फ्यंगयांग की गगनचुम्बी इमारतें रूस की देन नहीं
दक्षिण कोरियाई कठपुतली मीडिया जब भी जनवादी कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग में नई गगनचुंबी इमारतें, आधुनिक आवासीय परिसर, चमकदार दुकानें या शानदार रात के दृश्य दिखाता है, तो उसके पीछे कोई न कोई बाहरी शक्ति खोजने की कोशिश करता है.
कभी चीन, कभी रूस और कभी विदेशों से आने वाली विदेशी मुद्रा.
हाल की एक रिपोर्ट में भी यही हुआ. दक्षिण कोरियाई अखबार एशिया इकॉनॉमिक डेली ने फ्यंगयांग में दिखाई दे रहे बदलावों को रूस के साथ जनवादी कोरिया की बढ़ती निकटता और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में मिली ‘विदेशी मुद्रा की विशेष आमदनी’ से जोड़ दिया.
अर्थात सरल भाषा में कहा जाए तो इसका तर्क यह है—जनवादी कोरिया ने रूस के लिए सैनिक भेजे, रूस से पैसा मिला और उस पैसे से फ्यंगयांग की गगनचुंबी इमारतें खड़ी हो गईं.
पर यह सुनने में आसान है और सच नहीं है.क्योंकि फ्यंगयांग का परिवर्तन जनवादी कोरिया- रूस सैन्य सहयोग से बहुत पहले शुरू हो चुका था.
पहले इतिहास देखिए
यदि फ्यंगयांग के विकास को केवल रूस से प्राप्त धन का परिणाम बताया जाए तो एक सरल सवाल पैदा होता है—2012, 2015, 2017 और 2018 में फ्यंगयांग में जो परिवर्तन दिखाई दे रहे थे, उनका पैसा कहाँ से आया था?
2012 में छांगजन स्ट्रीट विकसित हुई.
2015 में मिरे साइंटिस्ट स्ट्रीट का निर्माण हुआ.
2017 में रमंय्ग स्ट्रीट अस्तित्व में आई.
2018 में अंतर-कोरियाई शिखर सम्मेलन के लिए दक्षिण कोरियाई पत्रकार प्योंगयांग पहुँचे तो उन्होंने स्वयं राजधानी में हुए बड़े परिवर्तन को रिपोर्ट किया. उन्होंने फ्यंगयांग को गगनचुंबी इमारतों से बदलता हुआ शहर बताया. और उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू भी नहीं हुआ था.
जनवादी कोरिया द्वारा रुस में सैनिक भेजने की वर्तमान कहानी तो उससे कई वर्ष बाद की है.
इसलिए फ्यंगयांग के विकास को केवल रूस से प्राप्त हालिया आर्थिक लाभ से समझाना ऐतिहासिक रूप से गलत है.
देसंग डिपार्टमेंट स्टोर का उदाहरण
वही दक्षिण कोरियाई काॅरपोरेटी अखबार एशिया इकॉनॉमिक डेली ने फ्यंगयांग के देसंग डिपार्टमेंट स्टोर में ओमेगा घड़ियों और चैनल कॉस्मेटिक्स जैसे विदेशी लक्जरी उत्पादों की उपलब्धता को भी जनवादी कोरिया में हालिया आर्थिक परिवर्तन का उदाहरण बनाया.
लेकिन यहाँ भी समय-क्रम महत्वपूर्ण है.
देसंग डिपार्टमेंट स्टोर का निर्माण 14 अप्रैल 2019 को पूरा हुआ था.2019 में ही वहाँ ओमेगा और टिस्सोट जैसी घड़ियों के ब्रांड उपलब्ध थे. शाॅनेल कॉस्मेटिक्स भी उस समय बेचे जा रहे थे. अर्थात आज जिस चीज को जनवादी कोरिया की हालिया ‘रूस से आई समृद्धि’ का प्रमाण बताया जा रहा है, वह वस्तुतः सात वर्ष पहले से मौजूद थी.
यह कोई मामूली गलती नहीं है. इतिहास में किसी घटना का समय बदल देने से उसके कारण की पूरी व्याख्या बदल जाती है।
रूस के साथ संबंध महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कहानी यहीं से शुरू नहीं होती
इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि जनवादी कोरिया और रूस के बीच आर्थिक तथा सैन्य सहयोग का कोई महत्व नहीं है. दोनों देशों के संबंधों में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं.
लेकिन किसी घटना का अस्तित्व स्वीकार करना और उसे हर दूसरी घटना का एकमात्र कारण मान लेना—दो अलग बातें हैं.
