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खुशी के पल

 उत्तर कोरिया की विभिन्न ईकाईयों जैसे कारखानों, स्कूल काॅलेजों दफ्तरों में अपने उद्यान लगाने की परंपरा है. प्योंगयांग के एक सरकारी स्कूल (उत्तर कोरिया में निजी क्षेत्र पाया ही नहीं जाता है) का अपना वनस्पति उद्यान (Botanical Garden) ना सिर्फ स्कूल की सुंदरता में चार चांद लगाता है बल्कि छात्रों को बिना वनस्पति उद्यान गए स्कूल में ही विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों और फूलों से परिचित होने और संबंधित जानकारी बढ़ाने में मदद मिलती है. इस उद्यान में 1000 किस्म के पेड़ पौधे हैं. स्कूल  के एक कर्मी का कहना है कि विद्यार्थी काॅमरेडों के साथ उद्यान घूमने में उन्हें बहुत अच्छा लगता है और फुर्सत के पलों में उनके सहकर्मी कॉमरेड यहाँ किताब पढ़ते और स्वच्छ हवा खाते हुए मानसिक शांति का अनुभव करते हैं. वहीं स्कूल की एक छात्रा का कहना था कि इस स्कूल में दाखिले के बाद पहली बार तरह तरह के पेड़ पौधों को देखना एक विलक्षण अनुभव है. उत्तर कोरिया के दूसरे स्कूलों में भी ऐसे ही वनस्पति उद्यान लगाए गए हैं.  विश्वगुरु के सरकारी तो छोड़ ही दीजिए कितने निजी स्कूलों के पास ऐसी व्यवस्था है?  वहीं उत्तर...

जनवादी कोरिया में 15 अगस्त

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  भारत की तरह कोरिया का भी स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है. भारत से 2 साल पहले 15 अगस्त 1945 को कोरिया जापान के साम्राज्यवादी शासन से आज़ाद हुआ था, तब कोरिया विभाजित नहीं था. इसलिए उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों देशों में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. इस साल जहाँ भारत में आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनाई गई वहीं कोरिया में 76 वीं.  उत्तर कोरिया में 15 अगस्त 2021 को स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर देश के सभी कारखानों, कार्यालयों, सहकारी फार्मों, स्कूलों और कालेजों में झंडोत्तोलन किया गया. राजधानी प्योंगयांग के अलावा अन्य प्रांतीय शहरों और गांवों में पार्टी  और सरकार के अलावा आम जनता ने देश के महान नेताओं किम इलाज संग और किम जंग इल की प्रतिमाओं और शहीदों के स्मारकों पर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए. इस अवसर पर पूरे देश में नृत्योत्स्व, गीत संगीत, आर्केस्ट्रा, फिल्म, नाटक और सर्कस आयोजित किए गए.  उत्तर कोरिया 15 अगस्त 1945 के बाद से ही पूरी तरह से आज़ाद मुल्क है. वहीं दक्षिण कोरिया 15 अगस्त 1945 से लेकर 8 सितम्बर 1945 तक जापानी साम्राज्य...

क्या पढ़ते हैं जनवादी कोरिया के स्कूली बच्चे भारत के बारे में

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उत्तर कोरिया के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में चलने वाली विश्व इतिहास की किताब में सिंधु घाटी सभ्यता और भारत की जाति व्यवस्था से संबंधित अध्याय का हिंदी अनुवाद पृष्ठ 7 भारत का  दास राज्य  1. सिंधु सभ्यता  प्राचीन भारत दक्षिणी एशिया में स्थित था। मानव संस्कृति प्राचीन भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में  सिंधु नदी नदी घाटी में नील नदी (मिस्र) या दक्षिण पश्चिम एशिया की तुलना में थोड़ी बाद में विकसित हुई, जिसे सिंधु सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता कहा जाता है। ये भारत की सबसे पुरानी सभ्यता थी जो 30 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 16 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास की है। सिंधु नदी घाटी में, सिंचाई की खेती जल्दी शुरू हुई, पहला दास राज्य बना और शहरी संस्कृति विकसित हुई। सिंधु सभ्यता के मुख्य अवशेष  मोहनजोदड़ो (मृतकों का टीला) और हड़प्पा के खंडहर हैं, जो 1920 के दशक में  खुदाई में मिले. (वर्तमान में ये जगह भारत से अलग हुए पाकिस्तान में है)  पृष्ठ 8 ये खंडहर बताते हैं कि सुदूर अतीत में इस जगह पर एक बड़े शहर का निर्माण और विकास हुआ था। सिंधु नदी के तट पर स्थित मोहनजोदड़ो के अवशेष ...

