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तथाकथित 11 दिवसीय "शोक समारोह" का सच

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रेडियो फ्री एशिया साम्राज्यवाद की झंडाबरदार अमेरिकी सरकार का अंग है इसलिए रेडियो फ्री एशिया उत्तर कोरिया के बारे में सही खबर कभी नहीं देगा. उत्तर कोरिया में तख्ता पलट कर वहाँ की जनकल्याणकारी समाजवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंकना ही अमेरिकी साम्राज्यवादियों का "ड्रीम प्रोजेक्ट" है.  इसी रेडियो फ्री एशिया के हवाले से तथाकथित "मुख्यधारा" की मीडिया द्वारा दुनियाभर में चिल्ला चिल्लाकर बताया जा रहा है कि उत्तर कोरिया में किम जंग इल की 10 वीं बरसी पर पूरे देश में 11 दिनों तक लोगों के हंसने, शराब पीने फुर्सत की गतिविधियों (leisure activities) पर रोक लगा दी गई है. इसका पालन करने के लिए पुलिस की भारी मात्रा में तैनाती की गई है. शोक मनाने के लिए ऐसी सरकारी जबरदस्ती पर दुनियाभर के लोग शाॅक्ड हैं. आइए जानते हैं कि अभी उत्तर कोरिया में क्या चल रहा है. ये 19 दिसंबर 2021 को उत्तर कोरिया के एकमात्र सरकारी टीवी चैनल पर प्रसारित शाम के न्यूज़ बुलेटिन की फुटेज है. 19 दिसम्बर यानि "तथाकथित 11 दिवसीय शोक समारोह" का दूसरा या तीसरा दिन. इस वीडियो फुटेज में सबसे पहले राजधानी फ्यंगयांग...

फ्यंगयांग मेट्रो

उत्तर कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग की मेट्रो एक भूमिगत राजमहल के जैसी है. साथ ही ये दुनिया की सबसे गहरी (110 मीटर) और सबसे सस्ती मेट्रो भी है. ब्रिटेन के कोरिया मैत्री संघ(Korea Friendship Association, United Kingdom) के अनुसार फ्यंगयांग मेट्रो का किराया 1992 से नहीं बढ़ा है इस  दौरान कई नए मेट्रो स्टेशन के निमार्ण, मेट्रो प्रणाली का आधुनिकीकरण और नए डिब्बे लगाए गए पर पूंजीवादी देशों की तरह किराया बढ़ाकर जनता पर बोझ नहीं डाला गया. फ्यंगयांग मेट्रो का किराया 1992 से अभी तक भारतीय मुद्रा में 2 रुपए ही है.  2016 की इस वीडियो में फ्यंगयांग मेट्रो के  कोच भी देख लीजिए किसी टोक्यो, सिओल या दिल्ली मेट्रो से कम हैं क्या ? और ये सारे कोच उत्तर कोरिया ने अपनी देशी तकनीक से बनाए हैं. उत्तर कोरिया की तकनीकी क्षमता को कम मत आंकिए. उत्तर कोरिया ने पहले अपने बूते कभी भाप इंजन भी नहीं बनाया था पर 1959 में  वहाँ के मजदूर वर्ग ने अपनी स्वदेशी तकनीक से बिजली इंजन बनाने का कारनामा कर दिखाया था. मेट्रो टिकट के अलावा रोजमर्रा की चीजें भी उत्तर कोरिया में काफी सस्ती हैं. बाकी साम्राज्यवाद क...

