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क्या है जनवादी कोरिया की सनगुन राजनीति (선군정치)?

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क्या है जनवादी कोरिया की सनगुन राजनीति (선군정치)?    25 अगस्त 1960 को  काॅमरेड किम जंग इल (तस्वीर में बाऐं) ने कोरियाई पीपुल्स आर्मी (केपीए) के ऐतिहासिक सियोल रयू क्यंग सु गार्ड नंबर 105 टैंक डिवीजन का दौरा करके सनगुन (선군 , सेना सर्वप्रथम) क्रांतिकारी नेतृत्व की शुरुआत की थी.  केपीए का उपरोक्त डिवीजन  28 जून 1950 को दक्षिण कोरिया के सियोल में प्रवेश करने वाला पहला  डिवीजन था  और इसने सियोल को अमेरिकी साम्राज्यवादी और दक्षिण कोरियाई कठपुतली औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराया गया था. इसी डिवीजन के टैंक नंबर 312 यूनिट ने इस साल अमेरिकी साम्राज्यवादी हमलावरों के खिलाफ महान पितृभूमि मुक्ति युद्ध में जीत की 70वीं वर्षगांठ के लिए भव्य सैन्य परेड में गर्व से भाग लिया. केपीए के सियोल रयू क्यंग सु गार्ड नंबर 105 टैंक डिवीजन का दौरा करते समय, काॅमरेड किम जंग इल ने  क्रांतिकारी नारा दिया "आइए हम अपने जीवन के साथ  कॉमरेड किम इल संग की अध्यक्षता वाली पार्टी केंद्रीय समिति की रक्षा करें!"। यह नारा इस विचार का सार था कि जनवादी कोरिया की क्रांतिकारी सशस्त्र सेन...

जनवादी कोरिया में शरण

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 हाल ही में, जनवादी कोरिया की कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने पूर्व अमेरिकी सैनिक ट्रैविस किंग के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जो 18 जुलाई को 15: 30 बजे उत्तर- दक्षिण कोरिया की सीमा पर संयुक्त सुरक्षा क्षेत्र के माध्यम से अवैध रूप से जनवादी कोरिया में प्रवेश कर गया था. केसीएनए की रिपोर्ट में कहा गया है कि "जांच के दौरान, ट्रैविस किंग ने कबूल किया कि उसने जनवादी कोरिया में आने का फैसला किया था क्योंकि वह अमेरिकी सेना के भीतर अमानवीय दुर्व्यवहार और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ था. किंग ने जनवादी कोरिया या किसी तीसरे देश में शरण लेने की इच्छा भी व्यक्त की और कहा कि असमान अमेरिकी समाज से उसका मोहभंग हो गया है. सनद रहे कि जनवादी कोरिया की सविधान की धारा 80 कहती है कि कोरिया जनवादी लोकतांत्रिक गणराज्य शांति और लोकतंत्र, राष्ट्रीय स्वतंत्रता और समाजवाद या वैज्ञानिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने के लिए सताए गए विदेशी नागरिकों को शरण देगा. जाहिर है कि साम्राज्यवादियों का मुख्यधारा मीडिया ट्रेविस किंग की पसंद को लेकर नाराज़ है .अमेरिकन ड्रीम' सिर्फ एक बड़...

वाटर पार्क में मस्ती

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 इन दिनों जनवादी कोरिया में प्रचंड गर्मी पड़ रही है. इसलिए जनता सरकारी वाटर पार्कों की ओर भारी संख्या में जा रही है.  वाटर पार्क के प्रबंधन ने भी जनता को बेहतरीन सेवा मुहैया कराने के लिए इंतजाम किए हैं. सबसे ज्यादा जोर साफ पानी प्रदान करने में दिया जा रहा है ताकि जनता बिना किसी फिक्र के जलक्रीड़ा का भरपूर आनंद ले सके. वाटर पार्क में ज्यादातर कारखाना और खेत मजदूर और उनके परिवारों के ही सदस्य हैं.  अमेरिका, भारत, दक्षिण कोरिया जैसे पूंजीवादी देशों में आम मजदूरों और उनके परिवारों को ऐसे शानदार वाटर पार्क में जाना बहुत बड़ी विलासिता है और एक तरह से असंभव ही है. साथ ही जनवादी कोरिया के वाटर पार्कों का प्रवेश शुल्क भी बहुत कम है क्योंकि समाजवादी व्यवस्था में जनता के मनोरंजन का प्रबंध करना राज्य का परम कर्तव्य है, पूंजीवादी देशों में जनता के मनोरंजन के साधनों पर अधिकतर निजी क्षेत्र का ही कब्जा होता है और उसका परम और एकमात्र उद्देश्य ही मुनाफा होता है. इसके अलावा लोगों के बीच काॅरपोरेटजीवी मीडिया और काॅरपोरेट की मैनेजिंग कमिटी यानि लिबरल डेमोक्रेसी वाली सरकार या खुद काॅरपोरेट ...

