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जनवादी कोरिया में मातृत्व अवकाश

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 उत्तर कोरिया में प्रसव पूर्व/पश्चात अवकाश सवैतनिक (Paid) है. दूसरे शब्दों में वहां महिलाएं प्रसव पूर्व/पश्चात के अवकाश के दौरान अपने कार्यालय आने जाने के दिनों की तरह ही राशन और वेतन पाती हैं. वहां महिलाओं का प्रसव पूर्व/पश्चात अवकाश उनके सेवा अवधि से बिना कोई मतलब रखे 60 दिन (प्रसव पूर्व) और 90 दिन (प्रसव पश्चात) यानि कुल 150 दिनों का था. लेकिन 22 जुलाई 2015 को उत्तर कोरिया की संसद की स्थायी समिति (Standing Committee) ने प्रसव पूर्व/पश्चात अवकाश की अवधि 60 दिन (प्रसव पूर्व) और 180 दिन (प्रसव पश्चात) यानि कुल 240 दिन (लगभग 34 सप्ताह) का कर दिया. यह (प्रसव अवकाश के लिए) 100% वेतन देने वाले देशों में सबसे लंबी अवकाश अवधि है. राजधानी प्योंगयांग में पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं को अनिवार्य रूप से वहां के प्योंगयांग प्रसूति अस्पताल (Pyongyang Maternity Hospital) में भर्ती कराया जाता है  क्योंकि ऐसी महिलाओं का प्रसव सबसे कठिन होता है. देश के बाकी हिस्सों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जाँच में अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो उन्हें भी प्योंगयांग प्रसूति अस्पताल भेजकर उ...

(पुराना लेख) ICBM ह्वासुंग -15 का सफल परीक्षण

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 30 नवंबर 2017 का लेख उत्तर कोरिया ने 28 नवम्बर को तड़के 3 बजे (स्थानीय समयानुसार) अपनी एक और उन्नत अंतर्महादेशीय मिसाइल(ICBM)  ह्वासुंग -15 का सफल परीक्षण किया. यह बताया जा रहा है कि  ह्वासुंग- 15 परमाणु  हथियारों के साथ 13,000 से अधिक किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है , यानि इसकी जद में अमेरिका के सारे शहर आते हैं. इसी के साथ उत्तर कोरिया अमेरिका विरोधी देशों में रूस और चीन के बाद ऐसा तीसरा देश हो गया है जिसने अमेरिका को उसके घर के अंदर घुस कर मारने की क्षमता हासिल कर ली है.  उत्तर कोरिया का मिसाइल कार्यक्रम एक संप्रभु देश के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है. ये अमेरिका और उसके दुमछल्ले ही हैं जो विश्व जनमत को यह कहकर बरगलाते रहते हैं की उत्तर कोरिया का मिसाइल कार्यक्रम पुरी दुनिया के लिए खतरा है जबकि उत्तर कोरिया ने कई बार स्पष्ट किया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम सिर्फ अमेरिका के हमले से उसकी रक्षा के लिए है. सबको मालूम है कि अमेरिका को विश्व शांति की कितनी फ़िक्र है. वही अमेरिका जो अपनी स्थापना की कुछ सालों के बाद से ही यानि 1798 से ल...

अमेरिकी पर्यटकों की नजर में जनवादी कोरिया

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 7 सितम्बर 2017 का लेख उत्तर कोरिया की यात्रा पर गए अमेरिकी पर्यटकों के दल में शामिल एक अमेरिकी महिला ने अपनी यात्रा के तीसरे दिन ही कहा कि वो उत्तर कोरिया से वापस नहीं जाना चाहती. बीते 5 अगस्त से लेकर 14 अगस्त 2017 तक अमेरिका के युद्ध विरोधी संगठन Answer Coalition के कार्यकर्ताओं ने उत्तर कोरिया को समझने के लिए चीन के छिंगहवा विश्ववविद्यालय(Tsinghua University) के कोरियाई मूल के विजिटिंग प्रोफेसर चुंग कियुल(Chung KiYul) के साथ वहां की यात्रा की.  प्रोफेसर चुंग ने दक्षिण कोरिया के एक इन्टरनेट आधारित प्रगतिशील और उत्तर कोरिया से सहानुभूति रखने वाले अख़बार को दिए गए वीडियो इंटरव्यू में यह बात कही . इस लेख में वह कोरियाई भाषा में दिया गया वीडियो इंटरव्यू भी है. कोरियाई भाषा का यह लेख (लिंक : http://m.jajusibo.com/35213 ) प्रोफेसर चुंग के वीडियो इंटरव्यू का ही सारांश है. मैं इस लेख के मुख्य बिन्दुओ का कोरियाई भाषा नहीं जानने वाले और उत्तर कोरिया के बारे में उत्सुक दोस्तों के लिए हिंदी में अनुवाद कर रहा हूँ. आईये देखते हैं कि अपने जीवन में पहली बार उत्तर कोरिया गए उन अमेरिकियों ने अ...

