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जनता के चुनाव के नतीजे

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अभी हाल ही में रविवार , 15 मार्च को जनवादी कोरिया के नागरिकों ने 15 वीं सुप्रीम पीपल्स असेंबली ( Supreme People's Assembly , SPA) के चुनावों में भाग लिया और चुनाव परिणामों के अनुसार , देश भर में मतदाता सूची में पंजीकृत 99.99 प्रतिशत मतदाताओं ने चुनाव में भाग लिया. 0.0037 प्रतिशत मतदाता चुनाव में भाग नहीं ले सके क्योंकि वे विदेश में हैं या समुद्र में कार्यरत हैं , और 0.00003 प्रतिशत ने मतदान से परहेज़ किया. 99.93 प्रतिशत मतदाताओं ने समर्थन में और 0.07 प्रतिशत ने विरोध में मतदान किया. परिणामस्वरूप , जनवादी कोरिया के सभी स्तरों की पीपल्स असेंबली के प्रतिनिधियों के चुनाव संबंधी कानून के तहत 687 श्रमिकों , किसानों , श्रमिक बुद्धिजीवियों , सैनिकों और अधिकारियों को सुप्रीम पीपल्स असेंबली के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया. पर जैसा की अपेक्षित था साम्राज्यवादी और बुर्जुआ मुख्यधारा मीडिया तथा उससे जुड़े सोशल मीडिया जनवादी कोरिया के 15 वीं सुप्रीम पीपल्स असेंबली के चुनाव परिणामों को बदनाम कर रहे हैं. डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया या जनवादी कोरिया की जनवादी लोकतांत्रिक चुनाव प्रण...

दक्षिण कोरिया के प्रति रुख

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जनवादी कोरिया ने 19–25 फरवरी के बीच आयोजित कोरिया की वर्कर्स पार्टी की 9 वीं कांग्रेस में प्रस्तुत कार्य-सार रिपोर्ट के माध्यम से दक्षिण कोरिया के प्रति अपने रुख की फिर से पुष्टि की. ली जे म्यंग सरकार के सत्ता में आने के बाद भी जमे हुए जनवादी कोरिया -दक्षिण कोरिया  संबंधों में इस वर्ष कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई देंगे—ऐसी उम्मीद करने वालों की भविष्यवाणी इस बार भी गलत साबित हुई. परिणामस्वरूप , जनवादी कोरिया की दक्षिण-कोरिया नीति में बिल्कुल भी परिवर्तन नहीं हुआ. सत्ता बदल गई , लेकिन   जनवादी कोरिया ने फिर से जोर देकर कहा कि उसने पहले ही “ दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों को सबसे शत्रुतापूर्ण राज्य-से-राज्य संबंध के रूप में स्थापित करने का अंतिम और महत्वपूर्ण निर्णय” ले लिया है. जनवादी कोरिया ने कहा कि  “ इस वर्ष की शुरुआत में भी दक्षिण कोरिया ने हमारे गणराज्य (जनवादी कोरिया) के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ जैसी गंभीर कार्रवाई करके यह स्पष्ट कर दिया कि वह भरोसेमंद और सह-अस्तित्व वाला पड़ोसी नहीं है.” यहाँ ड्रोन घुसपैठ की घटना का फिर से उल्लेख किया गया. बेशक दक्षिण कोरि...

युद्ध निवारक शक्ति

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  कहा जाता है कि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों की वजह से कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध नहीं होता जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों के प्रति दक्षिण कोरियाई सरकार का रुख , चाहे सत्ता में कोई भी हो , हमेशा “ परमाणु निरस्त्रीकरण” रहा है. तर्क यह है कि जनवादी कोरिया हमारा “दुश्मन” है , और यदि दुश्मन के पास परमाणु हथियार हों तो हमारी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है. इस सोच में यह धारणा निहित है कि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियार आक्रमण या विस्तार के लिए हैं. तो क्या वास्तव में जनवादी कोरिया ने परमाणु हथियार आक्रमण के उद्देश्य से विकसित किए हैं ? जनवादी कोरिया ने फरवरी 2005 में परमाणु शक्ति होने की घोषणा की और अक्टूबर 2006 में पहला परमाणु परीक्षण किया. इसके बाद नवंबर 2017 में अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल ह्वासंगफो- 15 के सफल परीक्षण के बाद उसने “राष्ट्रीय परमाणु शक्ति की पूर्णता” की घोषणा की. यदि हम नवंबर 2017 को आधार मानकर उससे पहले और बाद में जनवादी कोरिया के व्यवहार को देखें , तो अंतर दिखाई देता है. यदि ये हथियार आक्रमण के लिए होते , तो उसका व्यवहार अधिक आक्रामक होना चाह...