70 वर्षों के अमेरिका विरोधी टकराव का निष्कर्ष

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  विगत 27 जुलाई 2023 को पितृभूमि मुक्ति युद्ध में जीत की 70 वीं वर्षगांठ पर जनवादी कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग में एक विशाल हथियार प्रदर्शनी (무장장비전시회 2023 ) आयोजित की गई. इसके एक दिन पहले 26 जुलाई को वर्कर्स पार्टी के महासचिव काॅमरेड किम जंग उन ने इस विजय दिवस की बधाई देने जनवादी कोरिया की यात्रा पर आए रुस के रक्षा मंत्री सेर्गेई शोईगू और रूसी सैन्य प्रतिनिधिमण्डल के साथ इस प्रदर्शनी को  देखा. इस विशालकाय हथियार प्रदर्शनी में अमेरिका के साथ 70 वर्षों से युद्धरत जनवादी कोरिया द्वारा उस दौरान अर्जित सैन्य विज्ञान और तकनीक से बनाए गए उच्च कोटि के अत्याधुनिक हथियारों की भरमार थी. इस प्रदर्शनी को देख रहे रुसी रक्षा मंत्री शोईगू और सैन्य प्रतिनिधिमण्डल ने अब तक केवल सुनते आ रहे जनवादी कोरिया के अत्याधुनिक हथियारों को सीधे अपनी आँखों से देखा. प्रदर्शनी के दौरे के दौरान, रक्षा मंत्री शोइगू और रूसी सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने जनवादी कोरिया द्वारा विकसित रणनीतिक मानवरहित टोही विमान  सेब्यल-4 (새별-4) और  बहुउद्देशीय हमलावर  ड्रोन सेब्यल-9 (새별-9) में विशेष रुचि दिखाई. , इसका ...

लैंगिक समानता का कानून

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  आज से 77 साल पहले 30 जुलाई 1946 को महान नेता कॉमरेड किम इल संग की अध्यक्षता में उत्तर कोरिया की प्रोविजनल पीपुल्स कमेटी ने कोरिया में लैंगिक समानता पर कानून पारित किया था। .इतिहास में पहली बार कोरियाई महिलाओं को पुरुषों के बराबर बनाया गया और सदियों से  कोरियाई महिलाओं द्वारा सहन करती आ रही सामंती अधीनता को समाप्त कर दिया, उसके पहले कोरियाई महिलाऐं सामंतवाद और साम्राज्यवाद द्वारा दोहरे और तिगुने शोषण का शिकार थीं.  इस लैंगिक समानता कानून ने घोषणा की कि कोरियाई महिलाएं, जो लंबे समय से समाज में उपेक्षित थीं और अपमान सहती और दुख में रहती थीं, अब उन्हें राजनीति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति सहित सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ समान अधिकार हैं. सबसे पहले, इसने महिलाओं को पुरुषों के समान राजनीतिक स्वतंत्रता और अधिकार प्रदान किए. सभी महिलाएं पुरुषों के समान अधिकारों के साथ सभी स्तरों पर सत्ता अंगों के प्रतिनिधियों के चुनाव में भाग लेने और चुनाव लड़ने और चुने जाने के अधिकार का इस्तेमाल करने में सक्षम हो गईं.इसमें यह भी निर्धारित किया गया कि महिलाओं को पुरुषों के ...

अमेरिकी साम्राज्यवाद पर जीत के गौरवपूर्ण 70 साल

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दुनिया के इतिहास में कई युद्धों का जिक्र है पर कोई भी युद्ध 1950 के दशक में हुए पितृभूमि मुक्ति युद्ध (कोरिया युद्ध) जैसा खूनी और विध्वंसकारी नहीं था. 27 जुलाई 1953 को यानि आज से 70 साल पहले इस युद्ध की परिणिति जनवादी कोरिया की जीत के रूप में हुई. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कोरिया के दक्षिणी भाग यानि दक्षिण कोरिया पर बलपूर्वक कब्जा करने के बाद अमेरिका ने जनवादी कोरिया यानि उत्तर कोरिया जिसने पूर्ण स्वतंत्रता की राह अपनाई, उसके खिलाफ युद्ध की तैयारी तेज कर दी और इस तरह अमेरिका ने पूरे कोरिया को अपना उपनिवेश बनाने के लिए 25 जून 1950 की सुबह आक्रामक युद्ध छेड़ दिया. यह युद्ध एक असमान युद्ध था. इस युद्ध में अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने अपने विशाल सशस्त्र बलों और अपने 15 सहयोगी(कठपुतली) देशों के सैनिकों के साथ-साथ जापानी सैन्यवादियों और दक्षिण कोरियाई कठपुतलियों को भी शामिल किया था. इस युद्ध में आश्चर्यजनक रूप से अमेरिका, जो आक्रामकता के अपने 100 साल के इतिहास में कभी नहीं हारा था और जो दुनिया में "सबसे मजबूत" होने का दावा कर रहा था, को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा, जबकि जन...

