अमेरिका को चेतावनी

 


वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की केंद्रीय समिति की विभाग निदेशक, कॉमरेड किम य जंग ने 2 नवंबर 2026 को एक बहुत महत्वपूर्ण बयान दिया. इसमें उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े उन झूठे आरोपों का सीधा जवाब दिया, जो अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (जनवादी कोरिया ) पर लगाए थे.

अपने बयान में कॉमरेड किम य जंग  ने जोर देकर कहा कि "FBI, जनवादी कोरिया  को एक 'साइबर अपराधी देश' के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है. उनका दावा है कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि जनवादी कोरिया  द्वारा 'समर्थित' एक हैकिंग संगठन इस घटना में शामिल था... लेकिन अमेरिका का यह दावा पूरी तरह से बेतुका है और इसमें कुछ भी नया नहीं है."

यह बिल्कुल सच है. 'जनवादी कोरिया' को बदनाम करने के लिए इस तरह के झूठे आरोप लगाना अमेरिका की पुरानी आदत है. पिछले साल भी, अमेरिका ने 'बायबिट' (Bybit) में हुई एक हैकिंग घटना को लेकर इसी तरह के बेबुनियाद आरोप लगाए थे.

कॉमरेड किम य जंग  ने 2 नवंबर के बाद 4 नवंबर 2026 को फिर से एक बयान जारी किया. उन्होंने बाइनेंस हैकिंग मामले पर अमेरिका के दावे का खंडन करने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि परमाणु निरस्त्रीकरण, मानवाधिकार, साइबर, प्रतिबंध, सैन्य आदि अमेरिका की जनवादी कोरिया  के प्रति नीति की समग्र आलोचना की. विशेष रूप से उन्होंने कहा कि अमेरिका शत्रुतापूर्ण कार्यों का नया रिकॉर्ड बना रहा है, इसलिए जनवादी कोरिया  को भी अपनी प्रतिक्रिया में नया रिकॉर्ड बनाना चाहिए. यह बयान अमेरिका की जनवादी कोरिया  नीति कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और बढ़ाएगी, इस चेतावनी के रूप में पढ़ा जा सकता है.

 

1. कॉमरेड किम य जंग  के बयान ने क्या स्पष्ट किया

 

4 नवंबर को कॉमरेड किम य जंग  के बयान ने अमेरिका की जनवादी कोरिया  के प्रति शत्रुतापूर्ण नीति की व्यापक आलोचना की. इसके चार मुख्य बिंदु  हैं:

1) बाइनेंस हैकिंग मामले को अमेरिका की जनवादी कोरिया  के प्रति शत्रुतापूर्ण नीति का एक उदाहरण बताया.

2) परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग, संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रतिबंध और मानवाधिकार मुद्दे उठाने को अमेरिका के निरंतर शत्रुतापूर्ण कार्यों के रूप में आलोचना की.

3) ऐसे कार्य जारी रखने वाले अमेरिका के साथ बैठकर बात करने की आवश्यकता नहीं बताई.

4) अमेरिका के शत्रुतापूर्ण कार्यों के जवाब में जनवादी कोरिया  की प्रतिक्रिया में भी नया रिकॉर्ड बनाने पर जोर दिया.

 

कॉमरेड किम य जंग ने अमेरिका के इस कदम को 'प्रतिगामी कदम' बताया. उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीति का त्याग ही सभी समस्याओं के समाधान की पूर्व शर्त है. उन्होंने कहा कि शांति की रक्षा के विकल्पों में बातचीत शामिल है, लेकिन यह 'राष्ट्रीय हित के साथ अनिवार्य रूप से एक समान नहीं है'. इस बयान ने बातचीत और टकराव साथ नहीं चल सकते, जनवादी कोरिया  के इस रुख को फिर से रेखांकित किया.

 

2. बयान में ध्यान देने योग्य तीन मुद्दे

इस बयान में तीन मुद्दे ध्यान देने योग्य हैं. इन्हें मिलाकर देखें तो यह व्याख्या निकलती है कि जनवादी कोरिया  यह मान रहा है कि ट्रंप की बातचीत की इच्छा के बावजूद अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीति जारी रहेगी. विशेष रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा सीनेट और प्रतिनिधि सभा पर कब्जे के बाद मौजूदा कठोर नीति और अधिक मजबूत होने की संभावना पर ध्यान देना चाहिए. यह डेमोक्रेटिक पार्टी के भविष्य के कदमों से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ने की चेतावनी के रूप में भी पढ़ा जा सकता है.

 

1) अमेरिका की वास्तविकता का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है. कॉमरेड किम य जंग ने कहा कि अमेरिका से आने वाले शत्रुतापूर्ण संकेत कई मायनों में अमेरिका की वास्तविकता पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर रहे हैं. उन्होंने केवल बाइनेंस हैकिंग मामले को नहीं, बल्कि अमेरिका की समग्र नीति को मुद्दा बनाया.

 

2) ट्रंप की बातचीत की इच्छा और अमेरिकी सरकार के कार्यों में अंतर है. ट्रंप ने कॉमरेड किम जंग उन  के साथ बार-बार मुलाकात की इच्छा जताई, लेकिन परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग, प्रतिबंध और सैन्य गतिविधियाँ जारी रहीं. राष्ट्रपति के बातचीत चाहने से अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीति नहीं बदलती.

