कहर से बस्ती पूरी तरह तबाह हो गई. वर्कर्स पार्टी के महासचिव किम जंग उन ने प्रभावित इलाकों का तुरंत दौरा किया और खदान मजदूरों की बस्ती को नए रुप से बसाने के निर्देश दिए और सालभर के अंदर ही इस पहाड़ी घाटी में हजारों परिवारों के लिए विभिन्न प्रकार के आधुनिक फ्लैट तैयार हो गए और एक नया समाजवादी शहर ही बसा दिया गया. एक समारोह में लाभुकों को आवासीय परमिट बांटे गए और लाभुकों ने आवासीय परमिट को हवा में लहराते हुए *वर्कर्स पार्टी जिंदाबाद! " कहते हुए अपनी खुशी का इजहार किया और इसमें से कुछ भावुक भी हो गए. खमदक शहर को बनाने में कोरिया की जन सेना की प्रमुख भूमिका रही और एक जवान ने कहा कि हमनें पास हुए डिजाइन का कड़ाई से पालन करते हुए और  गुणवत्ता का ख्य...

जनवादी कोरिया में साल 2022 का आगाज

चित्र
सभी को नए साल की शुभकामनाएं.  उत्तर कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग में हर साल की भांति नए साल का गर्मजोशी से स्वागत किया गया. वहाँ नए साल के मौके पर शहर के आदर्श मजदूर, किसान, बुद्धिजीवी, छात्र और किशोर वर्ग द्वारा राष्ट्रीय झंडा फहराने जाने की परंपरा है. झंडा फहराने के बाद रंगारंग आतिशबाजी का आयोजन किया गया. इस समारोह से उत्तर कोरिया के बारे में एक और वाहियात किस्म का मिथक ध्वस्त होता है कि वहाँ का कैलेंडर 15 अप्रैल 1912 से शुरू होता है.  इसकी उम्मीद तो बिल्कुल नहीं है फिर भी नए साल में उत्तर कोरिया को लेकर अमेरिकी साम्राज्यवादी और उसके पिट्ठू दलाल दक्षिण कोरिया  और उनके पैसे पर पलने वाले तथाकथित  "विशेषज्ञों" और "बुद्धिजीवियोंं"  के झूठ और जहरीले प्रोपेगेंडा के कारोबार के ध्वस्त होने की कामना जरूर है. 

तथाकथित 11 दिवसीय "शोक समारोह" का सच

चित्र
रेडियो फ्री एशिया साम्राज्यवाद की झंडाबरदार अमेरिकी सरकार का अंग है इसलिए रेडियो फ्री एशिया उत्तर कोरिया के बारे में सही खबर कभी नहीं देगा. उत्तर कोरिया में तख्ता पलट कर वहाँ की जनकल्याणकारी समाजवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंकना ही अमेरिकी साम्राज्यवादियों का "ड्रीम प्रोजेक्ट" है.  इसी रेडियो फ्री एशिया के हवाले से तथाकथित "मुख्यधारा" की मीडिया द्वारा दुनियाभर में चिल्ला चिल्लाकर बताया जा रहा है कि उत्तर कोरिया में किम जंग इल की 10 वीं बरसी पर पूरे देश में 11 दिनों तक लोगों के हंसने, शराब पीने फुर्सत की गतिविधियों (leisure activities) पर रोक लगा दी गई है. इसका पालन करने के लिए पुलिस की भारी मात्रा में तैनाती की गई है. शोक मनाने के लिए ऐसी सरकारी जबरदस्ती पर दुनियाभर के लोग शाॅक्ड हैं. आइए जानते हैं कि अभी उत्तर कोरिया में क्या चल रहा है. ये 19 दिसंबर 2021 को उत्तर कोरिया के एकमात्र सरकारी टीवी चैनल पर प्रसारित शाम के न्यूज़ बुलेटिन की फुटेज है. 19 दिसम्बर यानि "तथाकथित 11 दिवसीय शोक समारोह" का दूसरा या तीसरा दिन. इस वीडियो फुटेज में सबसे पहले राजधानी फ्यंगयांग...