जनवादी कोरिया की लोकतांत्रिक पद्धति

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 अक्सर काॅरपोरेट जीवी तथाकथित मुख्यधारा की मीडिया और रिसर्च सेंटर के द्वारा जनवादी कोरिया (उत्तर कोरिया) को लोकतंत्र की कब्रगाह, तानाशाही उत्तराधिकार और ब्रेनवाश्ड लोगों वाले अत्यंत गरीब मुल्क के रूप में पूरी दुनिया में प्रचारित किया जाता है. इतना ही नहीं इनके द्वारा हर साल एक तथाकथित 'डेमोक्रेसी इंडेक्स "(Democracy Index) जारी किया जाता है. इस बार 167 देशों में जनवादी कोरिया की " डेमोक्रेसी " रैंकिंग 165 है और ये डेमोक्रेसी वाले इस बात से हैरान हैं कि जनवादी कोरिया की रैंकिंग सबसे नीचे यानि 167 क्यों नहीं है. जनवादी कोरिया में सरकार द्वारा मुफ्त में घर दिए जाते हैं. शिक्षा और इलाज भी मुफ्त है और सबसे बड़ी बात इन सबके लिए जनता से किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लिया जाता है. वहाँ के शासन का दर्शन ही है कि "जनता ही मालिक है" ( 이민위천) "हम जनता की सेवा करते हैं ( 인민을 위하여 복무함)और यह दर्शन वहाँ के सर्वोच्च स्तर के नेताओं से लेकर निचले स्तर तक रग रग में है और यह दिखाई भी देता है. उस देश की " डेमोक्रेसी " की रैंकिंग लगभग निम्नतम होना लोगों के दिमाग में ...

एक और आधारहीन झूठ

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 13 जुलाई 2023 को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की बैठक में ब्रिटेन के राजदूत जेम्स कारिउकी (James Kariuki) ने न केवल जनवादी कोरिया के आत्मरक्षा जैसे जायज हक के मामले में हस्तक्षेप किया बल्कि कई झूठे और आधारहीन आरोप भी लगाए.  जेम्स ने अपने बयान में यह कहा कि जनवादी कोरिया ने अपने यहाँ से सभी विदेशी राजनयिकों को निकाल दिया है. यह सच नहीं है. चीन, रुस, क्यूबा, वियतनाम, लाओस के राजनयिक वहाँ अभी मौजूद हैं. पश्चिमी देशों के राजनयिक अपनी मर्जी से खुद जनवादी कोरिया से चले गए हैं, उन्हें निकाला नहीं गया है. इसलिए यह कहना कि जनवादी कोरिया उन राजनयिकों को वापस अपने यहाँ आने दे, ये एक बेहूदे बकवास से ज्यादा कुछ भी नहीं. यही चीज तथाकथित गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के संबंध में भी है, उन्होंने भी अपनी मर्जी से जनवादी कोरिया छोड़ा है. वैसे भी जनवादी कोरिया को ऐसे NGOs की जरूरत भी नहीं है, जनवादी कोरिया उनके बिना भी बेहतर है. जहाँ तक तथाकथित परमाणु अप्रसार संधि के पालन का सवाल है, जनवादी कोरिया जनवरी 2003 से ही इस संधि से हट चुका है, इसलिए वह इस संधि का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है. ब्रि...

