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सीमाओं से परे और आधुनिक दुनिया में जूछे

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  अधिकांश विदेशी लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि जूछे केवल जनवादी कोरिया के भीतर मौजूद एक विचारधारा है. विदेशी मीडिया ने इसे एक पुरानी और कठोर विचारधारा के रूप में प्रस्तुत किया है , जो पूरी तरह जनवादी कोरियाई राज्य सरकार पर अपने अस्तित्व के लिए निर्भर है. हालांकि , यह दृष्टिकोण न केवल गलत है , बल्कि यह न केवल इस विचारधारा की विश्वसनीयता बल्कि उन अनेक विद्वानों के लिए भी हानिकारक है जो कई देशों में जूछे का अध्ययन और शोध कर रहे हैं तथा इसे एक राजनीतिक सिद्धांत मानते हैं. हालांकि जूछे अभी भी राजनीतिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में अन्य मुख्यधारा की विचारधाराओं की तुलना में एक छोटी विचारधारा है , लेकिन इसे धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय मान्यता और ध्यान मिलना शुरू हुआ है. यह किसी नाटकीय या सुर्खियाँ बटोरने वाले तरीके से नहीं , बल्कि एक शांत रूप में हो रहा है जिसे यदि ध्यान से न देखा जाए तो आसानी से नज़रअंदाज़ किया जा सकता है. इसका एक संकेत उन अनेक स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समूहों तथा संस्थानों का अस्तित्व है जो जूछे को एक राजनीतिक सिद्धांत के रूप में सीखने और चर्चा करने के लिए...

दक्षिण कोरिया: एक अमेरिकी सैन्य ठिकाना

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ईरान ने अमेरिकी हमले के जवाब में मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए , जिसके बाद दक्षिण कोरिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर चिंता बढ़ गई है.   जनवादी कोरिया   को निशाना बनाकर साल भर चलने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास के कारण कोरियाई प्रायद्वीप पर हमेशा युद्ध जैसा माहौल बना रहता है. ईरान युद्ध से मिला सबक यह है कि अगर कोरियाई प्रायद्वीप पर युद्ध छिड़ता है तो दक्षिण कोरिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने पहले निशाने पर होंगे.   दक्षिण कोरिया के अमेरिकी सैन्य ठिकाने शांति बनाए रखने की बजाय युद्ध को बुलावा दे सकते हैं ,   क्या आप जानते हैं कि दक्षिण कोरिया में कितने अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं ?   पिछले 31 मार्च को सत्तारूढ़ पार्टी की सांसद कांग सन-योंग ने रक्षा मंत्रालय से प्राप्त ' दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सेना के जवानों की संख्या और अमेरिकी सैन्य ठिकानों के वितरण की स्थिति ' के आंकड़ों के अनुसार , राजधानी क्षेत्र सहित देश भर में 62 अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं.   इनमें से कुछ का उपयोग गोदाम के रूप में होता है , ...

चीन पर निर्भरता का मिथक

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  जनवादी कोरिया के दुश्मन जनवादी कोरिया को "चीन पर निर्भर" के रूप में चित्रित करना पसंद करते हैं और यहां तक कि वामपंथी कुछ लोग भी इसे दोहराते हैं. इससे भी बदतर , कुछ अति-वामपंथी तत्व यह कहने की कोशिश करते हैं कि जनवादी कोरिया चीन का "नव-उपनिवेश" है और इसी तरह का अन्य बकवास करते हैं. इसके अलावा जनवादी कोरिया के बारे में ऐसी गलत धारणाएं जानबूझकर फैलाने वाले पूंजीपति मुख्यधारा मीडिया और पूंजीपति , भाड़े के बुद्दिजीवियों ,लेखकों के साथ-साथ संशोधनवादी और हठधर्मितावादी तत्व तो हैं हीं.     वास्तव में , 2020 और 2021 में चीन के साथ व्यापार लगभग समाप्त हो गया था और अब भी यह जनवादी कोरिया में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल एक छोटा प्रतिशत है.   क्योंकि जनवादी कोरिया एक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था है , विदेशी व्यापार जीडीपी का केवल 5 प्रतिशत है. जनवादी कोरिया अपनी जरूरत की अधिकांश चीजें घर पर ही पैदा करता है और जो घर पर नहीं पैदा किया जा सकता , उसे आयात किया जाता है. विदेशी व्यापार अपने आप में एक साध्य नहीं है , बल्कि एक साध्य को प्राप्त करने का एक साधन है. ...