अमेरिकी नव उपनिवेश दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिकों के अपराध-3

 


अमेरिकी सेना (USFK) ने दक्षिण कोरिया में कदम रखने के बाद से लगातार अपराध किए हैं.

1990 के दशक की शुरुआत तक, अमेरिकी सैन्य अड्डों वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को छोड़कर अधिकांश जनता को दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों के अपराधों की गंभीरता का सही पता नहीं था. सैन्य अड्डों के आसपास जीवनयापन करने वाले लोगों को “किजीचोन” (सैन्य अड्डा बस्ती) के लोग कहा जाता था.


इस भाग में हम अमेरिकी सैनिकों द्वारा सैन्य अड्डा बस्ती क्षेत्रों में किए गए अपराधों को देखते हैं.

युन गुम-ई मामला

28 अक्टूबर 1992 को, ग्योंगगी प्रांत के दोंगदूछन शहर में अमेरिकी सैनिकों के लिए बने एक क्लब में काम करने वाली युन गुम-ई मृत अवस्था में पाई गईं.

उसके पूरे शरीर पर चोटों के निशान थे और वह निर्वस्त्र अवस्था में थीं. उनके गर्भाशय में दो बीयर की बोतलें और योनि के बाहर एक कोला की बोतल घुसी हुई थी. इसके अलावा गुदा से लेकर मलाशय तक लगभग 27 सेंटीमीटर लंबी छतरी की डंडी घुसी हुई थी. संभवतः सबूत मिटाने की कोशिश में उनके पूरे शरीर पर सफेद सिंथेटिक डिटर्जेंट पाउडर डाला गया था, और उनके मुँह में टूटी हुई माचिस की तीलियाँ ठूँसी गई थीं.

यह अत्यंत भयावह दृश्य था. इतनी क्रूरता से उनकी हत्या करने वाला उस समय 20 वर्षीय अमेरिकी सैनिक केनेथ मार्केल( Kenneth Markle) था.

घटना के बाद पुलिस ने घटनास्थल पर मिले खून से सने शर्ट, बीयर की बोतल से मिले फिंगरप्रिंट और गवाहों के बयानों के आधार पर जांच की, और 31 अक्टूबर की रात लगभग 12:30 बजे अमेरिकी दूसरी डिवीजन के मुख्य द्वार के सामने से बैरक लौट रहे केनेथ मार्केल को मुख्य संदिग्ध के रूप में गिरफ्तार किया.

युन गुम-ई की मौत को दुनिया के सामने लाने और अपराधी को पकड़वाने में निर्णायक भूमिका एक अन्य सैन्य अड्डा बस्ती की महिला ने निभाई. लंबे समय तक सैन्य अड्डा बस्ती में जीवन जीने के कारण उसे यह सहज रूप से पता था कि यदि कोई वेश्यावृत्ति में लगी महिला अमेरिकी सैनिक के हाथों मारी जाती है, तो या तो जांच नहीं होती या अमेरिकी सैनिक को सजा नहीं मिलती. इससे यह भी पता चलता है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों वाले क्षेत्रों में कितने अपराध हुए और उनकी ठीक से जांच नहीं हुई.

उस महिला ने सोचा कि इस बार मामला दबना नहीं चाहिए. वह अमेरिकी दूसरी डिवीजन के सामने केनेथ मार्केल का इंतजार करती रहीं और उसके लौटने पर उसकी कॉलर पकड़कर पुलिस को सौंप दिया.

लेकिन दक्षिण कोरियाई पुलिस ने अमेरिकी पक्ष की हिरासत हस्तांतरण मांग के अनुसार संदिग्ध का पूरा पूछताछ रिकॉर्ड भी तैयार नहीं किया और उसे तुरंत अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को सौंप दिया.

युन गुम-ई का शव 30 अक्टूबर को पुलिस द्वारा परिवार की उपस्थिति में दाह संस्कार के बाद दोंगदूछन के एक सामूहिक कब्रिस्तान में बिखेर दिया गया. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने सांत्वना राशि के रूप में परिवार को 6 लाख वोन दिए.

ऐसा लग रहा था कि मामला यहीं दब जाएगा, लेकिन 4 नवंबर को डोंगदुचॉन में एक स्थानीय संघर्ष समिति बनी, और 5 नवंबर को 48 सामाजिक संगठनों ने मिलकर “युन गुम-ई हत्या संयुक्त संघर्ष समिति” बनाई और अमेरिकी सैनिक की गिरफ्तारी व सजा की मांग करते हुए आंदोलन शुरू किया.

संघर्ष समिति ने हर सुनवाई में सैकड़ों दर्शकों को संगठित किया और घटना के बाद पाँच महीनों तक हर शनिवार सियोल स्टेशन पर प्रदर्शन किए. दोंगदूछन के टैक्सी चालकों ने अमेरिकी सैनिकों को टैक्सी में बैठाने से इनकार किया, और दुकानदारों ने अमेरिकी ग्राहकों का बहिष्कार किया.