यू ट्यूब का निंदनीय कृत्य

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हाल में यू ट्यूब ने अपने प्लेटफार्म से जनवादी कोरिया के तीन व्लागरों के चैनल को हटा दिया है जिसमें Yumi और New DPRK प्रमुख हैं.यह एकाधिकारवादी तकनीकी दिग्गजों (  Monopoly Tech Giants) द्वारा सेंसरशिप और अधिनायकवादी कदम है. यूट्यूब अपने इस निंदनीय कृत्य से लोगों को जनवादी कोरिया की सच्चाई जानने से रोक रहा है. जनवादी कोरिया के इन चैनलों को हटाने का समय एक संयोग मात्र नहीं है. तथाकथित मुख्यधारा का मीडिया अपने जनवादी कोरिया विरोधी प्रचार अभियान को तेज कर रहा है, समाचार नेटवर्क में वहाँ के तथाकथित'अकाल' और 'भुखमरी' की झूठी रिपोर्ट भर रहा है. ये चैनल्स  यह साबित कर रहे थे कि यह सच नहीं है. इन चैनलों को हटाकर यूट्यूब जनवादी कोरिया के बारे में सच्चाई को दबा रहा है ताकि मुख्यधारा मीडिया के झूठ से लोगों का और भी ज्यादा ब्रेनवाश हो जाए.  जाहिर है यूट्यूब दक्षिण कोरियाई कठपुतली फासीवादी शासन के ही पक्ष में रहेगा. दक्षिण कोरिया ने हाल में जनवादी  कोरिया से संबंधित 3 चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसमें CIA समर्थित NK News ने इन चैनलों को हटाने में प्रमुख भूमिका निभाई. NK News ने...

जनवादी कोरिया में कृषि कार्य

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  जनवादी कोरिया में इन दिनों धान की रोपनी समेत अन्य कृषि कार्य जोर शोर से चल रहे हैं और अपने अंतिम चरण में है. पर बीबीसी समेत पूरा पश्चिमी काॅरपोरेट मीडिया बिना किसी ठोस सबूत के पूरी दुनिया में  बिलकुल झूठी और भ्रामक खबर फैलाने में लगा है कि जनवादी कोरिया में भुखमरी वाले हालात हैं और वहाँ लोग मर रहे हैं. परंतु बीबीसी के इस बेशर्म झूठ के विपरीत जनवादी कोरिया के विभिन्न प्रान्तों में खेती बाड़ी से जुड़े काम बदस्तूर जारी हैं.  दक्षिणी फ्यंगआन प्रांत के विभिन्न सहकारी कृषि फार्मों में वैज्ञानिक तरीके से धान के बिचड़े बोने से लेकर क्यारी प्रबंधन के लिए उन्नत प्रशिक्षण दिए जाने के साथ साथ समाजवादी प्रतियोगिता को बढ़ावा दिया जा रहा है, इसी के तहत प्रांत की राजधानी फ्यंगसंग में स्थानीय स्तर पर विकसित उन्नत किस्म के कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई और बेहतर प्रदर्शन करने वाले सहकारी फार्मों को पुरस्कृत भी किया गया. इसके अलावा धान के बिचड़ो की स्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन जैसे अत्याधुनिक उपकरणों की मदद ली जा रही है. अनाज के अलावा फलों की खेती पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. ...

बीबीसी का झूठ!!

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 दुनिया की सबसे बड़ी फेक न्यूज़ की फैक्ट्री में से एक ब्रिटिश ब्रेनवाशिंग कारपोरेशन (BBC) ,जिसे गलती से स्वतंत्र और निष्पक्ष खबरों का पर्याय और गोदी पत्रकारिता के बहुत बड़े शिकार भारतीय लोगों द्वारा सच्चाई के लिए लड़ने वाला योद्धा समझने की नासमझी की जाती है, उस बीबीसी ने हाल में जनवादी कोरिया मे तथाकथित 'अकाल' और 'भुखमरी' के उपर पूरी तरह से फेक न्यूज़ पर आधारित डाक्यूमेंट्री का प्रसारण किया है. बीबीसी अगर अपनी इसी बात पर सही रहती तो अभीतक जनवादी कोरिया में सभी लोगों को भूख से एक बार नहीं बल्कि कई बार मर जाना चाहिए था क्योंकि बीबीसी कई बार वहाँ के तथाकथित अकाल और भुखमरी के उपर अपनी खबरें (?) दिखा चुका है. यह कार्यक्रम न केवल पूरी तरह से गलत, झूठा और भ्रामक है बल्कि अत्यधिक और अविश्वसनीय पूर्वाग्रह भी प्रदर्शित करता है. इस कार्यक्रम में जनवादी कोरिया को अपना पक्ष पेश करने का अवसर नहीं दिया गया था, और वहाँ की सरकार के किसी अधिकारी या राजनयिक का साक्षात्कार नहीं लिया गया था,जबकि जनवादी कोरिया के ब्रिटेन के साथ राजनयिक संबंध हैं और लंदन में जनवादी कोरिया का दूतावास भी मौजू...

