जनवादी कोरिया के बारे में एक बार फिर पागलपन भरी रिपोर्ट


जनवादी कोरिया  की अंतरराष्ट्रीय स्थिति के तेजी से ऊँची होने और उसकी अर्थव्यवस्था के तेजी से विकसित होने से दक्षिण कोरियाई कार्पोरेटी गोदी मीडिया पागल हो गया है और वह फिर से जनवादी कोरिया के खिलाफ अनाप शनाप रिपोर्टिंग कर रहा है.

दक्षिण कोरिया के कार्पोरेटी गोदी मीडिया SBS न्यूज़ ने पिछले 7 अगस्त को एक रिपोर्ट प्रसारित की और बताया कि जनवादी कोरिया के कोरियन सेंट्रल टीवी में धूप का चश्मा पहने हुए जनवादी कोरियाई नागरिक दिखाई दिए.

 



इसके साथ ही उसने दक्षिण कोरिया के तथाकथित 2024 एकीकरण मंत्रालय की 202  की जनवादी कोरिया  मानवाधिकार रिपोर्ट’ को आधार बनाकर बताया गया कि जनवादी कोरिया  में धूप का चश्मा पहनना ‘प्रतिक्रियावादी कृत्य’ माना जाता है.

 

ऐसा लगता है कि SBS न्यूज़ इस रिपोर्ट के माध्यम से दो चीजों को लक्ष्य बना रहा था.

 

एक है जनवादी कोरिया के एक बंद समाज होने की धारणा फैलाना.

 

दूसरी है यह धारणा पैदा करना कि नागरिकों पर नियंत्रण इतना नहीं रह गया है कि ‘प्रतिक्रियावादी कृत्य’ खुले तौर पर सरकारी प्रसारण पर दिखाई देने की स्थिति आ गई है.

 

लेकिन अजीब बात यह है कि उसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कोरियन सेंट्रल टीवी ने तेज धूप वाले दिनों में धूप का चश्मा पहनने की सलाह देने वाला प्रसारण किया था. इसलिए SBS न्यूज़ ने वस्तुतः यह हास्यास्पद दावा कर दिया कि जनवादी कोरिया  का सरकारी प्रसारण ‘प्रतिक्रियावादी कृत्य’ की सिफारिश कर रहा है. शायद जनवादी कोरिया  को बदनाम करने के प्रति अत्यधिक जुनूनी होने के कारण, वे महज 1 मिनट 50 सेकंड की खबर में भी ऐसी बातें कर रहे हैं जो आगे-पीछे से बिल्कुल अलग हैं और ऐसी खबर भी मानो पागलपन भरी लगती हैं.

 

तो वास्तव में जनवादी कोरिया  धूप के चश्मे के बारे में क्या रवैया रखता है?

जनवादी कोरिया  में धूप के चश्मे को ‘색안경’ अर्थात ‘रंगीन चश्मा’ कहा जाता है.

जनवादी कोरियाई मीडिया में धूप का चश्मा पहने हुए लोगों के दृश्य आसानी से देखे जा सकते हैं.

यदि वास्तव में धूप के चश्मे को ‘प्रतिक्रियावादी’ घोषित किया गया होता, तो ऐसे दृश्य संभव ही नहीं होते.

जनवादी कोरिया के धूप के चश्मे की बात करते समय इस बात को छोड़ा नहीं जा सकता. वह यह कि कॉमरेड किम जंग इल युवा अवस्था से ही अक्सर धूप का चश्मा पहना करते थे .

कॉमरेड किम जंग इल अक्सर पूरी रात जागकर काम करते थे. इसलिए उन्हें चिंता थी कि यदि कॉमरेड किम इल संग उनकी आंखों को लाल देखेंगे तो वे चिंतित हो जाएंगे. इसी कारण उन्होंने जानबूझकर धूप का चश्मा पहनना शुरू किया था.

जब सर्वोच्च नेता ही धूप का चश्मा पहनते थे, तो इसे ‘प्रतिक्रियावादी’ घोषित करने का कोई सवाल ही नहीं उठता.

SBS न्यूज़ ने जिस आधार के रूप में दक्षिण कोरियाई एकीकरण मंत्रालय की अर्थात ‘जनवादी कोरिया  मानवाधिकार रिपोर्ट’ को प्रस्तुत किया है, वह जनवादी कोरिया  से भागकर आए लोगों की गवाहियों के आधार पर तैयार की जाती है. इसमें कई मामलों में तथ्यों की पुष्टि नहीं हुई होती और ऐसी बातें भी होती हैं जो सामान्य समझ के स्तर पर तर्कसंगत नहीं लगतीं.अर्थात यह ऐसी सामग्री नहीं है जिस पर बिना सोचे-समझे विश्वास किया जा सके.


वास्तव में, 2023 में प्रकाशित जनवादी कोरिया  मानवाधिकार रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण की प्रस्तावना में “सटीकता की गारंटी नहीं दी जा सकती”  वाक्य भी शामिल किया गया था, लेकिन विवाद पैदा होने के बाद उसे हटा दिया गया.

 

दूसरी ओर, जनवादी कोरिया  में भी किसी भी समय धूप का चश्मा पहनने को अशिष्ट व्यवहार मानने वाली एक संस्कृति मौजूद है.किसी युवा व्यक्ति का अपने से अधिक उम्र के बुजुर्ग के सामने धूप का चश्मा पहनना, या किसी गंभीर समारोह में धूप का चश्मा पहनकर शामिल होना अच्छा नहीं माना जाता. इस मामले में यह दक्षिण कोरियाई संस्कृति से बहुत अलग नहीं है.

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