फ्यंगयांग मेट्रो

उत्तर कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग की मेट्रो एक भूमिगत राजमहल के जैसी है. साथ ही ये दुनिया की सबसे गहरी (110 मीटर) और सबसे सस्ती मेट्रो भी है. ब्रिटेन के कोरिया मैत्री संघ(Korea Friendship Association, United Kingdom) के अनुसार फ्यंगयांग मेट्रो का किराया 1992 से नहीं बढ़ा है इस  दौरान कई नए मेट्रो स्टेशन के निमार्ण, मेट्रो प्रणाली का आधुनिकीकरण और नए डिब्बे लगाए गए पर पूंजीवादी देशों की तरह किराया बढ़ाकर जनता पर बोझ नहीं डाला गया. फ्यंगयांग मेट्रो का किराया 1992 से अभी तक भारतीय मुद्रा में 2 रुपए ही है.  2016 की इस वीडियो में फ्यंगयांग मेट्रो के  कोच भी देख लीजिए किसी टोक्यो, सिओल या दिल्ली मेट्रो से कम हैं क्या ? और ये सारे कोच उत्तर कोरिया ने अपनी देशी तकनीक से बनाए हैं. उत्तर कोरिया की तकनीकी क्षमता को कम मत आंकिए. उत्तर कोरिया ने पहले अपने बूते कभी भाप इंजन भी नहीं बनाया था पर 1959 में  वहाँ के मजदूर वर्ग ने अपनी स्वदेशी तकनीक से बिजली इंजन बनाने का कारनामा कर दिखाया था. मेट्रो टिकट के अलावा रोजमर्रा की चीजें भी उत्तर कोरिया में काफी सस्ती हैं. बाकी साम्राज्यवाद क...

क्या है जनवादी कोरिया की खाली सड़कों का राज

चित्र
 उत्तर कोरिया के बारे में एक धारणा यह भी है कि वहाँ सड़कों पर कम लोग दिखाई देते हैं और सड़कें लगभग खाली रहतीं हैं और इसी बात को लेकर भयावह कहानियाँ गढ़ दी जाती हैं कि वहाँ के लोगों में डर का राज कायम करके वहाँ के तथाकथित अत्याचारी और क्रूर शासन द्वारा उनके बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी गई हैं  या फिर लोगों को लेबर कैंपों में बंदी बनाकर रख दिया गया है. यह भी कहा जाता है कि जब विदेशी यात्रियों का दल वहाँ आता है तो लोगों को बाहर सड़कों पर घूमने फिरने के लिए छोड़ दिया जाता है कि विदेशियों को सब कुछ सामान्य लगे. उत्तर कोरिया को लेकर लाॅजिक की  हत्या का सिलसिला चलता ही रहता है. वैसे यह बात सही है कि कुछ खास अवसरों और दिन के कुछ वक्त को छोड़कर वहाँ सड़कों पर ज्यादा लोग नहीं दिखाई देते हैं और इसकी ये वजहें हैं 1. उत्तर कोरिया के  सभी शहर अपनी आबादी  की तुलना में विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में फैले हुए हैं. उदाहरण के लिए देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर फ्यंगयांग 2000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और आबादी केवल 32 लाख ही है. वहीं दक्षिण कोरिया की राजधानी ओर सबसे बड़ा शहर सियो...

जनवादी कोरिया की "अनिवार्य सैनिक सेवा" का सच

चित्र
  क्या उत्तर कोरिया में सभी नागरिकों के लिए  सैनिक सेवा अनिवार्य  है?  तथाकथित मुख्यधारा की मीडिया का कहना है कि वहाँ पुरूषों और महिलाओं के लिए सैनिक सेवा जरूरी है, पर इसके बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है तो फिर सच क्या है? उत्तर कोरिया विरोधी दुष्प्रचार और झूठ के दुनिया में सबसे बड़े निर्माता दक्षिण कोरिया के ही एकमात्र उत्तर कोरिया फैक्ट चेक यूट्यूब चैनल 왈가왈북 (वाल्गावाल्बुक) ने इस बात का खुलासा किया है कि उत्तर कोरिया में अनिवार्य सैनिक सेवा  नहीं है, जिसे सैनिक सेवा करने का मन है  केवल वही जा सकता/सकती है. वीडियो में बायीं तरफ धारीदार शर्ट पहने हुए शख्स का नाम होंग खांग छल हैं और वे उत्तर कोरिया से हैं और पिछले 8 साल से दक्षिण कोरिया में रह रहे हैं. होंग  यह बता रहे हैं कि उत्तर कोरिया  के संविधान में प्रत्येक नागरिक के लिए सैनिक सेवा को पवित्र कर्तव्य के रूप में उल्लेख किया गया है पर वहाँ  सैनिक सेवा में जाना पूरी तरह से लोगों की इच्छा पर है और जबरदस्ती किसी को सैनिक सेवा में नहीं भेजा जा सकता.वहाँ कोई शख्स विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी...