क्या है जनवादी कोरिया की खाली सड़कों का राज

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 उत्तर कोरिया के बारे में एक धारणा यह भी है कि वहाँ सड़कों पर कम लोग दिखाई देते हैं और सड़कें लगभग खाली रहतीं हैं और इसी बात को लेकर भयावह कहानियाँ गढ़ दी जाती हैं कि वहाँ के लोगों में डर का राज कायम करके वहाँ के तथाकथित अत्याचारी और क्रूर शासन द्वारा उनके बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी गई हैं  या फिर लोगों को लेबर कैंपों में बंदी बनाकर रख दिया गया है. यह भी कहा जाता है कि जब विदेशी यात्रियों का दल वहाँ आता है तो लोगों को बाहर सड़कों पर घूमने फिरने के लिए छोड़ दिया जाता है कि विदेशियों को सब कुछ सामान्य लगे. उत्तर कोरिया को लेकर लाॅजिक की  हत्या का सिलसिला चलता ही रहता है. वैसे यह बात सही है कि कुछ खास अवसरों और दिन के कुछ वक्त को छोड़कर वहाँ सड़कों पर ज्यादा लोग नहीं दिखाई देते हैं और इसकी ये वजहें हैं 1. उत्तर कोरिया के  सभी शहर अपनी आबादी  की तुलना में विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में फैले हुए हैं. उदाहरण के लिए देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर फ्यंगयांग 2000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और आबादी केवल 32 लाख ही है. वहीं दक्षिण कोरिया की राजधानी ओर सबसे बड़ा शहर सियो...

जनवादी कोरिया की "अनिवार्य सैनिक सेवा" का सच

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  क्या उत्तर कोरिया में सभी नागरिकों के लिए  सैनिक सेवा अनिवार्य  है?  तथाकथित मुख्यधारा की मीडिया का कहना है कि वहाँ पुरूषों और महिलाओं के लिए सैनिक सेवा जरूरी है, पर इसके बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है तो फिर सच क्या है? उत्तर कोरिया विरोधी दुष्प्रचार और झूठ के दुनिया में सबसे बड़े निर्माता दक्षिण कोरिया के ही एकमात्र उत्तर कोरिया फैक्ट चेक यूट्यूब चैनल 왈가왈북 (वाल्गावाल्बुक) ने इस बात का खुलासा किया है कि उत्तर कोरिया में अनिवार्य सैनिक सेवा  नहीं है, जिसे सैनिक सेवा करने का मन है  केवल वही जा सकता/सकती है. वीडियो में बायीं तरफ धारीदार शर्ट पहने हुए शख्स का नाम होंग खांग छल हैं और वे उत्तर कोरिया से हैं और पिछले 8 साल से दक्षिण कोरिया में रह रहे हैं. होंग  यह बता रहे हैं कि उत्तर कोरिया  के संविधान में प्रत्येक नागरिक के लिए सैनिक सेवा को पवित्र कर्तव्य के रूप में उल्लेख किया गया है पर वहाँ  सैनिक सेवा में जाना पूरी तरह से लोगों की इच्छा पर है और जबरदस्ती किसी को सैनिक सेवा में नहीं भेजा जा सकता.वहाँ कोई शख्स विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी...

दक्षिण कोरिया में जनवादी कोरिया के विकास की चर्चा

 अमेरिकी साम्राज्यवाद के सबसे बड़े पिट्ठू दलाल दक्षिण कोरिया के माध्यम से उत्तर कोरिया के बारे में जानना ठीक वैसा ही है जैसा RSS के माध्यम से भारत के आजादी के इतिहास को जानना. आज दुनिया भर में उत्तर कोरिया को लेकर दुष्प्रचार का 90% से ज्यादा हिस्सा दक्षिण कोरिया से ही आता है. लेकिन इसी दक्षिण कोरिया में गिनती के ही कुछ ऐसे संगठन  भी हैं जो कोरिया के एकीकरण और साम्राज्यवाद से पूरी तरह से आजादी का समर्थक हैं. उन्हीं संगठनों में से  एक अखिल कोरियाई प्रगतिशील विश्वविद्यालय छात्र संगठन (한국대학생진보연합) देश के लोगों के बीच उत्तर कोरिया के प्रति विकृत सोच को सही करने का प्रयास कर रहा है और अपने वीडियो प्रस्तुति के द्वारा चेयरमैन किम जंग उन की नीतियों के बारे में सही जानकारी देने की कोशिश कर रहा है. इस वीडियो प्रस्तुति में किम जंग उन और देश के प्रांतीय विकास की चर्चा की गई है. उत्तर कोरिया के बारे में आम धारणा बना दी गई है कि केवल  वहाँ की राजधानी फ्यंगयांग ही विकसित है और बाकी प्रांतीय इलाके बहुत ज्यादा पिछड़े हुए हैं. बात तो ऐसी की जाती है कि दुनिया के बाकी देशों में राजधानी और...