जनवादी कोरिया की वर्तमान आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को समझने के लिए हमें एक लंबे ऐतिहासिक दौर को देखना होगा. विशेष रूप से यह देखना होगा कि जनवादी कोरिया ने दशकों तक प्रतिबंधों, आर्थिक नाकेबंदी और बाहरी दबाव के बीच अपने राज्य-नियंत्रित औद्योगिक ढाँचे को किस प्रकार बनाए रखा और विकसित किया.
2021 की योजना रूस से पहले की कहानी बताती है
जनवरी 2021 में कोरियाई वर्कर्स पार्टी की 8वीं कांग्रेस में काॅमरेड किम जंग उन ने फ्यंगयांग में बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की योजना घोषित की.
लक्ष्य था—2021 से 2025 तक हर वर्ष 10,000 आवास इकाइयाँ. यानि 5 वर्षों में कुल 50,000 आवास इकाइयाँ. इसके बाद सोंगशिन-सोंगह्वा क्षेत्र और ह्वासोंग क्षेत्र में चरणबद्ध निर्माण हुआ.2022 से लेकर 2026 तक राजधानी में हजारों नए घर और आधुनिक आवासीय परिसर बनाए गए.
यहाँ एक बार फिर प्रश्न उठता है—यदि फ्यंगयांग का विकास रूस से प्राप्त धन का परिणाम है, तो 2021 में घोषित इस विशाल निर्माण योजना को कैसे समझा जाए?
जनवादी कोरिया-रूस के वर्तमान सैन्य सहयोग से पहले ही जनवादी कोरिया ने राजधानी के पुनर्निर्माण और आवास निर्माण को राष्ट्रीय विकास रणनीति का हिस्सा बना लिया था.
प्रतिबंधों के बीच विकास को केवल ‘बाहरी सहायता’ कहना क्यों सुविधाजनक है?
जनवादी कोरिया के बारे में पश्चिमी और उसकी कठपुतली दक्षिण कोरियाई मुख्यधारा की एक स्थापित व्याख्या है- जनवादी कोरिया स्वयं कुछ पैदा नहीं कर सकता!
यदि वहाँ आर्थिक गतिविधि दिखाई देती है, तो उसका कारण चीन होगा.
यदि सैन्य क्षमता बढ़ती दिखाई देती है, तो उसका कारण रूस होगा.
यदि नई इमारतें बनती दिखाई देती हैं, तो उसका कारण विदेशी मुद्रा होगी.
इस प्रकार जनवादी कोरिया की अपनी उत्पादन क्षमता, इंजीनियरिंग क्षमता, श्रम शक्ति और राज्य की संसाधन-संगठन क्षमता लगातार पृष्ठभूमि में चली जाती है.
लेकिन किसी देश के विकास को समझने के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि उसे बाहर से क्या मिला. यह भी देखना पड़ता है कि उसने उपलब्ध संसाधनों को कैसे संगठित किया?
एक देश को इस्पात मिल सकता है.लेकिन उससे गगनचुंबी इमारत बनाने के लिए इंजीनियर चाहिए, निर्माण श्रमिक चाहिए, सीमेंट चाहिए, निर्माण मशीनरी चाहिए, परिवहन चाहिए बिजली चाहिए, डिजाइन और योजना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण—इन सभी संसाधनों को एक बड़े निर्माण कार्यक्रम में संगठित करने की राज्य क्षमता चाहिए.
जनवादी कोरिया की वास्तविक उपलब्धि कहाँ है?
जनवादी कोरिया के विकास को समझने के लिए शायद सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि उसे रूस या चीन से क्या मिला
प्रश्न यह होना चाहिए—प्रतिबंधों के बावजूद वह अपने उपलब्ध संसाधनों से क्या करने में सक्षम रहा?
यही वह बिंदु है जिसे बाहरी निर्भरता की सरल कहानी अक्सर छिपा देती है।
फ्यंगयांग में लगातार नए आवासीय क्षेत्र बन रहे हैं. नई सड़कों और सार्वजनिक भवनों का निर्माण हो रहा है.राजधानी की शहरी संरचना बदल रही है.और यह प्रक्रिया एक-दो वर्षों की नहीं बल्कि एक दशक से अधिक समय से जारी है.
इसलिए इसे केवल हालिया जनवादी कोरिया -रूस सहयोग का परिणाम बताना वास्तविकता का अत्यधिक सरलीकरण है.