सभाओं और बैठकों में लोगों ने “हमारी बेटी गुम-ई” की निर्मम हत्या पर आक्रोश व्यक्त किया. उस समय विश्वविद्यालय परिसरों में अमेरिकी सैनिकों के अपराधों की निंदा करते पोस्टर लगाए गए.

उस समय के SOFA समझौते के अनुसार, हत्या जैसे गंभीर अपराध में भी अंतिम फैसला आने तक कोरियाई न्यायिक अधिकारी अमेरिकी सैनिक को हिरासत में नहीं रख सकते थे. अभियोजन पक्ष ने केनेथ मार्केल पर हत्या का आरोप लगाया, लेकिन हिरासत नहीं मिलने के कारण उसे कैद नहीं कर सके.

फरवरी 1993 में शुरू हुए मुकदमे में केनेथ मार्केल ने अपने वकील के माध्यम से मारपीट स्वीकार की, लेकिन हत्या से इनकार किया. उसे पहली अदालत में आजीवन कारावास और अपील में 15 वर्ष की सजा मिली. सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी अंतिम अपील खारिज कर दी.

सजा अंतिम रूप से तय होने के बाद भी Kenneth Markle को 17 मई 1994 तक दक्षिण कोरियाई जेल में नहीं भेजा गया. यह घटना के डेढ़ वर्ष बाद हुआ.

बाद में उसने कई बार पैरोल की मांग की, जो अस्वीकार होती रही, लेकिन अंततः 14 अगस्त 2006 को उसे पैरोल पर रिहा कर दिया गया और अगले दिन वह अमेरिका लौट गया.

युन गुम-ई मामले ने अमेरिकी नव उपनिवेशवादी दक्षिण कोरियाई समाज को अमेरिकी सैनिकों के अपराधों और SOFA समझौते की समस्याओं के बारे में जागरूक किया.

पहली सुनवाई के बाद लोगों ने महसूस किया कि अमेरिकी सैनिकों के अपराधों से निपटने के लिए स्थायी संगठन की आवश्यकता है. इसके बाद संघर्ष समिति “अमेरिकी सैनिक अपराध उन्मूलन आंदोलन मुख्यालय” में बदल गई. दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिकों के अपराधों को सामाजिक समस्या के रूप में 1992 के युन गुम-ई मामले के बाद ही व्यापक रूप से पहचाना गया.

इस घटना के लगभग 10 वर्ष बाद 2001 में SOFA संशोधन के जरिए हत्या और बलात्कार जैसे 12 गंभीर अपराधों में दक्षिण कोरियाई अभियोजन को प्राथमिक हिरासत अधिकार मिला.

ली गी-सून और ह्यो जु-योन मामले

युन गुम-ई घटना के बाद भी अमेरिकी सैनिकों द्वारा सैन्य अड्डा बस्ती की  महिलाओं की हत्या के मामले सामने आए.

7 सितंबर 1996 को ली गी-सून मृत पाई गईं. उनकी गर्दन किसी तेज हथियार से लगभग आधी कटी हुई थी.

पुलिस ने गर्दन पर छोटी छुरी जैसे हथियार से की गई क्रूरता, घटनास्थल का अमेरिकी सैन्य अड्डे के पास होना, और सैन्य जूतों के निशानों के आधार पर अनुमान लगाया कि अपराधी अमेरिकी सैनिक था.

अपराधी अमेरिकी दूसरी डिवीजन का सैनिक म्युनिक एरिक स्टीवन(Munich Eric Steven) निकला, जिसे 11 सितंबर को गिरफ्तार किया गया. शुरू में उसने अपराध से इनकार किया, लेकिन बाद में टैक्सी ड्राइवर और अन्य गवाहों से आमना-सामना कराए जाने पर उसने अपराध स्वीकार कर लिया.

10 अक्टूबर 1996 को अभियोजन पक्ष ने अदालत से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त कर अमेरिकी पक्ष को हिरासत हस्तांतरण का अनुरोध भेजा. यह पहली बार था जब दक्षिण कोरिया ने मुकदमे से पहले अमेरिकी सैनिक की हिरासत मांगी. लेकिन 5 नवंबर को अमेरिकी पक्ष ने आधिकारिक रूप से इनकार कर दिया.

इससे SOFA संशोधन की मांग और तेज हुई.

स्टीवन(पर घटना के दो महीने बाद बिना हिरासत के मुकदमा चलाया गया और 27 दिसंबर को उसकी पहली सुनवाई हुई. उसे पहली अदालत में 15 वर्ष और अपील में 10 वर्ष की सजा मिली. बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी अपील भी खारिज कर दी.

वह दक्षिण कोरियाई जेल में सजा काटने के बाद 28 फरवरी 2005 को पैरोल पर रिहा होकर अमेरिका लौट गया.

ह जुयन  का मामला 16 जनवरी 1998 को हुआ.

