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एक नई दुनिया की भोर: बहुध्रुवीयता तथा जनवादी कोरिया–चीन–रूस

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  2008 की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मंदी के बाद विश्व पूंजीवादी व्यवस्था में तीव्र परिवर्तन आया. जिस व्यवस्था को बनाए रखने वाले अनेक नियम थे , उन्हीं नियमों का नेतृत्व करने वाली शक्तियों द्वारा उन्हें स्वयं क्षति पहुँचाई जा रही है और नष्ट किया जा रहा है. अनेक लोग यह कहते हुए अफसोस प्रकट करते हैं कि " अतीत की दुनिया हमेशा के लिए समाप्त हो चुकी है." आज पूरी दुनिया युद्धों और संघर्षों से घिरी हुई है. रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है , इज़राइल और फ़िलिस्तीन का विवाद अब भी हल नहीं हुआ है , और अमेरिका तथा इज़राइल ने ईरान के विरुद्ध अपनी सैन्य कार्रवाई का विस्तार कर दिया है. केवल पिछले वर्ष 2025 में ही विश्व के 50 से अधिक देशों ने प्रत्यक्ष युद्ध या सशस्त्र संघर्ष का सामना किया. यह शीत युद्ध की समाप्ति के बाद का सबसे ऊँचा स्तर है. हर महीने औसतन 20,000 से अधिक लोग युद्ध के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं. स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान ( SIPRI) के आँकड़ों के अनुसार , 2025 में विश्व का कुल सैन्य व्यय 2.887 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया , जो लगातार ग्यारहवें व...