असली सवाल फ्यंगयांग की इमारतें नहीं, आर्थिक व्यवस्था है
फ्यंगयांग की गगनचुंबी इमारतों पर बहस अंततः एक बड़े प्रश्न तक पहुँचती है.
क्या किसी समाज की आर्थिक उपलब्धियों को केवल बाहरी सहायता से समझा जा सकता है?या हमें उसके अपने उत्पादन संबंधों, राज्य की भूमिका, श्रम शक्ति, औद्योगिक आधार और संसाधनों के संगठन को भी देखना चाहिए?
यदि जनवादी कोरिया में कुछ नया बनता है और हम तुरंत कहते हैं—"रूस ने पैसा दिया होगा! "तो हम वास्तव में उस समाज की अपनी उत्पादन क्षमता को विश्लेषण से बाहर कर रहे होते हैं।
यह वैज्ञानिक विश्लेषण नहीं है.
सही दृष्टिकोण यह है कि जनवादी कोरिया की आंतरिक उत्पादन क्षमता, राज्य की आर्थिक नीति और दीर्घकालीन विकास योजनाओं—इन सभी को एक साथ देखा जाए.
इसलिए फ्यंगयांग की कहानी को उसके पूरे संदर्भ में देखना होगा
आज फ्यंगयांग की तस्वीरों में गगनचुंबी इमारतें दिखाई देती हैं. लेकिन उन इमारतों की कहानी 2024 में रूस से शुरू नहीं होती.उसकी जड़ें 2010 के दशक के आरंभ तक जाती हैं
छांगजन स्ट्रीट से मिरे साइंटिस्ट स्ट्रीट तक.
रमय्ंग स्ट्रीट से सोंगशिन-सोंगह्वा तक.
और वहाँ से ह्वासंग के नए आवासीय क्षेत्रों तक.
यह एक लंबी निर्माण प्रक्रिया है.
इसलिए फ्यंगयांग के विकास की पूरी कहानी को रूस के कुर्स्क अभियान से जोड़ देना इतिहास को बहुत छोटा कर देना है.
फ्यंगयांग की गगनचुंबी इमारतों को समझने के लिए हमें केवल यह नहीं पूछना चाहिए कि—
रूस ने जनवादी कोरिया को क्या दिया”
बल्कि यह पूछना चाहिए—जनवादी कोरिया ने दशकों की आर्थिक नाकेबंदी और प्रतिबंधों के बावजूद अपने पास मौजूद संसाधनों से क्या बनाया”?
यही प्रश्न फ्यंगयांग के वास्तविक आर्थिक इतिहास को समझने की शुरुआत हो सकता है.
जनवादी कोरिया की राजधानी फ्यंगयांग का विकास साम्राज्यवाद और उनकी कठपुतलियों को फूटी आंख नहीं सुहाया तो वही काॅरपोरेटी एशिया इकोनॉमिक डेली ने साम्राज्यवाद के पैसे से चलने वाले और जनवादी कोरिया के बारे में अनाप शनाप झूठ फैलाने वाले दक्षिण कोरिया के सेजोंग इंस्टीट्यूट के भाड़े के ट्टटू शोधकर्ता पीटर वार्ड के हवाले से एक और झूठ कहा कि केवल फ्यंगयांग का विकास हो रहा है,और जनवादी कोरिया का समग्र विकास समान रूप से नहीं हो पाया है और यह केवल कुछ विशेष क्षेत्रों पर केंद्रित ‘प्रोजेक्ट बूम’ भर है.
आइए इसकी पड़ताल करें कि क्या उस भाड़े के ट्टटू शोधकर्ता के दावे के अनुसार जनवादी कोरिया केवल फ्यंगयांग पर केंद्रित ‘प्रोजेक्ट बूम’ कर रहा है.
पेकतू पर्वत की तलहटी में सामजियन शहर स्थित है. सामजियन शहर के पुनर्निर्माण की परियोजना को 2010 के दशक में जनवादी कोरिया की निर्माण परियोजनाओं के प्रमुख उदाहरणों में गिना जाता है.
सामजियन शहर का पुनर्निर्माण तब शुरू हुआ जब जनवादी कोरिया के राज्य मामलों के आयोग के अध्यक्ष काॅमरेड किम जंग उन ने नवंबर 2013 में तत्कालीन सामजियन काउंटी का दौरा करते हुए इसे पूरी तरह बदल देने का अपना संकल्प व्यक्त किया. 2015 में प्रथम चरण का विकास कार्य पूरा हुआ और 2019 में दूसरे चरण का काम पूरा होने के साथ सामजियन काउंटी का दर्जा बढ़ाकर शहर कर दिया गया.2021 में तीसरे चरण का काम पूरा होने के साथ पुनर्निर्माण परियोजना समाप्त हुई.