दक्षिण कोरिया में जनवादी कोरिया के विकास की चर्चा

 अमेरिकी साम्राज्यवाद के सबसे बड़े पिट्ठू दलाल दक्षिण कोरिया के माध्यम से उत्तर कोरिया के बारे में जानना ठीक वैसा ही है जैसा RSS के माध्यम से भारत के आजादी के इतिहास को जानना. आज दुनिया भर में उत्तर कोरिया को लेकर दुष्प्रचार का 90% से ज्यादा हिस्सा दक्षिण कोरिया से ही आता है. लेकिन इसी दक्षिण कोरिया में गिनती के ही कुछ ऐसे संगठन  भी हैं जो कोरिया के एकीकरण और साम्राज्यवाद से पूरी तरह से आजादी का समर्थक हैं. उन्हीं संगठनों में से  एक अखिल कोरियाई प्रगतिशील विश्वविद्यालय छात्र संगठन (한국대학생진보연합) देश के लोगों के बीच उत्तर कोरिया के प्रति विकृत सोच को सही करने का प्रयास कर रहा है और अपने वीडियो प्रस्तुति के द्वारा चेयरमैन किम जंग उन की नीतियों के बारे में सही जानकारी देने की कोशिश कर रहा है. इस वीडियो प्रस्तुति में किम जंग उन और देश के प्रांतीय विकास की चर्चा की गई है. उत्तर कोरिया के बारे में आम धारणा बना दी गई है कि केवल  वहाँ की राजधानी फ्यंगयांग ही विकसित है और बाकी प्रांतीय इलाके बहुत ज्यादा पिछड़े हुए हैं. बात तो ऐसी की जाती है कि दुनिया के बाकी देशों में राजधानी और...

विदेशी पर्यटकों की नजर में जनवादी कोरिया के प्रांतीय इलाके

चित्र
 विदेशी पर्यटकों के कैमरे की नजर से साल 2019 के उत्तर कोरिया के प्रांतीय इलाकों का नजारा. जिस सड़क से ये जा रहे हैं उसे एकीकरण हाईवे (Unification Highway) कहा जाता है और यह सड़क बंद पड़ी दक्षिण कोरिया की सीमा तक जाती है. ये पर्यटक आराम से गाड़ी के खिड़की से और बीच रास्ते में कहीं रुककर  बिना किसी रोकटोक के वीडियो बना रहे हैं. लगभग 30 मिनट के इस वीडियो को अंत तक देखने से पता चल जाएगा कि दुनिया के सबसे कठोर आर्थिक प्रतिबंध और पिछले 7 दशक से अमेरिका से तकनीकी तौर पर युद्धरत होने के बावजूद उत्तर कोरिया में चीजें कितनी साफ सुथरी और व्यवस्थित हैं. हाँ सड़कों पर कारों का रेला दिखने के बजाय पर्यावरण अनुकूल सवारी साईकिल ही ज्यादा तादाद में दिखेंगी.  कुछ लोगों ने  उत्तर कोरिया विरोधी दुष्प्रचार के शिकार होकर ये गलत धारणा बना ली है कि विदेशी पर्यटकों को राजधानी फ्यंगयांग के बाहर घूमने की इजाजत नहीं है . इस वीडियो में सारी जगहें फ्यंगयांग से बाहर की ही हैं. उत्तर कोरिया की सीमा पर स्थित चीन के दानदोंग शहर से रेलवे द्वारा फ्यंगयांग जाने के रास्ते में विदेशी पर्यटकों के कैमरे में ...