साल 2020 और जनवादी कोरिया

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 यह लेख 31 दिसम्बर 2020 का है साल 2020 विश्वव्यापी महामारी कोरोना के लिए इतिहास के पन्नों  में दर्ज किया जाएगा। इस साल ने हमें यह भी दिखाया  कि  कोरोना महामारी से निबटने में कौन सी व्यवस्था बेहतर साबित हुई, मुनाफा केंद्रित पूंजीवादी व्यवस्था या मानवकेंद्रित समाजवादी व्यवस्था. पूंजीवादी देशों में ताईवान और न्यूजीलैंड जैसे इक्के दुक्के  अपवादों को छोड़ दिया जाए तो इस मुनाफा केंद्रित व्यवस्था वाले देश कोरोना को नियंत्रित करने में पूरी तरह नाकाम रहे और इन देशों में हजारों लाखों की तादाद में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. इन देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से धराशायी हो गई, लाखों लोगों का रोजगार छिना. वहीं समाजवादी व्यवस्था वाले देशों ने कोरोना पर बेहतर और प्रभावी ढंग से काबू पाया और अपनी अर्थव्यवस्था को भी बेहतर संभाला. इन्हीं समाजवादी देशों में से एक उत्तर कोरिया में कोरोना के पूरी दुनिया में कहर के एक साल के बाद भी  कोरोना का एक भी मामला नहीं है और जाहिर है यहाँ इससे एक भी जान नहीं  गई है.  उत्तर कोरिया की सरकार ने 2020 की शुरुआत से ही त्वरित कद...

कोरोना मुक्त जनवादी कोरिया

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यह लेख 28 अगस्त 2020 का है क्यूबा के पोर्टल न्यूज़ साईट ने WHO के उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि एडविन साल्वाडोर के हवाले से यह खबर (लिंक:https://www.plenglish.com/index.php?o=rn&id=59254&SEO=who-confirms-non-existence-of-covid-19-in-dprk) दी है कि उत्तर कोरिया में कोरोना से संक्रमित एक भी मरीज नहीं है. हलांकि जुलाई में दक्षिण कोरिया से चोरी छुपे सीमा पार कर उत्तर कोरिया में घुसे एक व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने की आशंका जताई गई थी और उत्तर कोरिया की सरकार ने त्वरित कार्यवाही करते हुए दक्षिण कोरिया से लगते देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में लाकडाउन  लगा दिया था लेकिन देश में एक भी मामला सामने नहीं आया.   साल्वाडोर ने कहा कि उन्हें मालूम था कि उत्तर कोरिया में 30,965 लोगों को क्वारंटीन किया गया है और आखिरी 2,767 मामले नेगेटिव निकले. जहाँ दुनिया के कई देशों में कोरोना के चलते स्कूल बंद हैं , उतर कोरिया के स्कूल आगामी सितम्बर से नया सत्र शुरू करेंगे. किम जोंग उन जो इसी साल अप्रैल में मर कर मई में जिंदा हुए फिर इसी अगस्त में कुछ दिन पहले फिर मर कर  फिर जिंदा हुए और 25 अगस्त ...

प्यार से भरी स्कूल की राह

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 समाजवादी देश  उत्तर कोरिया के दूर दराज और दुर्गम ईलाके में बसे गाँव के बच्चों को स्कूल तक पहुँचाने के क्या इंतजाम हैं. ये इस वृत्तचित्र दिखाया गया है (अंग्रेजी सबटाईटल सहित). इसका प्रसारण 4 जुलाई 2020 को उत्तर कोरिया के सेंट्रल टेलीविजन पर हुआ था. यूँ तो शुरू से ही ऐसे ईलाके के बच्चों को पूर्णतः सरकार द्वारा (उत्तर कोरिया में निजी क्षेत्र नहीं पाया जाता है)  संचालित मोटरबोट और विशेष ट्रेनों से पहुँचाया जा रहा था लेकिन इस नए शैक्षणिक सत्र से स्कूली बच्चों के सहुलियत के हिसाब से बनाए गए नए आधुनिक मोटरबोट और रेल डिब्बे चलाए जाने लगे. उत्तर कोरिया के उत्तर पश्चिम में चीन से सटा छागांग प्रांत जिसका 98℅ भूभाग पहाड़ी और दुर्गम इलाका है और ऐसे ईलाके में छिटपुट बसे गांव के बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए 7 नए मोटरबोट और विशेष ट्रेन चलाई जा रही है. मुनाफाखोर पूंजीवादी व्यवस्था में क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि दूरदराज बसे गांवों में से किसी गाँव से 13, किसी से 17, किसी से 5 तो किसी से 1 ही बच्चों को रोज स्कूल तक लाने के लिए सरकार द्वारा मुफ्त में मोटरबोट या विशेष ट्रेन चलाई जाए और ...