विदेशी पर्यटकों की नजर में जनवादी कोरिया के प्रांतीय इलाके

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 विदेशी पर्यटकों के कैमरे की नजर से साल 2019 के उत्तर कोरिया के प्रांतीय इलाकों का नजारा. जिस सड़क से ये जा रहे हैं उसे एकीकरण हाईवे (Unification Highway) कहा जाता है और यह सड़क बंद पड़ी दक्षिण कोरिया की सीमा तक जाती है. ये पर्यटक आराम से गाड़ी के खिड़की से और बीच रास्ते में कहीं रुककर  बिना किसी रोकटोक के वीडियो बना रहे हैं. लगभग 30 मिनट के इस वीडियो को अंत तक देखने से पता चल जाएगा कि दुनिया के सबसे कठोर आर्थिक प्रतिबंध और पिछले 7 दशक से अमेरिका से तकनीकी तौर पर युद्धरत होने के बावजूद उत्तर कोरिया में चीजें कितनी साफ सुथरी और व्यवस्थित हैं. हाँ सड़कों पर कारों का रेला दिखने के बजाय पर्यावरण अनुकूल सवारी साईकिल ही ज्यादा तादाद में दिखेंगी.  कुछ लोगों ने  उत्तर कोरिया विरोधी दुष्प्रचार के शिकार होकर ये गलत धारणा बना ली है कि विदेशी पर्यटकों को राजधानी फ्यंगयांग के बाहर घूमने की इजाजत नहीं है . इस वीडियो में सारी जगहें फ्यंगयांग से बाहर की ही हैं. उत्तर कोरिया की सीमा पर स्थित चीन के दानदोंग शहर से रेलवे द्वारा फ्यंगयांग जाने के रास्ते में विदेशी पर्यटकों के कैमरे में ...

जनवादी कोरिया के टीवी चैनल पर दिल्ली के प्रदूषण की खबर

  10 और 11 नवंबर 2021 को उत्तर कोरिया के टीवी चैनल के न्यूज़ बुलेटिन की अंतरराष्ट्रीय खबरों में दिल्ली के वायु और नदी प्रदूषण की खबर दिखाई गई उसी उत्तर कोरिया में जहाँ के बारे में नगाड़ा पीट पीटकर दावे के साथ बताया जाता है कि वहाँ के लोगों को दुनिया की खबर बताई या दिखाई नहीं जाती. इन खबरों में उत्तर कोरिया के दर्शकों को यह बताया जा रहा है कि भारत की राजधानी नई दिल्ली में वायु प्रदूषण निरंतर गंभीर रूप लेता जा रहा है.शहर का वायु प्रदूषण लोगों को सांस संबंधित बीमारियां देने की हद तक खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है. देश के पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण का कारण आसपास के ग्रामीण इलाकों में भारी मात्रा में फसलों के अवशेष जलाने और धार्मिक त्योहार के अवसर पर लोगों द्वारा जमकर पटाखे फोड़ना है.  भारत में नदी प्रदूषण भी गंभीर रूप ले रहा है. राजधानी दिल्ली की नदी का एक हिस्सा कारखानों से निकले प्रदूषकों के कारण जहरीले पदार्थों से ढंका हुआ है. नदी के प्रदूषण का कारण नदी किनारे स्थित कारखानों से निकले औद्योगिक कचरे, विषाक्त अपशिष्ट जल और सीवर के जल को नदी में जस का तस बहा देना है. ...

म्योह्यांग पर्वत में शरद ऋतु

  उत्तर कोरिया के खूबसूरत पहाड़ों में शुमार म्यौह्यांग पर्वत शरद ऋतु में कुछ ऐसा दिखता है जब मैपल वृक्ष के पत्ते पूरी तरह से लाल हो जाते हैं. अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में ये नजारा चरम पर रहता है. साथ में हैं शीशे की तरह पारदर्शी पानी वाले झरने और नदियाँ. ऐसा नजारा तो पूंजीवादी व्यवस्था वाले ठंढी जलवायु वाले देशों में भी देखा जा सकता है तो उत्तर कोरिया में क्या खास है. खास है ये म्यौह्यांग पर्वत जहाँ 60-70 के दशक में सोने के विशाल भंडारों का पता चला था पर उत्तर कोरिया के समाजवाद ने पैसे की जगह प्रकृति को तरजीह दी. अगर ऐसा अंधाधुंध मुनाफे के हवसी धनपशुओं के गढ़ अमेरिका या दक्षिण कोरिया में होता तो क्या होता? भारत में बक्सवाहा के जंगलों पर क्यों खतरा मंडरा रहा है? 