दक्षिण कोरिया: सबसे सफल अमेरिकी नव उपनिवेश

वीडियो में दिखाया गया है कि पिछले दिनों दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में अमेरिकी सेना के एक कर्मी ने एक 50 वर्षीय दक्षिण कोरियाई पार्किंग कर्मी को पीट दिया. उसकी वजह उस कर्मी का अंग्रेजी नहीं बोल पाना थी. दक्षिण कोरिया की पुलिस  उस अमेरिकी पर कोई कारवाई किए बिना सिर्फ इसे अमेरिकी सैनिक पुलिस (US Military Police) को सौंप सकती थी. इसकी वजह अमेरिका के साथ हुआ SOFA(Status of Forces Agreement) था, जिसके तहत अमेरिकी सेना के किसी भी जवान और कर्मचारी द्वारा दक्षिण कोरिया में वहाँ के लोगों के साथ मारपीट, बलात्कार, हत्या जैसे अपराध करने पर भी दक्षिण कोरिया की पुलिस और अदालत उनपर कोई कारवाई नहीं कर सकती और ऐसे अपराधियों को अमेरिका को सौंपना पड़ता है. अमेरिका चाहे उनपर जो कारवाई करे पर इससे एक बात स्पष्ट होती है कि दक्षिण कोरिया अपनी ही सरजमीं पर अमेरिका के सैनिकों द्वारा अपने ही नागरिकों के साथ हुए अपराध के लिए कोई कारवाई करने में असमर्थ है यानि संप्रभु नहीं है. उपनिवेश और किसे कहते हैं?  पार्किंग वाली घटना महज एक उदाहरण है. इसके अलावा आए दिनों दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिकों द्वारा ...

खाने के मामले में आत्मनिर्भर उत्पादन इकाईयां

उत्तर कोरियाई समाज की लगभग हर उत्पादन इकाई – जैसे सहकारी खेत, कारखाने, व्यवसायिक इकाईयां, आदि  अपने लिए आवश्यक खाने पीने की चीजों  के उत्पादन में आत्मनिर्भर है.आत्मनिर्भरता के सिद्धांत के आधार पर, वे खुद को खिलाने के लिए छोटे पैमाने पर पशुधन खेतों (Livestock farms) ,सहकारी सब्जी और फल उद्यान और ग्रीनहाउस संचालित करते हैं. इन्हें चलाने के लिए अनिवार्य रूप से एक बैक ऑपरेशन(Back Operation) दल होता है.इस दल के लोग उत्पादन इकाईयों के कामगार ओर उनके परिवारों को खिलाने के लिए सूअर, मछली मुरगे , बकरी,खरगोश बतखों के प्रजनन ओर उनके पालन के साथ साथ मांस,दूध, अंडे, मशरूम के साथ साथ फल और सब्जी उपजाने के लिए जिम्मेदार हैं.

क्यूबा की क्रांति की रक्षा

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उत्तर कोरिया-क्यूबा की जनता के बीच जुझारू दोस्ताना एकता जिंदाबाद!!  उत्तर कोरिया और क्यूबा में समाजवाद की स्थापना का साझा इतिहास रहा है. और इन दोनों देशों के नेता  काॅमरेड किम इल सुंग और  काॅमरेड फिदेल कास्त्रो दोनों ही क्रन्तिकारी गुरिल्ला लड़ाके थे.दोनों देशों का साम्राज्यवाद विरोध का साझा इतिहास रहा है. उत्तर कोरिया-क्यूबा का संबंध कम्युनिस्ट पार्टियों और समाजवादी देशों के लिए एक मॉडल की तरह हैं. और दोनों देशों के संबध पूरी तरह से मार्क्सवादी लेनिनवादी और सर्वहारा अंतर्राष्ट्रीयतावाद (Proletarian internationalism) पर आधारित हैं. 1968 में काॅमरेड राउल कास्त्रो  ने कहा था अगर कोई क्यूबाईयों से किसी खास मसले  पर उनकी राय जानना चाहता है तो उसे उत्तर कोरियाइयों से पूछना चाहिए. और अगर कोई उत्तर कोरियाईयों से किसी खास मसले पर उनकी राय जानना चाहता है तो उसे क्यूबाईयों से पूछना चाहिए. हरेक मसले पर हम दोनों की राय एक समान ही है.                        ...