जनवादी कोरिया के टीवी चैनल पर दिल्ली के प्रदूषण की खबर

  10 और 11 नवंबर 2021 को उत्तर कोरिया के टीवी चैनल के न्यूज़ बुलेटिन की अंतरराष्ट्रीय खबरों में दिल्ली के वायु और नदी प्रदूषण की खबर दिखाई गई उसी उत्तर कोरिया में जहाँ के बारे में नगाड़ा पीट पीटकर दावे के साथ बताया जाता है कि वहाँ के लोगों को दुनिया की खबर बताई या दिखाई नहीं जाती. इन खबरों में उत्तर कोरिया के दर्शकों को यह बताया जा रहा है कि भारत की राजधानी नई दिल्ली में वायु प्रदूषण निरंतर गंभीर रूप लेता जा रहा है.शहर का वायु प्रदूषण लोगों को सांस संबंधित बीमारियां देने की हद तक खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है. देश के पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण का कारण आसपास के ग्रामीण इलाकों में भारी मात्रा में फसलों के अवशेष जलाने और धार्मिक त्योहार के अवसर पर लोगों द्वारा जमकर पटाखे फोड़ना है.  भारत में नदी प्रदूषण भी गंभीर रूप ले रहा है. राजधानी दिल्ली की नदी का एक हिस्सा कारखानों से निकले प्रदूषकों के कारण जहरीले पदार्थों से ढंका हुआ है. नदी के प्रदूषण का कारण नदी किनारे स्थित कारखानों से निकले औद्योगिक कचरे, विषाक्त अपशिष्ट जल और सीवर के जल को नदी में जस का तस बहा देना है. ...

म्योह्यांग पर्वत में शरद ऋतु

  उत्तर कोरिया के खूबसूरत पहाड़ों में शुमार म्यौह्यांग पर्वत शरद ऋतु में कुछ ऐसा दिखता है जब मैपल वृक्ष के पत्ते पूरी तरह से लाल हो जाते हैं. अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में ये नजारा चरम पर रहता है. साथ में हैं शीशे की तरह पारदर्शी पानी वाले झरने और नदियाँ. ऐसा नजारा तो पूंजीवादी व्यवस्था वाले ठंढी जलवायु वाले देशों में भी देखा जा सकता है तो उत्तर कोरिया में क्या खास है. खास है ये म्यौह्यांग पर्वत जहाँ 60-70 के दशक में सोने के विशाल भंडारों का पता चला था पर उत्तर कोरिया के समाजवाद ने पैसे की जगह प्रकृति को तरजीह दी. अगर ऐसा अंधाधुंध मुनाफे के हवसी धनपशुओं के गढ़ अमेरिका या दक्षिण कोरिया में होता तो क्या होता? भारत में बक्सवाहा के जंगलों पर क्यों खतरा मंडरा रहा है? 

शुक्रिया वर्कर्स पार्टी!!

चित्र
इस पोस्ट को 7 नवंबर 2021 को अपडेट किया गया इन दिनों समाजवादी उत्तर कोरिया के अलग अलग प्रांत के ग्रामीण इलाकों का कायाकल्प करने की झड़ी सी लग गई है जो वर्कर्स पार्टी की  जनवरी 2021 में हुई 8 वीं पार्टी कांग्रेस की समाजवादी ग्रामीण क्षेत्र के निर्माण की महान योजना का हिस्सा है. नवंबर 2021 के पहले हफ्ते में देश के विभिन्न प्रांतों के गांवों में नए बने घरों में लोगों का धूमधाम से प्रवेश कराया गया. इसी कड़ी में दक्षिण फ्यंगआन प्रांत के फ्यंगवन काउंटी के एक गाँव में 700 नए घरों के अलावा सहकारी फार्म प्रबंधन बोर्ड, सांस्कृतिक हाॅल, बच्चों की नर्सरी आदि का निर्माण कराया गया. गाँव के सभी नए बने इन घरों में मवेशियों के लिए बाड़े और भंडार गृह भी बने हुए है. इसके अलावा इन घरों के चारों ओर फलदार पेड़ भी लगाए गए हैं. पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों ने लोगों को इन घरों के आजीवन मुफ्त में इस्तेमाल करने के लिए आवासीय परमिट बांटे और बाद में घर घर जाकर लोगों को पार्टी की तरफ से उपहार भी दिए. ऐसा ही नजारा देश के उत्तरी और दक्षिणी हामग्यंग प्रांत  के ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिला.एक बात और उत...