शुक्रिया वर्कर्स पार्टी!!

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इस पोस्ट को 7 नवंबर 2021 को अपडेट किया गया इन दिनों समाजवादी उत्तर कोरिया के अलग अलग प्रांत के ग्रामीण इलाकों का कायाकल्प करने की झड़ी सी लग गई है जो वर्कर्स पार्टी की  जनवरी 2021 में हुई 8 वीं पार्टी कांग्रेस की समाजवादी ग्रामीण क्षेत्र के निर्माण की महान योजना का हिस्सा है. नवंबर 2021 के पहले हफ्ते में देश के विभिन्न प्रांतों के गांवों में नए बने घरों में लोगों का धूमधाम से प्रवेश कराया गया. इसी कड़ी में दक्षिण फ्यंगआन प्रांत के फ्यंगवन काउंटी के एक गाँव में 700 नए घरों के अलावा सहकारी फार्म प्रबंधन बोर्ड, सांस्कृतिक हाॅल, बच्चों की नर्सरी आदि का निर्माण कराया गया. गाँव के सभी नए बने इन घरों में मवेशियों के लिए बाड़े और भंडार गृह भी बने हुए है. इसके अलावा इन घरों के चारों ओर फलदार पेड़ भी लगाए गए हैं. पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों ने लोगों को इन घरों के आजीवन मुफ्त में इस्तेमाल करने के लिए आवासीय परमिट बांटे और बाद में घर घर जाकर लोगों को पार्टी की तरफ से उपहार भी दिए. ऐसा ही नजारा देश के उत्तरी और दक्षिणी हामग्यंग प्रांत  के ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिला.एक बात और उत...

फसल कटाई

  इन दिनों उत्तर कोरिया में फसलों (धान) की कटाई का काम अपने अंतिम चरण में है. देश के सभी सहकारी कृषि फार्मों में फसल कटाई के लिए चरणबद्ध योजना बनाई गई है और ट्रैक्टर समेत अन्य कृषि यंत्र दिन रात काम में लगे हुए हैं (फसल ही इतनी भरपूर हुई है) और कुछ दिनों के बाद British Brainwashing Corporation (BBC) और Crazy News Network (CNN) और उनकी झूठन परोसने वाले अन्य मीडिया चैनल हमें बताने लगेंगे कि उत्तर कोरिया में भयानक खाद्य संकट है, फसलें बर्बाद हो गई हैं और लाखों लोग भुखमरी के कगार पर हैं और न जाने क्या क्या. BBC और CNN कम से कम वर्ल्ड बैंक या विश्व खाद्य संगठन (WFP) अपने जैसे साम्राज्यवाद के पैसों से पलने वाले बंधु बिरादरों के ही आंकड़े का इस्तेमाल कर लेते जिसमें यह कबूल किया गया है कि उत्तर कोरिया की खाद्य आत्मनिर्भरता 90 फीसद से उपर है और भुखमरी से लोग नहीं मरे थे. एक बात और कि उत्तर कोरिया की 15 फीसदी भूमि ही कृषि योग्य है और वहाँ की जलवायु भी खेती के लायक नहीं है . वहाँ अगर खराब मौसम या अन्य वजहों से फसलें बर्बाद होगी तो वहाँ की पार्टी और प्रशासन ईमानदारी से इस बात  को स्वीकार ...

