युद्ध निवारक शक्ति

 

कहा जाता है कि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों की वजह से कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध नहीं होता

जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों के प्रति दक्षिण कोरियाई सरकार का रुख, चाहे सत्ता में कोई भी हो, हमेशापरमाणु निरस्त्रीकरण” रहा है. तर्क यह है कि जनवादी कोरिया हमारा “दुश्मन” है, और यदि दुश्मन के पास परमाणु हथियार हों तो हमारी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है. इस सोच में यह धारणा निहित है कि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियार आक्रमण या विस्तार के लिए हैं.

तो क्या वास्तव में जनवादी कोरिया ने परमाणु हथियार आक्रमण के उद्देश्य से विकसित किए हैं?

जनवादी कोरिया ने फरवरी 2005 में परमाणु शक्ति होने की घोषणा की और अक्टूबर 2006 में पहला परमाणु परीक्षण किया. इसके बाद नवंबर 2017 में अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल ह्वासंगफो-15 के सफल परीक्षण के बाद उसने “राष्ट्रीय परमाणु शक्ति की पूर्णता” की घोषणा की.

यदि हम नवंबर 2017 को आधार मानकर उससे पहले और बाद में जनवादी कोरिया के व्यवहार को देखें, तो अंतर दिखाई देता है. यदि ये हथियार आक्रमण के लिए होते, तो उसका व्यवहार अधिक आक्रामक होना चाहिए था; और यदि जनवादी कोरिया के दावे के अनुसार वे रक्षा और युद्ध-निरोध के लिए हैं, तो अलग तरह का व्यवहार दिखाई देना चाहिए था.

उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र अपने मित्रों को डराने के लिए मार्शल आर्ट सीखता है, तो वह दूसरों को धमकाएगा या मारेगा; लेकिन यदि वह केवल आत्मरक्षा के लिए सीखता है, तो वह चुपचाप अभ्यास करेगा और सामान्य जीवन में पढ़ाई पर ध्यान देगा.

राष्ट्रीय परमाणु शक्ति की पूर्णता से पहले जनवादी कोरिया से अमेरिका के प्रति तीखे बयान अक्सर आते थे.

अगस्त 2017 में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जनवादी कोरिया को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे “आग और क्रोध” का सामना करना पड़ेगा, तब जनवादी कोरियाई रणनीतिक बल के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि वे ह्वासंगफो-12 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की चार इकाइयों से अमेरिकी सैन्य अड्डे गुआम के आसपास घेराबंदी कर गोलीबारी कर सकते हैं. यह योजना इतनी विस्तार से बताई गई थी कि उस समय अमेरिका सचमुच चिंतित हो गया था कि कहीं मिसाइलें दाग न दी जाएँ.

एक महीने बाद जनवादी कोरिया के  विदेश मंत्री कॉमरेड  री यंग-हो ने कहा कि “प्रशांत महासागर के ऊपर अभूतपूर्व हाइड्रोजन बम परीक्षण” किया जा सकता है, जिससे अमेरिका में फिर से हड़कंप मच गया.

लेकिन राष्ट्रीय परमाणु शक्ति की पूर्णता की घोषणा के बाद वास्तव में न तो गुआम के चारों ओर घेराबंदी वाली गोलीबारी हुई और न ही प्रशांत महासागर में परमाणु परीक्षण किया गया. यदि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियार आक्रमण के लिए होते, तो ऐसे कदम उठाना पहले से अधिक आसान हो सकता था. उस समय बहुत से लोग यह भी अनुमान लगा रहे थे कि जनवादी कोरिया वास्तव में ऐसा कर सकता है.

यहाँ तक कहा गया कि वह हवाई द्वीप के आसपास भी मिसाइल प्रक्षेपण कर सकता है या सीधे वॉशिंगटन डी.सी. के समुद्री क्षेत्र के पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल दाग सकता है. दुनिया में अमेरिकी प्रभुत्व का विरोध करने वाले कुछ लोग भीतर ही भीतर यह भी चाहते थे कि जनवादी कोरिया ऐसा कड़ा कदम उठाए.