कोरिया युद्ध किसने शुरु किया?

  कोरिया युद्ध किसने शुरु किया? अंग्रेजी  की यह डाक्यूमेंट्री इस गोयबल्सी झूठ को सिरे से खारिज करती है कि उत्तर कोरिया ही इसके लिए जिम्मेदार था. असल में इस युद्ध की पृष्ठभूमि जंगखोर अमेरिका के द्वारा बहुत पहले से ही तैयार की जा रही थी. कोरिया अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण क्षेत्र में अपने दबदबे को कायम रखने के लिहाज से रणनीतिक रुप से महाशक्तियों के लिए शुरू से ही मुफीद रहा है. अमेरिका भी 19 वीं शताब्दी से ही सुदूर पूर्व में अपनी पैठ बनाने के लिए कोरिया पर कब्जा करने की नीयत रखता था. 21 अगस्त 1866 को उसने व्यापारिक जहाज के भेष में समुद्री डाकुओं (Black Pirate Ship) से भरा जहाज जनरल शरमन (USS General Sherman)कोरिया के पास भेजा जो बिना अनुमति के समुद्र के रास्ते वर्तमान उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग के निकटवर्ती  नदी तक आ गया और उसपर सवार डाकुओं ने स्थानीय अधिकारी को बंधक बना बंदूकों से अंधाधुंध फायरिंग कर 7 लोगों को मार डाला. इस पर स्थानीय लोगों ने जहाज पर हमला कर उसे जला डाला. इसके 16 साल बाद कोरिया को बहुत ही अपमानजनक शर्तों पर अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौता करने पर ...

जनवादी कोरिया में नीली जींस और साम्राज्यवाद विरोधी शिक्षा

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उत्तर कोरिया में नीली जींस पर प्रतिबंध है और इसका उल्लंघन करने पर कठोर दंड दिया जाता है तो फिर नीचे फोटो में महिला ने क्या पहन रखा है? उत्तर कोरिया में कानूनन नीली जींस कभी बैन नहीं रही है जिसको पहनना है उसे पहनने की आजादी है. वहाँ के लोग अपने पारंपरिक कपड़ों में खुश रहते हैं और ये चीज उनपर थोपी नहीं गई है. उत्तर कोरिया पश्चिम की अच्छी चीजों को भी अपनाता है. हाँ इतना जरूर है कि वहाँ साम्राज्यवाद विरोधी और वर्गीय चेतना संबंधित शिक्षा पर जोर दिया जाता है जो समाजवाद की रक्षा के लिए निहायत जरूरी है. वीडियो फुटेज में दिखाया गया है कि किस तरह से पार्टी का शिक्षक दल देश के विभिन्न कारखानों में जाकर पार्टी सदस्यों और कामगारों को साम्राज्यवाद विरोधी और वर्ग चेतना से संबंधित शिक्षा गीत, संगीत, भाषण और दृश्य श्रव्य (Audio Visual) के माध्यम से देता है. इसी कड़ी में शिक्षक दल ने रयूग्यंग जूता फैक्ट्री का दौरा किया . दल की एक सदस्य का कहना था कि हम कई जगह घूम घूम कर वहाँ के कामगारों को साम्राज्यवादियों द्वारा हमारे लोगों पर किए गए अत्याचारों का इतिहास और वर्ग शत्रुओं की कुटिल चालों के बारे में बता...

जंगल उगाओ!