असहमति का अधिकार

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इस पोस्ट को 15 दिसम्बर 2021 को अपडेट किया गया   तथाकथित "मुख्यधारा" की तथाकथित "स्वतंत्र और निष्पक्ष " मीडिया द्वारा दुनिया के सबसे सनकी, क्रूर, निरंकुश तानाशाह  जैसी संज्ञाओं से नवाजे गए किम जंग उन की तानाशाही का आलम देखिए कि उनके बगल में बैठा आदमी उनकी बात से असहमति जता रहा है.  उत्तर कोरिया की वर्कर्स  पार्टी की पोलित ब्यूरो की एक बैठक में पार्टी सचिव किम जंग उन के किसी प्रस्ताव पर पांच सदस्यों ने असहमति जताई जो उपरोक्त तस्वीर में साफ साफ दिखाई देता है और असहमति जताने वाले सदस्यों को किसी तोप से नहीं उड़ाया गया या लोगों के सामने गोली नहीं मारी गई क्योंकि उन्हें असहमत होने का अधिकार है. इसलिए उत्तर कोरिया में किम जंग उन समेत कोई भी निरंकुश नहीं हो सकता. वहाँ जनता और पार्टी से कोई उपर नहीं. अगर वहाँ नेता  की बहुत इज्जत है तो उसके जनहितैषी कामों की वजह से ही है.  उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी जो कि एक कम्युनिस्ट पार्टी है के द्वारा संचालित एक समाजवादी देश है जिसमें जनता की तानाशाही ही चलती है. आप जिस उत्तर कोरिया के बारे में आए दिन सुनते रहते हैं उस उत्तर ...

बराबरी वाली व्यवस्था

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 समाजवादी देश उत्तर कोरिया के बारे में दुनिया के लोगों में घृणित और विकृत समझ बनाने में सबसे बड़ा योगदान किसी का है तो वह अमेरिकी साम्राज्यवादियों के सहयोग से उसके सबसे बड़े पिट्ठू  दलाल  दक्षिण कोरिया का है. उसी दक्षिण कोरिया में कुछ प्रगतिशील लोगों द्वारा हिम्मत कर वहाँ के लोगों में उत्तर कोरिया को लेकर सही समझ बनाने के लिए यूट्यूब पर एक चैनल चलाया जाता है. इस चैनल में धोखेबाजी का शिकार हो कर दक्षिण कोरिया में फंसे उत्तर कोरिया के कुछ लोग भी शामिल हैं जो बिना किसी पैसे के लालच में आकर बिना किसी लाग लपेट के उत्तर कोरिया की हकीकत बयान करते हैं. इस चैनल ने उत्तर कोरिया से संबंधित मुद्दों पर कई एपिसोड किए हैं. इस एपिसोड में यहाँ उत्तर कोरिया की बराबरी वाली व्यवस्था पर चर्चा की जा रही है. जाहिर है पूरी चर्चा कोरियाई भाषा में है.   वीडियो की शुरुआत उत्तर कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग और अन्य शहरों में बनाए गए बच्चों की नर्सरी, अनाथालय, स्कूल, वृद्धाश्रम, थियेटर, मजदूरों के लिए बनाए गए होस्टल की तस्वीरों से होती है. इसके द्वारा इस पूर्वाग्रह को मिटाने की कोशिश की जा रह...

सामजीयन शहर

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इस पोस्ट को 29 अक्टूबर 2021 को अपडेट किया गया  ये तस्वीरें और वीडियो  उत्तर कोरिया के रयांग्गांग प्रांत (량강도)में स्थित 40,000 की आबादी वाले सामजीयन शहर (삼지연시) की हैं. सामजीयन शहर कोरिया प्रायद्वीप के सबसे उंचे पर्वत माउंट पेकतू (2750 मीटर) के नीचे बसा हुआ है.  सामजीयन  एक ऐतिहासिक भूमि है जहां राष्ट्रपति किम इल संग ने जापानी साम्राज्य विरोधी सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया और विजयी हुए. देश के नेता किम जंग इल का जन्म इसी शहर को अपनी आगोश में समेटे माउंट  पेकतू में हुआ था.  सामजीयन पहले एक कस्बा था  जिसे दो साल पहले 2019 में आधुनिक सभ्यता के प्रतीक पर्वतीय शहर के मॉडल के रूप में पुनर्निर्मित किया गया था। इसके तहत पहाड़ी क्षेत्र से मेल खाते हुए 4,000 से अधिक एक मंजिले और बहुमंजिले आवासीय भवनों और 380  सार्वजनिक और औद्योगिक भवनों का निर्माण किया गया था, जिन्होंने पूर्व कस्बाई क्षेत्र के पुराने भवनों की जगह ली. इसके साथ ही सामजीयन कस्बे  को शहर में पदोन्नत कर दिया गया. इतना ही नहीं इस नए बने शहर के खेतों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, स्कूलों समेत कई अन्...