दंगा और हिंसक प्रदर्शन मुक्त समाज

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  आए दिन आप तथाकथित आदर्श "लिबरल डेमोक्रेसी" वाले देशों अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस इत्यादि देशों में हिंसक प्रदर्शन, दंगे तोड़ फोड़ की खबरें सुनते ही रहते हैं. इन सबकी मुख्य वजह बेरोजगारी, मंहगाई, गरीबी, गैर बराबरी, भेदभाव, प्रशासन द्वारा शोषण इत्यादि होते हैं.  जनवादी कोरिया में ऐसी अराजकता अकल्पनीय है. जनवादी कोरिया में सभी को मुफ्त में आवास प्रदान किया जाता है, शिक्षा मुफ्त है, 100% रोजगार की गारंटी है, और 1974 से जनता को किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं देना पड़ता है. ऐसे में वहाँ की जनता किस आधार पर विरोध करेगी?  इन सबसे ऊपर, जनवादी कोरिया की जनता मजबूती से अपने नेता और पार्टी के इर्द-गिर्द एकजुट हैं और दुनिया के किसी भी देश में ऐसा नहीं है. जनवादी कोरिया एक ऐसा देश है जिसमें सब कुछ स्थिर है, जिसकी तुलना तथाकथित "विकसित" पूंजीवादी देशों से नहीं की जा सकती. जनवादी कोरिया के युवा दंगा नहीं करते हैं.वे समाजवाद के निर्माण और देश की रक्षा के लिए प्रभारी और अगुआ इकाइयों के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हैं जब भी अमेरिकी साम्राज्यवादियों और उनके दलालों द्वारा उन...

एक झूठी और भ्रामक तुलना

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  विगत 6 मई 2023 को ब्रिटेन के  नए राजा  की ताजपोशी राष्ट्र प्रमुख के तौर पर हुई. उसके बाद से ही कुछ उदारवादी, अराजकतावादी और खुद को वामपंथी या समाजवादी कहने वाले लोग राजशाही विरोधी प्रदर्शनों की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कह रहे हैं कि "यह उत्तर कोरिया जैसा है".  ऐसे बयान कई झूठी तुलनाओं पर आधारित होते हैं और समझ की कमी दिखाते हैं, इन बयानों से वे  यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि मानो जनवादी कोरिया  एक भयानक जगह हो. जनवादी कोरिया एक राजशाही नहीं है. काॅमरेड किम जंग उन राज्य के निर्वाचित प्रमुख हैं और उन्हें वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के महासचिव के रूप में चुना गया है. कॉमरेड किम जंग उन को पहली बार  2010 में वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (जो पार्टी के लाखों सदस्यों और उनके परिवारों का प्रतिनिधित्व करते थे) के सम्मेलन में  पार्टी  के केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में और   केंद्रीय समिति के सदस्य के रूप में चुना गया था. बाद में 2012 , 2016 2021 में काॅमरेड किम जंग उन  को वर्कर्स पार्टी के सम्मेलन और सुप्रीम पीपुल्स असेंबल...

जनवादी कोरिया का तथाकथित राजतंत्र

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  आम तौर पर जनवादी कोरिया(उत्तर कोरिया) के बारे में तथाकथित मुख्यधारा के मीडिया के अलावा उदारवादियों और यहाँ तक कि कुछ "असली मार्क्सवादियों और कम्युनिस्टों के कुछ खेमों द्वारा कई तरह की बदनाम, मनगढ़ंत , विकृत और अपमानजनक बातें की जाती हैं . उनमें से एक बात यह है कि 'हम जनवादी कोरिया का समर्थन नहीं कर सकते क्योंकि यह एक राजशाही है ......  आइए तथ्यों को देखें और तथाकथित राजशाही जनवादी कोरिया और ब्रिटेन जो कि घोषित रुप से 'संवैधानिक राजशाही' के रूप में जाना जाता है , कि तुलना करें. ब्रिटेन में राज्य के प्रमुख किंग चार्ल्स हैं, और जनवादी कोरिया के प्रमुख काॅमरेड किम जंग उन हैं, जो जनवादी कोरिया के राज्य मामलों के आयोग(State Affairs Commission, 국무위원회 )के अध्यक्ष और वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के महासचिव हैं. दोनों पद निर्वाचित पद हैं, किंग चार्ल्स निर्वाचित नहीं हैं. ( वैसे भी जिस भी "लिबरल डेमोक्रेसी" के प्रमुख निर्वाचित है तो उन्हें हर हाल में कारपोरेट की ही चाकरी करनी ही है. और विश्वगुरु के लोकतंत्र के तो क्या ही कहने!)  जनवादी कोरिया के 'समाजवादी संवि...