फ्यंगयांग की गगनचुम्बी इमारतें रूस की देन नहीं
दक्षिण कोरियाई कठपुतली मीडिया जब भी जनवादी कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग में नई गगनचुंबी इमारतें, आधुनिक आवासीय परिसर, चमकदार दुकानें या शानदार रात के दृश्य दिखाता है, तो उसके पीछे कोई न कोई बाहरी शक्ति खोजने की कोशिश करता है. कभी चीन, कभी रूस और कभी विदेशों से आने वाली विदेशी मुद्रा. हाल की एक रिपोर्ट में भी यही हुआ. दक्षिण कोरियाई अखबार एशिया इकॉनॉमिक डेली ने फ्यंगयांग में दिखाई दे रहे बदलावों को रूस के साथ जनवादी कोरिया की बढ़ती निकटता और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में मिली ‘विदेशी मुद्रा की विशेष आमदनी’ से जोड़ दिया. अर्थात सरल भाषा में कहा जाए तो इसका तर्क यह है—जनवादी कोरिया ने रूस के लिए सैनिक भेजे, रूस से पैसा मिला और उस पैसे से फ्यंगयांग की गगनचुंबी इमारतें खड़ी हो गईं. पर यह सुनने में आसान है और सच नहीं है.क्योंकि फ्यंगयांग का परिवर्तन जनवादी कोरिया- रूस सैन्य सहयोग से बहुत पहले शुरू हो चुका था. पहले इतिहास देखिए यदि फ्यंगयांग के विकास को केवल रूस से प्राप्त धन का परिणाम बताया जाए तो एक सरल सवाल पैदा होता है— 2012 , 2015 , 2017 और 2018 में फ्यंगयांग ...