असली आत्मनिर्भर विकास-1

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उत्तर कोरिया के खिलाफ तथाकथित मुख्यधारा के तथाकथित स्वतंत्र मीडिया के असंख्य झूठ में से एक झूठ यह भी फैलाया जाता है कि केवल वहाँ की राजधानी फ्यंगयांग ही विकसित है और उसे छोड़कर देश के अन्य शहर बहुत ही पिछड़े हुए हैं और एक तरह से आदिम युग में जी रहे हैं. जबकि सच्चाई यह है कि उत्तर कोरिया के अन्य शहर अपने स्थानीय संसाधनों के बूते ही अपना शानदार कायाकल्प कर रहे हैं.  ढाई लाख की आबादी वाला खांग्यै शहर(강계시) जो छागांग प्रांत(자강도)की राजधानी भी है उसका शानदार कायाकल्प भी इसी कड़ी का हिस्सा है.इस शहर के सारे पुराने अपार्टमेंटों का कायाकल्प किया गया है. स्थानीय निवासियों का कहना था कि पुराने अपार्टमेंट में बरामदा नहीं था और काफी धूल हो जाने से बहुत परेशानी होती थी पर उसके बन जाने से अब काफी आराम है. सनद रहे कि उत्तर कोरिया एक समाजवादी देश है और आजीवन मुफ्त आवास वहाँ के नागरिकों का मौलिक अधिकार है. इसलिए इमारत के पुनर्निर्माण में भी नागरिकों का एक पैसा भी नहीं लगा है. खांग्यै शहर की जन समिति(인민위원회) (सोवियत संघ की सोवियत के समकक्ष) के उपाध्यक्ष का कहना था कि अपार्टमेंटों के पुनर्निर्माण में लग...

जनवादी कोरिया का 73 वां स्थापना दिवस

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 9 सितम्बर 1948 को जनवादी कोरिया (Democratic People's Republic of Korea, DPRK) की स्थापना हुई थी. इस साल जनवादी कोरिया की स्थापना की 73 वीं वर्षगांठ पर राजधानी फ्यंगयांग में भव्य परेड समारोह आयोजित किया गया.   तस्वीरों के माध्यम से जनवादी कोरिया (उत्तर कोरिया) की स्थापना का संक्षिप्त इतिहास  (सौजन्य: Nodutdol for Korean Community Development) 

समाजवादी गाँव

 समाजवादी देश उत्तर कोरिया में वर्कर्स पार्टी अपने महासचिव काॅमरेड किम जंग उन के नेतृत्व में देश के गांवों का कायाकल्प करवा रही है. इसी के तहत देश के दक्षिणी फ्यंगआन प्रांत में समाजवादी सांस्कृतिक गाँव के रूप में एक गाँव का कायाकल्प करवाया गया. देश के अन्य गांवों की तरह यह गाँव भी सांस्कृतिक मनोरंजन की सुविधाओं से युक्त है. इस गाँव के सामुदायिक केंद्र में वर्कर्स पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी ने ग्रामीणों को आवासीय परमिट बांटे जिससे वे आजीवन आवंटित घर का मुफ्त में उपयोग कर सकें. सनद रहे उत्तर कोरिया में आजीवन मुफ्त आवास वहाँ के सभी नागरिकों का मौलिक अधिकार है. इस अवसर पर पारंपरिक कोरियाई ग्रामीण संगीत की धुनों के बीच सभी ग्रामीणों ने अपने नए घरों में प्रवेश किया. इस गाँव के सहकारी फार्म की प्रबंधन समिति की प्रमुख का कहना था कि हमारे गाँव में पिछले साल ठीक से खेती नहीं हो पाई थी फिर भी पार्टी ने बिना किसी भेदभाव के हमारे इस गाँव पर प्यार बरसाया. इसलिए इस बार हम सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर निर्णय लिया कि इस बार हम अनाज उत्पादन के लक्ष्य को पूरा करेंगे. वहीं देश के उत्तर पूर्व में स्थित...

