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प्रति क्रांतिकारी गुटबाजों का सफाया

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  70 वर्ष पहले, 30 अगस्त 1956 को कोरियाई क्रांति के नेतृत्व को उखाड़ फेंकने और जनवादी कोरिया में समाजवादी व्यवस्था को पलटने की एक साजिश का पर्दाफाश हुआ, उसे उजागर किया गया और कुचल दिया गया. इन घटनाओं के बारे में बहुत-सी गलत सूचनाएँ और गलतफहमियाँ हैं, जिन्हें साम्राज्यवादी लोग “अगस्त गुटीय घटना” (“August factional incident”) कहते हैं.यहाँ तक कि वामपंथ के कुछ लोग और स्वयं को कथित रूप से “संशोधनवाद-विरोधी” कहने वाले कुछ लोग भी वास्तव में क्या हुआ था, इसकी सही समझ नहीं रखते. 70 वर्ष पहले जो हुआ वह यह था कि कोरिया की मजदूर पार्टी (Workers Party of Korea—WPK) के पार्टी-विरोधी प्रति-क्रांतिकारी गुटबाजों ने, जिन्हें बड़ी शक्तियों के साथ-साथ अमेरिकी साम्राज्यवादियों और दक्षिण कोरियाई कठपुतली प्रतिक्रियावादियों का समर्थन प्राप्त था, काॅमरेड किम इल संग के नेतृत्व वाली WPK की अगुवाई को उखाड़ फेंकने और संशोधनवाद तथा पूंजीवाद लाने का प्रयास किया.हाल ही में दक्षिण कोरिया के फासीवादी कठपुतली शासन के सपोले मीडिया ने 1956 के अगस्त गुटीय तख्तापलट की विफलता पर अफसोस जताते हुए कहा कि, “जनवादी कोरिया ह...

फ्यंगयांग की गगनचुम्बी इमारतें रूस की देन नहीं

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  दक्षिण कोरियाई कठपुतली मीडिया जब भी जनवादी कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग में नई गगनचुंबी इमारतें, आधुनिक आवासीय परिसर, चमकदार दुकानें या शानदार रात के दृश्य दिखाता है, तो उसके पीछे कोई न कोई बाहरी शक्ति खोजने की कोशिश करता है. कभी चीन, कभी रूस और कभी विदेशों से आने वाली विदेशी मुद्रा. हाल की एक रिपोर्ट में भी यही हुआ. दक्षिण कोरियाई अखबार एशिया इकॉनॉमिक डेली ने फ्यंगयांग में दिखाई दे रहे बदलावों को रूस के साथ जनवादी कोरिया की बढ़ती निकटता और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में मिली ‘विदेशी मुद्रा की विशेष आमदनी’ से जोड़ दिया. अर्थात सरल भाषा में कहा जाए तो इसका तर्क यह है—जनवादी कोरिया  ने रूस के लिए सैनिक भेजे, रूस से पैसा मिला और उस पैसे से फ्यंगयांग की गगनचुंबी इमारतें खड़ी हो गईं. पर यह  सुनने में आसान है और सच नहीं है.क्योंकि फ्यंगयांग का परिवर्तन जनवादी कोरिया- रूस सैन्य सहयोग से बहुत पहले शुरू हो चुका था. पहले इतिहास देखिए यदि फ्यंगयांग के विकास को केवल रूस से प्राप्त धन का परिणाम बताया जाए तो एक सरल सवाल पैदा होता है— 2012 , 2015 , 2017 और 2018 में फ्यंगयांग ...

ईरान का मिसाइल विकास और जनवादी कोरिया

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अगर ईरान के मिसाइल विकास और उसमे जनवादी कोरिया के योगदान की बात की जाए तो उससे संबंधित एक तस्वीर सामने आती है.  इस तस्वीर में जनवादी कोरिया के राष्ट्रपति कॉमरेड किम इल संग  और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के अधिकारी एक साथ खड़े थे. उनमें से एक हसन तेहरानी मोकद्दम भी थे , जिन्हें बाद में ‘ईरानी मिसाइलों का पिता’ कहा जाने लगा. तस्वीर कब और कहाँ खींची गई थी , इसकी सटीक पुष्टि नहीं हुई है , लेकिन तस्वीर में दिखाई देने वाले व्यक्ति के तेहरानी मोकद्दम होने और कॉमरेड किम इल संग   से मिलने वाले ईरानी सैन्य प्रतिनिधिमंडल के सदस्य होने की बात की पुष्टि होती है. इस ब्लैक एंड वाइट तस्वीर में सबसे नीचे की पंक्ति में दाईं ओर से पहले व्यक्ति मोकद्दम हैं. तस्वीर इतिहास की पूरी कहानी नहीं होती , लेकिन कभी-कभी वह आधिकारिक दस्तावेजों की तुलना में इतिहास और उस दौर को अधिक स्पष्ट रूप से दिखाती है. यह तस्वीर संकेत देती है कि 1980 के दशक में जनवादी कोरिया और ईरान केवल हथियार खरीदने-बेचने वाले संबंध में नहीं थे. दोनों देशों के बीच हथियारों के हस्तांतरण , उत्पादन सुविधाओं के निर्मा...