विभाजित कोरियाई प्रायद्वीप के रिसते जख्म

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 यह लेख 4 जुलाई 2020 का है कोरियाई प्रायद्वीप के आधुनिक इतिहास में जून का महीना काफी उतार-चढ़ाव का रहा है. मानव इतिहास के भीषणतम युद्धों में एक कोरियाई युद्ध की शुरुआत 25 जून 1950 को हुई, वहीं उससे 4 साल पहले 3 जून 1946 को अमेरिकी कठपुतली और विभाजन के बाद दक्षिण कोरिया के पहले राष्ट्रपति बने री सुंग मान ने एक सभा में पहली बार कोरिया में संयुक्त सरकार की स्थापना के बजाय दक्षिण कोरिया में अलग सरकार की स्थापना की बात कही. ये पूरी तरह से विभाजनकारी गतिविधि थी और री अमेरिका की मदद से 1948 में अपने विभाजन के इस षडयंत्र में सफल रहा.  वहीं इसी जून के महीने ने कोरियाई प्रायद्वीप के विभाजन के रिसते जख्मों पर मरहम लगाने का काम भी किया जब जून 2000 में विभाजन के 52 साल के बाद उत्तर- दक्षिण कोरिया के राष्ट्राध्यक्ष पहली बार उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में मिले और उनके बीच 15 जून 2000 को हुआ समझौता कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की स्थापना और आगामी दोनों देशों के शिखर सम्मेलनों के लिए नजीर बना. इसके 18 साल बाद 12 जून 2018 को एक और अभूतपूर्व घटना हुई जब पहली बार उत्तर कोरिया और अमेरिका क...

जनवादी कोरिया के नागरिकों का आजीवन आवास अधिकार

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उत्तर कोरिया में सभी नागरिकों को सरकार की ओर से घर आवंटित किए जाते हैं और इसके लिए आवासीय परमिट दिए जाते हैं(तस्वीर नीचे )  यह आवासीय परमिट आवंटित घर का मालिकाना हक नहीं बल्कि आवंटित घर को आजीवन इस्तेमाल कर सकने का अधिकार पत्र है. उत्तर कोरिया में अगर किसी का एक जगह से दूसरे जगह स्थानांतरण होता है तो नई जगह पर घर के आवंटन के लिए पहले से रह रहे घर का आवासीय परमिट जमा करना होता है. इसका मतलब एक बार आवासीय परमिट मिलने के बाद कहीं दूसरे जगह पर जाने पर लोगों को घर की चिंता करने की जरूरत नहीं होती. ; उत्तर कोरिया में परिवार के सदस्यों की संख्या की हिसाब से घर का आवंटन होता है. किसी की औलाद के शादी करके माँ-बाप से अलग  रहने पर भी माँ-बाप उसी घर में जीवनपर्यन्त रह सकते हैं, सरकार की तरफ से उन्हें छोटे घर में जाने को नहीं कहा जाता. वहाँ नवविवाहित जोड़े को तीन कमरों का घर दिया जाता है. अगर ज्यादा बच्चे होने पर और कमरों की जरूरत पड़ती है तो ऐसे लोगों को 4-5 कमरों वाला घर दिया जाता है. उत्तर कोरिया में सरकार की तरफ से एक बार बड़ा घर मिलने के बाद, उससे छोटे घर में जाने को कभी नहीं कहा जाता...

कोरोना और जनवादी कोरिया (उत्तर कोरिया)

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 यह लेख 16 अप्रैल 2020 का है इन दिनों दुनिया के लगभग सभी देश कोरोना वायरस का कहर झेल रहे हैं, लेकिन कुछ  देश ऐसे भी हैं जहाँ आधिकारिक तौर पर कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है, वैसे देशों में उत्तर कोरिया भी शामिल है. चीन की शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी की हालिया खबर के मुताबिक उत्तर कोरिया ने कोरोना का मामला सामने आते ही देश में इसकी रोकथाम के लिए बिना समय गंवाए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए गए . 22 जनवरी से ही देश में विदेशी पर्यटकों का प्रवेश बंद कर दिया गया और चीन के साथ लगती देश की रेल और वायु सीमा को बंद कर दिया गया. देश के सभी शिक्षण संस्थानों में चल रहे शीतकालीन अवकाश को आगे बढ़ा दिया और नए शैक्षणिक सत्र को अगले आदेश तक टाल दिया गया. इसके अलावा सरकार ने कोरोना महामारी की वैश्विक स्थिति पर हर पल नजर रखते हुए जनता के बीच कोरोना की रोकथाम के लिए सक्रिय रूप से जागरूकता अभियान चलाते हुए सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के जमा होने पर रोक लगा दी. मास्क समेत कोरोना महामारी की रोकथाम से संबंधित वस्तुओं का उत्पादन बढ़ा दिया गया. देश में सार्वजनिक स्थानों पर लोग मास्क लगाए दिखे.  राजध...