 पूंजीवादी देशों में जहाँ पूंजीपतियों के मुनाफे की हवस के लिए जहाँ जंगल उजाड़े जा रहे हैं, वहाँ उत्तर कोरिया जैसे समाजवादी देशों में जनता की भलाई और बेशक पर्यावरण की रक्षा के लिए नए जंगल उगाए जा रहे हैं. उत्तर कोरिया के दक्षिण फ्यंगआन प्रांत के ह्वेछांग काउंटी में कामगार नए जंगल उगाने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए पौधे तैयार करने से लेकर पहले से उगाए हुए पेड़ों (जंगलों) की देखभाल भी की जा रही है. इस काउंटी में चारों तरफ विभिन्न प्रकार के पेड़ों से सजे हरे भरे जंगलों की भरमार है. काउंटी के पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से उगे पेड़ों के अलावा उपयोगी पेड़ लगाए गए हैं और पहले उगाए गए जंगलों की सफलता को देखते हुए आगे और जंगल लगाने की योजना बनाई जा रही है. इसके लिए काउंटी की पौधशाला (नर्सरी)  में जंगल उगाने के लिए यहाँ के कामगार देशभक्ति की भावना से लबरेज होकर  विज्ञान और तकनीक की मदद से  विभिन्न प्रकार के अच्छे पौधे तैयार कर रहे हैं और इस पौधशाला में दस लाख से ज्यादा पौधे तैयार कर दूसरी जगह भेजे भी गए हैं. सिर्फ इस काउंटी में ही नहीं, समाजवादी उत्तर कोरिया के ऐसे अनेक काउं...

जनवादी कोरिया से संबंधित सामान्य मिथक और उसकी वास्तविकता

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मिथक 1- “उत्तर कोरिया के लोग विदेशियों से संपर्क करने से डरते हैं  (क्योंकि ऐसा  करने से उन्हें बंदीगृह कैंप में भेज दिया जाएगा). वास्तविकता- उत्तर कोरिया घूमने गए विदेशियों ने वहाँ के लोगों को बहुत ही जोशीला और दोस्ताना पाया है और वे विदेशियों से बातचीत करने को उत्सुक रहते हैं. टूर गाईड भी विदेशियों को स्थानीय लोगों से अलग नहीं करते हैं और लोग विदेशियों के पास जाकर बात करने के लिए आजाद हैं. जिन विदेशियों को कोरियाई भाषा नहीं आती टूर गाईड उनके और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत में दुभाषिए का काम खुशी खुशी कर देते हैं.   मिथक 2- “ उत्तर कोरिया की राजधानी एक दिखावटी शहर है और साईकिल चालकों, गर्भवती महिलाओं, वृद्धों और मानसिक रोगियों और विकलांगों के लिए प्रतिबंधित है". वास्तविकता- प्योंगयांग न केवल एक आकर्षक शहर है बल्कि यह शहर प्रभावशाली वास्तुकला, शानदार शहर नियोजन और आश्चर्यजनक स्मारकों को समेटे हुए है. प्योंगयांग की सड़कों पर खूब सारे साईकिल सवारों को देखा जा सकता है. दुनिया के अन्य शहरों की तरह प्योंगयांग में भी वृद्ध और विकलांग भी रहते हैं और सभी लोगों को मुफ्त स्वास्थ्...

झूठ, झूठ और केवल झूठ! -1

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इन दिनों पश्चिमी साम्राज्यवाद के सबसे बड़े भोंपू British Brainwashing Corporation (BBC) और Crazy News Network (CNN) गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहे हैं कि उत्तर कोरिया में एक बोतल शैम्पू 200 अमेरिकी डॉलर और एक किलो केला 45 डॉलर में मिल रहा है. उनके इस खबर का स्त्रोत Daily NK News Or NK News or Radio Free Asia है जिसकी फंडिंग साम्राज्यवादी एजेंसियों जैसे  अमेरिका के कुख्यात CIA और अमेरिकी सरकार की ब्राडकास्टिंग बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स(Broadcasting Board of Governors)   जो  हिटलर के प्रचार मंत्री गोएबल्स की परंपरा का वाहक है, से होती है. जिस केले और शैम्पू  की कीमत की बात की जा रही है वो विदेशों से आयात की हुई हैं.   साम्राज्यवाद के भोंपू ये नहीं बतलाते हैं कि उत्तर कोरिया अपनी जरूरत का लगभग सभी सामान खुद बनाता है क्योंकि वह आत्मनिर्भरता की नीति पर चलता है. दूसरी बात उत्तर कोरिया की जिन दुकानों का हवाला देते हुए कीमत की बात की गई है वो दुकानें विदेशी पर्यटकों और विदेशी राजनयिकों द्वारा इस्तेमाल की जाती हैं. उत्तर कोरिया की जनता को खाने पीने की चीजें सरकार द्वारा ल...