लेकिन राष्ट्रीय परमाणु शक्ति के पूर्ण होने और उसके आगे विकास के साथ जनवादी कोरिया ने उलटे उन कार्यों से दूरी बना ली जिन्हें अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापानउकसावा” कहकर निंदा करते हैं. पहले जनवादी कोरिया की सैन्य गतिविधियों के कारण अमेरिका बार-बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाता था और निंदा प्रस्ताव जारी करता था, लेकिन अब ऐसी घटनाएँ धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं.

 अमेरिका ने 23 फरवरी से 9 मार्च तक अमेरिका-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यासआयरन फिस्ट” चलाया, और इसके बाद  अभी 9 से 19 मार्च तक अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यासफ्रीडम शील्ड” आयोजित कर रहा है. इसी दौरान अमेरिका ने ईरान पर हमला भी शुरू किया है और परिस्थिति उसके अनुमान के विपरीत लंबे युद्ध की ओर जाती दिख रही है. यह भी खबर है कि अमेरिका उन हथियारों को भी परिवहन विमानों से मध्य पूर्व के मोर्चे पर भेजने की कोशिश कर रहा है जिन्हें अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त अभ्यास में इस्तेमाल किया जाना था. ऐसी स्थिति में अमेरिका के लिए कोरियाई प्रायद्वीप पर पूरा ध्यान देना कठिन है.

जनवादी कोरिया के दृष्टिकोण से देखें तो यह समय शायद दक्षिण कोरिया पर हमला करने के लिए सामरिक रूप से सबसे अनुकूल हो सकता था. अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास को जनवादी कोरिया विरोधी अभ्यास कहकर उसके पास बहाना भी है. वास्तविक युद्ध न भी हो, तो केवल तनाव बढ़ाकर ही वह अमेरिका और दक्षिण कोरिया को काफी परेशानी में डाल सकता है.

लेकिन वर्तमान में जनवादी कोरिया का वातावरण आंतरिक आर्थिक विकास पर केंद्रित दिखाई देता है. फरवरी में आयोजित  कोरिया की वर्कर्स पार्टी की 9वीं कांग्रेस में भी आने वाले पाँच वर्षों के लिए समग्र लक्ष्य यह बताया गया कि जनवादी कोरियाई समाज को “स्थिरता को मजबूत करने और क्रमिक गुणात्मक विकास के चरण” में ले जाया जाए.

अर्थात जनवादी कोरिया अपने समाज को स्थिर आधार पर मजबूत करते हुए गुणात्मक विकास प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.

विशेष रूप से जनवादी कोरिया निर्माण क्षेत्र पर जोर दे रहा है, क्योंकि उसके अनुसार निर्माण के माध्यम से “राष्ट्रीय शक्ति की नींव को मजबूत किया जा सकता है, जनता को नई सभ्यता की ओर ले जाया जा सकता है और उनके कल्याण में वृद्धि की जा सकती है.”

पिछले पाँच वर्षों में जनवादी कोरिया ने फ्यंगयांग के ह्वासंग क्षेत्र सहित लगभग 60,000 आवासीय इकाइयों वाला नया शहर बनाया है. यह यहीं रुकने वाला नहीं है; अगले दो वर्षों में ह्वासोंग क्षेत्र को “प्रशासनिक क्षेत्र का नमूना बनाने के लिए और निर्माण कार्य” किया जाएगा, और “देश के सभी प्रांतीय मुख्यालयों को समय की आवश्यकताओं के अनुरूप बदलने का कार्य चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाएगा.”

इसके साथ ही स्थानीय विकास 20×10 नीति के तहत हर वर्ष 20 शहरों और जिलों में स्थानीय उद्योग कारखाने, सामान्य अस्पताल, बहुउद्देश्यीय शॉपिंग मॉल और अनाज प्रबंधन केंद्र बनाए जाते हैं. ग्रामीण गांवों को उच्च स्तरीय आवासीय परिसरों में बदलने की परियोजना भी जारी है, जिसके तहत पिछले चार वर्षों में 1,13,000 आवास इकाइयाँ बनाई गई हैं.