 

3) जनवादी कोरिया  ने 'प्रतिक्रियात्मक प्रतिरोध का नया रिकॉर्ड' बनाने की चेतावनी दी. कॉमरेड किम य जंग  ने कहा कि अमेरिका के शत्रुतापूर्ण संकेतों का अलग तरीके से जवाब देने का तरीका उन्हें नहीं पता. जैसे-जैसे अमेरिका के शत्रुतापूर्ण कार्य नया रिकॉर्ड बना रहे हैं, जनवादी कोरिया  को भी मौजूदा स्तर से आगे बढ़कर प्रतिक्रिया देनी होगी. हालाँकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि नया रिकॉर्ड सैन्य कार्रवाई की संख्या है, हथियारों के प्रदर्शन और परीक्षण का पैमाना है, या प्रतिक्रिया के तरीके में बदलाव है.

जनवादी कोरिया  ने बयान जारी होने वाले दिन 4 नवंबर को नई प्रकार की विमान-रोधी मिसाइल का परीक्षण प्रक्षेपण और लंबी दूरी की रणनीतिक क्रूज मिसाइल की फायरिंग अभ्यास भी किया. यह वायु रक्षा क्षमता का सत्यापन और काल्पनिक हवाई अड्डे पर हमला करने का अभ्यास था. कोरियाई केंद्रीय समाचार एजेंसी ने इसे राष्ट्रीय रक्षा क्षमता को मजबूत करने की सामान्य गतिविधि बताया, लेकिन इसे कॉमरेड किम य जंग  द्वारा चेतावनी दिए गए 'प्रतिक्रियात्मक प्रतिरोध के नए रिकॉर्ड' से जोड़कर देखा जा सकता है.

 

जनवादी कोरिया  प्रतिक्रिया को मजबूत करने का कारण और जिम्मेदारी अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीति में देख रहा है. यदि अमेरिका दबाव बढ़ाता है और जनवादी कोरिया  प्रतिक्रिया का स्तर बढ़ाता है, तो कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव और बढ़ेगा. यह परीक्षण प्रक्षेपण और फायरिंग अभ्यास दिखाते हैं कि अमेरिका के प्रति चेतावनी और जनवादी कोरिया  की सैन्य शक्ति को मजबूत करना साथ-साथ चल रहा है.

 

3. जब तक शत्रुतापूर्ण नीति जारी है, जनवादी कोरिया-अमेरिका वार्ता नहीं हो सकती

 

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लिया. कुछ मीडिया इसे भारी जीत बता रहे हैं, लेकिन यह भारी जीत नहीं है. इस परिणाम को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति पूर्ण विश्वास के रूप में नहीं लिया जा सकता. इसमें ट्रंप की नीतियों के प्रति मतदाताओं की निराशा और नाराजगी का बड़ा योगदान रहा. डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत की गारंटी भी नहीं है.

 

नियोकॉन केवल डेमोक्रेटिक या रिपब्लिकन पार्टी की ताकत नहीं हैं. अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता और विदेशी हस्तक्षेप का समर्थन करने वाले लोग सेना, खुफिया एजेंसियों, मीडिया, अकादमिक जगत, नीति अनुसंधान संस्थानों आदि कई क्षेत्रों में फैले हुए हैं. ट्रंप ने 2025 में सत्ता में लौटने के बाद सैन्य नेतृत्व और खुफिया एजेंसियों का पुनर्गठन किया और नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (NED) के धन समर्थन पर भी रोक लगाई. इसे मौजूदा विदेश नीति ताकतों के प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसने गहरी जमी हुई नीतिगत नींव को नहीं बदला.

 

जनवादी कोरिया-अमेरिका वार्ता में भी कट्टरपंथियों का विरोध सामने आया. पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने सितंबर 2026 की शिखर बैठक के जोखिम पर जोर देते हुए ट्रंप की एकतरफा सैन्य रियायतों के खिलाफ चेतावनी दी. बाइनेंस हैकिंग मामले में एफबीआई ने जनवादी कोरिया  को पीछे बताया और अमेरिकी मुख्यधारा मीडिया ने इसकी रिपोर्ट की. ट्रंप ने जनवादी कोरिया  की संलिप्तता के बारे में नहीं जानने की बात कहते हुए भी, अगर संबंध है तो बातचीत करने का अस्पष्ट जवाब दिया. जाँच एजेंसियों की घोषणा और मीडिया रिपोर्टें संगठित रूप से बैठक को बाधित करने वाली थीं या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उन घोषणाओं से जनवादी कोरिया  की प्रतिक्रिया सामने आई, यह निश्चित है.

 

ट्रंप ने मध्यावधि चुनाव के बाद भी मौजूदा विदेश नीति को जारी रखने का रुख जताया. आगे भी जनवादी कोरिया-अमेरिका वार्ता जारी रखने की उम्मीद है. लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से राजनीतिक कठिनाइयाँ और बढ़ गई हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी नई कांग्रेस में बहुमत में आने पर कानून और बजट अधिकार के माध्यम से राष्ट्रपति पर अंकुश लगा सकती है. राष्ट्रपति की बातचीत की इच्छा से अलग, वास्तविक नीति बदलना और भी मुश्किल होगा.

 

कॉमरेड किम य जंग  का बयान ट्रंप के सामने अमेरिका की आंतरिक शत्रुतापूर्ण नीति को पहले बदलने का कार्य भी रखता है. कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ने की सारी जिम्मेदारी ट्रंप पर नहीं डाली जा सकती. मौजूदा कठोर नीति बनाए रखने वाली ताकतों की भूमिका भी देखनी चाहिए. यदि ट्रंप अमेरिका की वास्तविक नीति नहीं बदल पाता, तो जनवादी कोरिया-अमेरिका वार्ता का दरवाजा और संकरा होगा.


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