फसल कटाई

  इन दिनों उत्तर कोरिया में फसलों (धान) की कटाई का काम अपने अंतिम चरण में है. देश के सभी सहकारी कृषि फार्मों में फसल कटाई के लिए चरणबद्ध योजना बनाई गई है और ट्रैक्टर समेत अन्य कृषि यंत्र दिन रात काम में लगे हुए हैं (फसल ही इतनी भरपूर हुई है) और कुछ दिनों के बाद British Brainwashing Corporation (BBC) और Crazy News Network (CNN) और उनकी झूठन परोसने वाले अन्य मीडिया चैनल हमें बताने लगेंगे कि उत्तर कोरिया में भयानक खाद्य संकट है, फसलें बर्बाद हो गई हैं और लाखों लोग भुखमरी के कगार पर हैं और न जाने क्या क्या. BBC और CNN कम से कम वर्ल्ड बैंक या विश्व खाद्य संगठन (WFP) अपने जैसे साम्राज्यवाद के पैसों से पलने वाले बंधु बिरादरों के ही आंकड़े का इस्तेमाल कर लेते जिसमें यह कबूल किया गया है कि उत्तर कोरिया की खाद्य आत्मनिर्भरता 90 फीसद से उपर है और भुखमरी से लोग नहीं मरे थे. एक बात और कि उत्तर कोरिया की 15 फीसदी भूमि ही कृषि योग्य है और वहाँ की जलवायु भी खेती के लायक नहीं है . वहाँ अगर खराब मौसम या अन्य वजहों से फसलें बर्बाद होगी तो वहाँ की पार्टी और प्रशासन ईमानदारी से इस बात  को स्वीकार ...

असहमति का अधिकार

चित्र
इस पोस्ट को 15 दिसम्बर 2021 को अपडेट किया गया   तथाकथित "मुख्यधारा" की तथाकथित "स्वतंत्र और निष्पक्ष " मीडिया द्वारा दुनिया के सबसे सनकी, क्रूर, निरंकुश तानाशाह  जैसी संज्ञाओं से नवाजे गए किम जंग उन की तानाशाही का आलम देखिए कि उनके बगल में बैठा आदमी उनकी बात से असहमति जता रहा है.  उत्तर कोरिया की वर्कर्स  पार्टी की पोलित ब्यूरो की एक बैठक में पार्टी सचिव किम जंग उन के किसी प्रस्ताव पर पांच सदस्यों ने असहमति जताई जो उपरोक्त तस्वीर में साफ साफ दिखाई देता है और असहमति जताने वाले सदस्यों को किसी तोप से नहीं उड़ाया गया या लोगों के सामने गोली नहीं मारी गई क्योंकि उन्हें असहमत होने का अधिकार है. इसलिए उत्तर कोरिया में किम जंग उन समेत कोई भी निरंकुश नहीं हो सकता. वहाँ जनता और पार्टी से कोई उपर नहीं. अगर वहाँ नेता  की बहुत इज्जत है तो उसके जनहितैषी कामों की वजह से ही है.  उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी जो कि एक कम्युनिस्ट पार्टी है के द्वारा संचालित एक समाजवादी देश है जिसमें जनता की तानाशाही ही चलती है. आप जिस उत्तर कोरिया के बारे में आए दिन सुनते रहते हैं उस उत्तर ...

बराबरी वाली व्यवस्था

चित्र
 समाजवादी देश उत्तर कोरिया के बारे में दुनिया के लोगों में घृणित और विकृत समझ बनाने में सबसे बड़ा योगदान किसी का है तो वह अमेरिकी साम्राज्यवादियों के सहयोग से उसके सबसे बड़े पिट्ठू  दलाल  दक्षिण कोरिया का है. उसी दक्षिण कोरिया में कुछ प्रगतिशील लोगों द्वारा हिम्मत कर वहाँ के लोगों में उत्तर कोरिया को लेकर सही समझ बनाने के लिए यूट्यूब पर एक चैनल चलाया जाता है. इस चैनल में धोखेबाजी का शिकार हो कर दक्षिण कोरिया में फंसे उत्तर कोरिया के कुछ लोग भी शामिल हैं जो बिना किसी पैसे के लालच में आकर बिना किसी लाग लपेट के उत्तर कोरिया की हकीकत बयान करते हैं. इस चैनल ने उत्तर कोरिया से संबंधित मुद्दों पर कई एपिसोड किए हैं. इस एपिसोड में यहाँ उत्तर कोरिया की बराबरी वाली व्यवस्था पर चर्चा की जा रही है. जाहिर है पूरी चर्चा कोरियाई भाषा में है.   वीडियो की शुरुआत उत्तर कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग और अन्य शहरों में बनाए गए बच्चों की नर्सरी, अनाथालय, स्कूल, वृद्धाश्रम, थियेटर, मजदूरों के लिए बनाए गए होस्टल की तस्वीरों से होती है. इसके द्वारा इस पूर्वाग्रह को मिटाने की कोशिश की जा रह...