दक्षिण कोरिया के एक निर्माण इंजीनियर पाक वन हो ने सामजियन शहर के दूसरे चरण के निर्माण के पूरा होने की तस्वीर देखकर कहा कि “सिर्फ तीन साल से कुछ अधिक समय में इतनी विशाल परियोजना को पूरा किया गया, यह आश्चर्यजनक है” उसने कहा कि कोणदार लाल छतें स्विट्जरलैंड के बर्न शहर की याद दिलाती हैं और इसका पैमाना तथा डिजाइन दोनों ही कल्पना से परे हैं. उसने शहर के केंद्र में स्थित 550 कमरों वाले सामजियन होटल की तुलना सियोल के शिल्ला होटल (464 कमरे) से करते हुए उसके आकार पर आश्चर्य व्यक्त किया. जब जब अमेरिकी और कठपुतली दक्षिण कोरिया द्वारा जनवादी कोरिया के बारे में फैलाए गए तमाम जहरीले दुष्प्रचार और अनाप शनाप झूठ के विपरीत असल सच्चाई स्वीकार की जाती है तो ऐसा ही आश्चर्य होता है.
2020 के दशक में प्रवेश करने के बाद जनवादी कोरिया ने ग्रामीण क्षेत्रों और कोयला खनन वाले गांवों को पूरी तरह बदलने की नीति भी अपनाई है।
जनवादी कोरिया ने दिसंबर 2021 के अंत में आयोजित कोरियाई वर्कर्स पार्टी की केंद्रीय समिति की आठवीं कार्यकाल की चौथी पूर्ण बैठक में ग्रामीण समस्या पर गहन चर्चा करने के बाद ‘नए युग में समाजवादी ग्रामीण निर्माण कार्यक्रम’ को अपनाया.
इसके बाद, मार्च 2025 तक लगभग तीन वर्षों की अवधि में 1,500 से अधिक ग्रामीण गांवों में 80,700 से अधिक परिवारों के लिए मकान बनाए गए थे और उस समय 20,000 से अधिक परिवारों के लिए मकानों का निर्माण अतिरिक्त रूप से चल रहा था.
इसके अलावा, जनवादी कोरिया ने 15 जनवरी 2024 को आयोजित सर्वोच्च जनसभा में ‘स्थानीय विकास 20×10 नीति’ को आगे बढ़ाने की घोषणा की.
इसकी योजना है कि 10 वर्षों तक हर वर्ष 20 शहरों और काउंटी में आधुनिक स्थानीय औद्योगिक कारखाने बनाए जाएं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था तथा निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाए।
नीति के दूसरे वर्ष, 2025 से कारखानों के अलावा आधुनिक अस्पतालों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रसार केंद्रों और अनाज प्रबंधन सुविधाओं सहित ‘तीन प्रमुख परियोजनाओं’ को भी साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है.
जनवादी कोरिया हर वर्ष की शुरुआत में लक्षित 20 शहरों और काउंटी की घोषणा करता है, तुरंत निर्माण शुरू करता है और वर्ष के अंत तक उन्हें पूरा करने की गति से इसे आगे बढ़ा रहा है.
इतना ही नहीं, जनवादी कोरिया ने इस वर्ष से कोयला खनन वाले गांवों के विकास को भी आगे बढ़ाना शुरू किया है.
इस प्रकार, जनवादी कोरिया का विकास केवल प्योंगयांग तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रांतों तथा ग्रामीण क्षेत्रों और कोयला खनन वाले गांवों तक भी विस्तारित हो रहा है. इसलिए ‘केवल फ्यंगयांग पर केंद्रित प्रोजेक्ट बूम’ का आकलन भी गलत है. और हाँ इसमें भी जनवादी कोरिया के करीबी चीन और रूस की सहायता का एंगल होने या खोजने की गफलत न पालें. वरना बाद में निराशा ही हाथ लगेगी.
सबसे बड़ी बात जो समझनी है कि जनवादी कोरिया के पास अपनी स्वावलंबी अर्थव्यवस्था है जो शत्रुतापूर्ण ताकतों की आर्थिक नाकाबंदी से 10 तो क्या आगे आने वाले 100 साल और उससे भी ज्यादा और दुनिया भर के तमाम आर्थिक उथल- पुथल से आसानी से निपट सकती है और साथ ही देश की समृद्धि और लोगों के जीवन में सुधार की गारंटी देने में सक्षम है.




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