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युद्ध निवारक शक्ति

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  कहा जाता है कि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों की वजह से कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध नहीं होता जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों के प्रति दक्षिण कोरियाई सरकार का रुख , चाहे सत्ता में कोई भी हो , हमेशा “ परमाणु निरस्त्रीकरण” रहा है. तर्क यह है कि जनवादी कोरिया हमारा “दुश्मन” है , और यदि दुश्मन के पास परमाणु हथियार हों तो हमारी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है. इस सोच में यह धारणा निहित है कि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियार आक्रमण या विस्तार के लिए हैं. तो क्या वास्तव में जनवादी कोरिया ने परमाणु हथियार आक्रमण के उद्देश्य से विकसित किए हैं ? जनवादी कोरिया ने फरवरी 2005 में परमाणु शक्ति होने की घोषणा की और अक्टूबर 2006 में पहला परमाणु परीक्षण किया. इसके बाद नवंबर 2017 में अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल ह्वासंगफो- 15 के सफल परीक्षण के बाद उसने “राष्ट्रीय परमाणु शक्ति की पूर्णता” की घोषणा की. यदि हम नवंबर 2017 को आधार मानकर उससे पहले और बाद में जनवादी कोरिया के व्यवहार को देखें , तो अंतर दिखाई देता है. यदि ये हथियार आक्रमण के लिए होते , तो उसका व्यवहार अधिक आक्रामक होना चाह...

अमेरिका के प्रति कठोर नीति

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  “ आक्रमणकारी की प्रकृति नहीं बदलती" “ अस्थिरता और अव्यवस्था पैदा करने का मुख्य कारण अमेरिका के नेतृत्व वाला पश्चिमी गुट है” ■ “ जब तक साम्राज्यवाद मौजूद है , तब तक अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था केवल अर्थहीन खाली वादे हैं” ■ “ परमाणु हथियारों का स्वामित्व ही साम्राज्यवादी आक्रमण की महत्वाकांक्षाओं को समाप्त करने का एकमात्र साधन है” ■ “ हमारे प्रति अमेरिका का शत्रुतापूर्ण दृष्टिकोण और गुंडागर्दी जैसा स्वभाव बिल्कुल भी नहीं बदला है” जनवादी कोरिया ने 19 से 25 फरवरी के बीच आयोजित कोरिया की वर्कर्स पार्टी की 9 वीं कांग्रेस में प्रस्तुत कार्य-समापन रिपोर्ट के माध्यम से वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति का विश्लेषण किया और अमेरिका के प्रति अपनी नीति सार्वजनिक की. सबसे पहले वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति के बारे में कहा गया कि “ आज की दुनिया पाँच वर्ष पहले की दुनिया से पूरी तरह अलग है और अंतरराष्ट्रीय संबंध अव्यवस्था और उथल-पुथल के भंवर में प्रवेश कर चुके हैं.” पाँच वर्ष पहले अर्थात 2021, जब कोविड- 19 महामारी चरम पर थी , अमेरिका में कैपिटल हिल पर भीड़ द्वारा कब्ज...