15 जनवरी की रात लगभग 10 बजे ह जुयन ने अपने क्लब में अमेरिकी सैनिक हेंड्रिक्स टिमोथी जेरोम(Hendricks Timothy Jerome )से मुलाकात की और दोनों ने साथ शराब पी.

16 जनवरी की सुबह उनके कमरे में आग लग गई. मकान मालिक जब अंदर पहुँचा, तब तक वह मृत थी.

अपराधी जेरोम था. उसने अपने दाहिने कोहनी से ह्यो जु-योन के सीने पर वार कर उनकी हत्या की और अपराध छिपाने के लिए बिस्तर में आग लगा दी.

उइजंगबु पुलिस ने 23 जनवरी को जेरोम को गिरफ्तार कर अमेरिकी सैन्य पुलिस को सौंप दिया.

उसे पहली अदालत में 10 वर्ष की सजा मिली, जो सर्वोच्च न्यायालय में भी बरकरार रही.

अनसुलझे मामले

7 सितंबर 1999 को दोंगदूछन में ही अमेरिकी सैनिक के साथ लिव इन में रहने वाली  ली जंग सुक मृत पाई गईं. शव बहुत सड़ चुका था और कमरे के सभी दरवाजे बंद थे. जिस अमेरिकी सैनिक से उनका संबंध था, उसे मुख्य संदिग्ध माना गया, लेकिन पर्याप्त सबूत, कमजोर जांच और SOFA की सीमाओं के कारण मामला सुलझ नहीं पाया.

11 मार्च 2000 को उइजंगबु में एक 68 वर्षीय दक्षिण कोरियाई बुड्ढा अपने घर में मृत पाया गया उसकी आँखों और होंठों पर चोट के निशान थे, दाँत टूटे हुए थे और पसलियाँ चकनाचूर थीं. कमरा खून से भरा था.

गवाहों ने बताया कि घटना से पहले वह लगभग 180 सेंटीमीटर लंबे अश्वेत अमेरिकी सैनिक के साथ कमरे में गया थे और झगड़े की आवाजें सुनी गईं. फिर भी अपराधी की पहचान नहीं हो सकी. बाद में अमेरिकी पक्ष ने बताया कि मुख्य संदिग्ध घटना के दो दिन बाद ही अमेरिका लौट गया था.

इसके अलावा कुछ अन्य मामलों में भी अमेरिकी सैनिक मुख्य संदिग्ध थे, लेकिन अपर्याप्त सबूत और अमेरिकी पक्ष के कमजोर सहयोग के कारण आरोप सिद्ध नहीं हो सके.

मारपीट की घटनाएँ

16 दिसंबर 1993 को  फाजू शहर में एक दक्षिण कोरियाई टैक्सी चालक पर दो अमेरिकी सैनिकों ने हमला किया. टैक्सी में बैठने के बाद पीछे बैठे सैनिक ने अचानक चाकू से उनकी गर्दन पर हमला कर दिया. टैक्सी ड्राईवर गंभीर रूप से घायल हुआ.

8 सितंबर 1994 को दोंगदूछन में अमेरिकी सैनिकों के एक समूह ने तीन दक्षिण कोरियाईयों पर हमला किया. एक सैनिक ने चेन से हमला किया, जबकि अन्य सैनिकों ने लोहे की कुर्सियों और पत्थरों से सामूहिक मारपीट की. पीड़ितों को गंभीर चोटें आईं.

4 जुलाई 1995 को दोंगदूछन शहर में ही  एक दक्षिण कोरियाई और उनके दोस्तों पर तीन अमेरिकी सैनिकों ने हमला किया. विवाद कार का साइड मिरर तोड़ने से शुरू हुआ. एक दक्षिण कोरियाई की दाहिनी गाल की हड्डी टूट गई.

7 जुलाई 1995 को एक दक्षिण कोरियाई महिला पर अमेरिकी सैनिक ने हमला कर उनके पैसे लूट लिए. उसने पहले दुकान का निरीक्षण किया, फिर पत्थर से उनके सिर और चेहरे पर हमला किया. उस महिला को 8 सप्ताह के इलाज की आवश्यकता पड़ी.

ऊपर बताए गए मामले केवल हिमशैल का एक छोटा हिस्सा हैं. अमेरिकी सैनिकों द्वारा किए गए और भी अपराध हैं जो कभी ठीक से सामने नहीं आए. विशेष रूप से सैन्य अड्डा बस्ती के लोग हमेशा अमेरिकी सैनिकों के संपर्क में रहते थे, इसलिए उनके लिए पुलिस में शिकायत करना भी कठिन था. और शिकायत करने पर भी SOFA के कारण अमेरिकी सैनिकों को अक्सर उचित दंड नहीं मिलता था.

जिस क्षण अमेरिकी सेना दक्षिण कोरिया में आई, उसी समय से दक्षिण कोरियाई जनता अपराधों के जोखिम में पड़ गई..

 

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