जनवादी कोरिया का युवा दिवस

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इस पोस्ट को 30 अगस्त 2021 को अपडेट किया गया है हर साल 28 अगस्त को उत्तर कोरिया में युवा दिवस मनाया जाता है इस साल युवा दिवस की स्थापना की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर  समारोह भव्यता के साथ आयोजित किया गया. इस अवसर पर राजधानी प्योंगयांग में शाम को नृत्य और आतिशबाजी का रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसके अलावा देश के अन्य शहरों हामहुंग, हेजू, सिनउईजू, सारीवन, हेसान, वनसान, छंगजिन, नाम्फो और गेसंग में युवा दिवस पर कई समारोहों का आयोजन किया गया. इस अवसर पर वर्कर्स पार्टी के महासचिव काॅमरेड किम जंग उन ने अपने बधाई संदेश में देश के समाजवादी निर्माण में युवाओं के योगदान की प्रशंसा करते हुए कम्युनिज्म की ओर बढ़ने का आह्वान किया.  ये उस देश का वीडियो है जहाँ के बारे में हमें कारपोरेट द्वारा संचालित तथाकथित स्वतंत्र मीडिया चैनलों द्वारा गला फाड़ फाड़ कर यह बतलाया जाता है कि वहाँ के हालात दुनिया में सबसे खराब हैं और वहाँ के लोग एक भावहीन रोबोट हैं जिन्हें नाचना, गाना ,उत्सव मनाना ही नहीं आता. कहाँ तो हमारे देश में केवल दो धनपशुओं के लिए पूरा मीडिया खरीदकर रही सही पत्रकारिता को खत्म कर द...

साम्राज्यवाद का जनवादी कोरिया विरोधी प्रोपेगेंडा उद्योग

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उत्तर कोरिया की समाजवादी व्यवस्था और उसकी पार्टी और नेतृत्व के खिलाफ विश्व जनमत बनाने के लिए लाखों करोड़ों डाॅलर की प्रोपेगेंडा इंडस्ट्री काम करती है.  उत्तर कोरिया के बारे में जो अजीबोगरीब, भयावह खबरें आती हैं उसका एक मुख्य स्रोत  NK News है, जिसे स्वतंत्र और निष्पक्ष कहकर प्रचारित किया जाता है. NK News कहता है कि वह अपने पाठकों द्वारा वित्त पोषित (Funded by Subscribers) है. इसकी छानबीन करने पर पता चला कि NK News अपने वास्तविक फंडिंग स्रोतों को छिपाने के लिए सब्सक्रिप्शन का उपयोग करता है. इसे अमेरिकी सेना प्रशांत कमान(US Army Pacific Command) से 108,000 डाॅलर मिलते हैं और यह इसकी आमदनी का 10% है.  इसके अलावा  CIA और अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसियां और रक्षा मंत्रालय इसकी सब्सक्रिप्शन का बड़ा हिस्सा खरीद लेते हैं ताकि दुनिया को लगे कि NK News केवल पाठकों के सब्सक्रिप्शन से ही चलता है. एक बार किसी ने NK News की झूठी खबर को चुनौती देते हुए इसके संस्थापक Chad O Carroll को मेल भेजा तो उसने चोरी पकड़े जाने पर बौखला कर  मेल भेजने वाले को अपशब्दों से नवाज दिया (नीचे फोटो...

जनवादी कोरिया की महिला ट्राली बस ड्राइवर

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 उत्तर कोरिया के बारे में अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई कचरे को जस का तस परोसने वाले विश्वगुरु के मीडिया के अनुसार यहाँ महिलाओं को ड्राइविंग करने की इजाजत नहीं है भले ही वो ट्रैफिक ऑफिसर क्यों न हों. इस बकवास को पूरी तरह से खारिज करते हुए इस वीडियो में प्योंगयांग शहर के कोने कोने में चलने वाली ट्राली बस की महिला ड्राइवरों का जिक्र है इनमें से कुछ महिलाएं तो क्रमशः 36,30 और 35 वर्षों से ड्राइवर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहीं हैं. इनके लिए जनता की सेवा ही परम उद्देश्य है. जनता भी इनपर भरोसा करती है. इनके द्वारा चलाए जाने वाली  ट्राली बस इनके अपने शरीर की तरह ही है. इतना ही नहीं इनके उपर नए भर्ती हुए ड्राइवर कॉमरेडों को प्रशिक्षित करने की भी जिम्मेदारी है जिन्हें वे बखूबी निभाती भी हैं. इनके द्वारा चलाए जाने वाली ट्राली बसों में एक तारे का निशान बना हुआ है जो इस बात की तस्दीक करता है कि इन्होंने  बिना किसी दुर्घटना के 50,000 किलोमीटर तक बस चला लीं हैं .  वहीं देश के पूर्व में स्थित वनसान शहर में  चलने वाली ट्राली बस की ज्यादातर ड्राइवर महिलाएं ही हैं. यहाँ भी कई महिला ...