सामजीयन शहर

चित्र
इस पोस्ट को 29 अक्टूबर 2021 को अपडेट किया गया  ये तस्वीरें और वीडियो  उत्तर कोरिया के रयांग्गांग प्रांत (량강도)में स्थित 40,000 की आबादी वाले सामजीयन शहर (삼지연시) की हैं. सामजीयन शहर कोरिया प्रायद्वीप के सबसे उंचे पर्वत माउंट पेकतू (2750 मीटर) के नीचे बसा हुआ है.  सामजीयन  एक ऐतिहासिक भूमि है जहां राष्ट्रपति किम इल संग ने जापानी साम्राज्य विरोधी सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया और विजयी हुए. देश के नेता किम जंग इल का जन्म इसी शहर को अपनी आगोश में समेटे माउंट  पेकतू में हुआ था.  सामजीयन पहले एक कस्बा था  जिसे दो साल पहले 2019 में आधुनिक सभ्यता के प्रतीक पर्वतीय शहर के मॉडल के रूप में पुनर्निर्मित किया गया था। इसके तहत पहाड़ी क्षेत्र से मेल खाते हुए 4,000 से अधिक एक मंजिले और बहुमंजिले आवासीय भवनों और 380  सार्वजनिक और औद्योगिक भवनों का निर्माण किया गया था, जिन्होंने पूर्व कस्बाई क्षेत्र के पुराने भवनों की जगह ली. इसके साथ ही सामजीयन कस्बे  को शहर में पदोन्नत कर दिया गया. इतना ही नहीं इस नए बने शहर के खेतों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, स्कूलों समेत कई अन्...

असली आत्मनिर्भर विकास-1

चित्र
उत्तर कोरिया के खिलाफ तथाकथित मुख्यधारा के तथाकथित स्वतंत्र मीडिया के असंख्य झूठ में से एक झूठ यह भी फैलाया जाता है कि केवल वहाँ की राजधानी फ्यंगयांग ही विकसित है और उसे छोड़कर देश के अन्य शहर बहुत ही पिछड़े हुए हैं और एक तरह से आदिम युग में जी रहे हैं. जबकि सच्चाई यह है कि उत्तर कोरिया के अन्य शहर अपने स्थानीय संसाधनों के बूते ही अपना शानदार कायाकल्प कर रहे हैं.  ढाई लाख की आबादी वाला खांग्यै शहर(강계시) जो छागांग प्रांत(자강도)की राजधानी भी है उसका शानदार कायाकल्प भी इसी कड़ी का हिस्सा है.इस शहर के सारे पुराने अपार्टमेंटों का कायाकल्प किया गया है. स्थानीय निवासियों का कहना था कि पुराने अपार्टमेंट में बरामदा नहीं था और काफी धूल हो जाने से बहुत परेशानी होती थी पर उसके बन जाने से अब काफी आराम है. सनद रहे कि उत्तर कोरिया एक समाजवादी देश है और आजीवन मुफ्त आवास वहाँ के नागरिकों का मौलिक अधिकार है. इसलिए इमारत के पुनर्निर्माण में भी नागरिकों का एक पैसा भी नहीं लगा है. खांग्यै शहर की जन समिति(인민위원회) (सोवियत संघ की सोवियत के समकक्ष) के उपाध्यक्ष का कहना था कि अपार्टमेंटों के पुनर्निर्माण में लग...

जनवादी कोरिया का 73 वां स्थापना दिवस

चित्र
 9 सितम्बर 1948 को जनवादी कोरिया (Democratic People's Republic of Korea, DPRK) की स्थापना हुई थी. इस साल जनवादी कोरिया की स्थापना की 73 वीं वर्षगांठ पर राजधानी फ्यंगयांग में भव्य परेड समारोह आयोजित किया गया.   तस्वीरों के माध्यम से जनवादी कोरिया (उत्तर कोरिया) की स्थापना का संक्षिप्त इतिहास  (सौजन्य: Nodutdol for Korean Community Development)