इसके अलावा सिनउईजू ग्रीनहाउस कृषि परिसर, वनसान-काल्मा समुद्री पर्यटन क्षेत्र, कोयला खदान गांवों और समुद्री तटों जैसे क्षेत्रों की भौगोलिक विशेषताओं के अनुसार विशेष सुविधाओं का निर्माण भी जारी रहने की संभावना है. संक्षेप में कहा जाए तो पूरा जनवादी कोरिया निर्माण कार्यों से सक्रिय दिखाई देता है.

निर्माण योजनाएँ इतनी व्यापक हैं कि 9वीं पार्टी कांग्रेस समाप्त होने के बाद कॉमरेड किम जंग उन ने सबसे पहले जिस स्थान का दौरा किया वह सांगवन सीमेंट कारखाना था. संभवतः इसलिए कि यदि सीमेंट उत्पादन सुचारु न हो तो निर्माण योजनाएँ पूरी नहीं हो सकतीं.

इन परिस्थितियों को देखते हुए जनवादी कोरिया स्वयं यह मूल्यांकन कर सकता है कि वह अपने इस दावे के अनुरूप व्यवहार कर रहा है कि उसके परमाणु हथियार आक्रमण के लिए नहीं बल्कि रक्षा और युद्ध-निरोध के लिए हैं. जनवादी कोरिया का तर्क है कि राष्ट्रीय परमाणु शक्ति की पूर्णता के कारण अमेरिका हमला नहीं कर सकता और इसी वजह से वह आर्थिक निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकता है.

इसलिए जनवादी कोरिया के लोग शायद यह मानते हों कि “हमारे परमाणु हथियार अमेरिका के आक्रमणकारी परमाणु हथियारों के विपरीत जनता को घर और कारखाने देने वाले, जनता से प्रेम करने वाले परमाणु हथियार हैं.” जनवादी कोरियाई मीडिया ने भी अपने परमाणु विकास को “जनता-प्रेम की उपज” बताया है.

इस वर्ष अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला और ईरान पर हमले के बाद कुछ लोग कहते हैं कि “अगला नंबर जनवादी कोरिया का है.” उनका तर्क है कि जनवादी कोरिया सैन्य रूप से अमेरिका के लिए सबसे गंभीर खतरा है और विश्व के विरोध-अमेरिका आंदोलन के अग्रिम मोर्चे पर है.

लेकिन अधिकांश विशेषज्ञ इस विचार को अवास्तविक मानते हैं और कहते हैं कि अमेरिका के लिए जनवादी कोरिया पर हमला करना संभव नहीं है, क्योंकि जनवादी कोरिया के पास ऐसे परमाणु हथियार हैं जो अमेरिकी मुख्य भूमि पर हमला कर सकते हैं.

पिछले वर्ष जून में जब अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमला किया था, तब भी कुछ लोगों ने कहा था कि “अगला नंबर जनवादी कोरिया का होगा.” इस पर उस समय दक्षिण कोरिया में अमेरिकी राजदूत के कार्यवाहक जोसेफ यून ने 24 जून 2025 को कोरिया प्रेस फाउंडेशन के एक सेमिनार में कहा था, “दुनिया मूल रूप से असमान है.” अर्थात किसी देश के पास परमाणु हथियार हैं या नहीं, इसके आधार पर अमेरिका की नीति बदल जाती है.

यह कहना कि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों की वजह से अमेरिका हमला नहीं कर सकता, इस अर्थ में भी लिया जा सकता है कि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों की वजह से कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध नहीं होता.

यह सही भी है जनवादी कोरिया के परमाणु हथियार कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध को रोकने में मदद करते हैं.

ऐसे विचार से सहमत होने वाले लोग भी काफी होंगे.

कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि पूर्व दक्षिण कोरियाई यून सक यल ने आपातकाल लगाने के बहाने किसी तरह जनवादी कोरिया को उकसाकर युद्ध शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन वह अंततः असदेताफल रहा और इसका कारण भी जनवादी कोरिया के परमाणु हथियार ही थे. यदि जनवादी कोरिया के पास परमाणु हथियार न होते, तो शायद यून सक यल ड्रोन तक सीमित न रहता बल्कि सीधे जनवादी कोरिया पर हमला कर  और अमेरिका भी उसे मंजूरी दे देता.

अब पीछे मुड़कर देखने पर लगता है कि जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों के कारण वास्तव में परेशानी उन लोगों को हुई है जो जनवादी कोरिया पर हमला करना चाहते थे—जैसे ट्रम्प और यून सक यल.

लेकिन 2  मार्च को दक्षिण कोरिया की तथाकथित उदारवादी ली जे-म्योंग सरकार के दौरान एक अजीब घटना हुई. अभिनेता म्यंग ग्ये-नाम, जोनोसामो” ( दक्षिण कोरिया का तथाकथित उदारवादी पूर्व राष्ट्रपति  नो मु ह्यून से प्रेम करने वालों का समूह) के पहले प्रतिनिधि था, उसे जनवादी कोरिया के  ह्वांगहे प्रांत का गवर्नर नियुक्त कर दिया गया.

यह भले ही अजीब लगे, लेकिन दक्षिण कोरियाई सरकार के प्रशासन एवं सुरक्षा मंत्रालय के अंतर्गतइबुक 5-दो समिति” (이북5도위원회)नामक संस्था है, जो जनवादी कोरिया के  ह्वांगहे, उत्तरी फ्यंगआन, दक्षिणी फ्यंगआन, उत्तरी हामग्यंग और दक्षिणी हामग्यंग के गवर्नरों की नियुक्ति करती है.

दक्षिण कोरिया के संविधान के अनुसार जनवादी कोरिया का क्षेत्र भी औपचारिक रूप से दक्षिण कोरिया का हिस्सा माना जाता है, इसलिए प्रतीकात्मक रूप से इन प्रांतों के प्रशासकों की नियुक्ति की जाती है.

हालाँकि वास्तव में जनवादी कोरिया की भूमि पर इनका कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं है, इसलिए यह लगभग मानद पद जैसा है, लेकिन फिर भी उन्हें उपमंत्री स्तर का दर्जा और हजारों डॉलर का वार्षिक वेतन मिलता है.

इसी कारण कुछ लोग इस इबुक 5-दो समिति को समाप्त करने की मांग करते हैं, और इसके लिए संसद में याचिकाएँ भी दायर की गई हैं.

जनवादी कोरिया के साथ संबंध सुधारने की इच्छा दिखाने वाली ली जे म्यंग सरकार का अभी भी इस समिति को बनाए रखना और उसे समझना कठिन है.

क्या जनवादी कोरिया की सरकार  दक्षिण कोरिया को अपना हिस्सा मानकर किसी संस्था के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप से दक्षिण कोरियाई प्रांतों के लिए इस तरह से गवर्नरों की नियुक्ति करती है? जवाब है: बिल्कुल नहीं!

यह इस बात का संकेत माना जा सकता है कि अभी भी दक्षिण कोरिया जनवादी कोरिया को स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता नहीं देता और स्वयं सीधे शासन करने की इच्छा रखता है. इससे अधिक जनवादी कोरिया का अपमान और क्या हो सकता है? इससे अधिक “अवशोषण द्वारा एकीकरण” की इच्छा का प्रदर्शन और क्या हो सकता है?

इस दृष्टि से देखें तो जनवादी कोरिया ने अपनी 9वीं पार्टी कांग्रेस में जो कहा कि “दक्षिण कोरिया की वर्तमान सरकार की ऊपर से दिखाई देने वाली नरम नीति एक भद्दा छल है,” और उसकी पुष्टि तथाकथित उदारवादी ली जे म्यंग सरकार स्वयं कर रही है.


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