कैसे हुआ दक्षिण कोरिया का "तथाकथित" आर्थिक विकास

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  खुदा ( अमेरिका) मेहरबान तो गधा (दक्षिण कोरिया ) पहलवान!  दक्षिण कोरिया के आर्थिक विकास को  एक  लाइन में यही कहा जा सकता है. दक्षिण कोरिया के चमत्कारी आर्थिक विकास की पोल खोलता यह आलेख जिसे फ्रांस के इतिहासकार और राजनीतिक विज्ञानी Eric Toussaint ने लिखा है और यह आलेख 2007 में प्रकाशित उनकी किताब The World Bank: A Never Ending Coup का हिस्सा है. (लेख का लिंक :  https://www.globalresearch.ca/as-tensions-increase-with-north-korea-the-south-korean-miracle-is-exposed/5611112#sthash.IJPpU4Cy.gbpl  )  एरिक ने अपने इस लेख की शुरुआत में ही कहा है कि दक्षिण कोरिया का आर्थिक विकास क्रूर आदिम किस्म का पूंजी संचय था जिसे ज्यादा से ज्यादा बलपूर्वक तरीके से हासिल किया गया . दक्षिण कोरिया का आर्थिक विकास एक अंत्यत ही दमनकारी शासन के तले हुआ जिसे समाजवाद के रोकथाम की अमेरिकी रणनीति के तहत अमेरिका का समर्थन प्राप्त था. दक्षिण कोरिया ने उत्पादन केंद्रित ऐसी आर्थिक व्यवस्था को अपनाया जिसमें पर्यावरण के लिए तनिक भी परवाह नहीं थी. बकौल एरिक दक्षिण कोरियाई आर्थिक विकास का...

दक्षिण कोरिया की खौफनाक सच्चाई

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  23 अगस्त 2017 का लेख दक्षिण कोरिया से संबंधित इस बहुत ही लम्बी लेख की शुरुआत दक्षिण कोरिया के समाज के एक हिस्से की भारतीयों के प्रति नस्लवादी टिप्पणियों से हुई है, ऐसा दक्षिण कोरियाई समाज को व्यापक रूप से समझने के उद्देश्य से किया गया है. इस लेख का उद्देश्य सारे दक्षिण कोरियाइयों के प्रति भारतीयों के मन में नफरत फैलाना कतई नहीं है. इस लेख में दक्षिण कोरिया के तथाकथित “विकसित”, “हाई-टेक” वाले अति चमकदार आवरण के पीछे छिपा दिए गए घनघोर अँधेरे पक्षों को उजागर किया गया है और इसके प्रमाण भी दिए गए हैं. जहाँ तक संभव हो सका उन प्रमाणों के अंग्रेजी में लिंक देने की कोशिश की गई, जहाँ नहीं हो सका वहां कोरियाई भाषा में प्रमाणों के लिंक दिए गए हैं. लेख पूरी तरह से सेंसरविहीन है और इस लेख की भाषा कुछ जगहों पर किसी को आपत्तिजनक भी लग सकती है .     ch-1**** UN이 공식적으로 지정한 세계에서 가장 더러운 나라가 인도임. 2위는 지정 없었지만 중국이 아닐지. 2017-06-07 04:11신고 (संयुक्त राष्ट्र का आधिकारिक रूप से मानना है कि विश्व में सबसे गन्दा देश भारत है. दूसरा स्थान घोषित तो नहीं है पर इसपर चीन होगा) davi**** 잘했다.무슬림들, 인도종자...