जनवादी कोरिया की आर्थिक सफलता का सच
8 जून 2026 को अमेरिकी साम्राज्यवादी वित्तीय पूंजी के सबसे बड़े प्रवक्ता 'वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ)' के द्वारा जनवादी कोरिया (गलत नाम : उत्तर कोरिया) को दुनिया की सबसे आश्चर्यजनक आर्थिक सफलता बताने के बाद लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ. भारत में भी कुछ स्वतंत्र पत्रकारिता करने वाले लोगों ने भी अपने यू ट्यूब चैनल पर भी 'वॉल स्ट्रीट जर्नल के लेख के आधार पर इसका विश्लेषण किया. इसी कड़ी में KNOCKING NEWS के संस्थापक संपादक और वरिष्ट पत्रकार गिरिजेश वशिष्ट ने भी जनवादी कोरिया को लेकर अपनी बात रखी है. इस वीडियो में उन्होंने जनवादी कोरिया के बारे में कई सारी चीजें एकदम सही बताईं हैं जैसे की वहां सबको रोजगार मिलता है, सारी जनता को मुफ्त आवास, चिकित्सा, शिक्षा की सुविधा प्राप्त है, वेतन में ज्यादा अंतर नहीं है वैगेरह, वैगेरह
पर वे जनवादी कोरिया आर्थिक सफलता के
वास्तविक कारणों के मसले पर 'वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के इस लेख से प्रभावित
होकर उसकी भाषा बोल जाते हैं और कहते हैं कि जनवादी कोरिया रूस को हथियारों की बिक्री
से खूब कमा रहा है , उनकी गलती नहीं है, वर्षों से जनवादी कोरिया के बारे
में इतना जहरीला दुष्प्रचार किया गया है कि ऐसी बातें हो जाती हैं.
आइये 'वॉल स्ट्रीट जर्नल’
के इस लेख की पड़ताल करते हुए वास्तविकता की जाँच करते हैं.
वस्तुतः 'वॉल स्ट्रीट जर्नल’ का यह लेख जनवादी कोरिया की आर्थिक सफलता को विकृत रूप में प्रस्तुत करता
है और उसकी आर्थिक सफलता के वास्तविक कारणों की अनदेखी करता है और यह दावा करता है कि "उसकी अर्थव्यवस्था कई
वर्षों में पहली बार इस प्रकार फल-फूल रही है, जिसका कारण रूस को
हथियारों की बिक्री, रूस में सैनिकों की तैनाती, चीन से मिलने वाली
आपूर्ति एवं वित्तीय सहायता तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की अवहेलना करते हुए
अधिक ऊर्जा, पुर्ज़ों और सामग्रियों का आयात करना है."
यह एक घोर और स्पष्ट विकृति है.जनवादी कोरिया की अर्थव्यवस्था स्वतंत्र और
आत्मनिर्भर है.विदेशी व्यापार उसकी अर्थव्यवस्था का केवल 4.8 प्रतिशत है.
जनवरी 2020 से लेकर 2024 के मध्य तक जनवादी कोरिया की
सीमाएँ बंद रहीं.2023 में रूस के साथ उसका व्यापार केवल 3.44 करोड़ अमेरिकी डॉलर का था.
चीन के साथ उसका व्यापार भी 2019 के स्तर से नीचे रहा.
वास्तव में, जनवादी कोरिया की अनेक बार यात्रा करने वाले लोगों के मुताबिक आज वहाँ चीनी निर्मित वस्तुएँ पहले की तुलना में कम और जनवादी कोरिया में निर्मित वस्तुएँ अधिक दिखाई देती हैं.
जहाँ तक रूस में सैनिकों की तैनाती का प्रश्न है, उससे जनवादी कोरिया की अर्थव्यवस्था को कैसे लाभ पहुँच सकता है या आर्थिक
विकास कैसे तेज़ हो सकता है? यह दावा पूरी तरह निरर्थक है.
लेख में दावा किया गया है कि 15,000 जनवादी कोरियाई सैनिक रूस में लड़े.वास्तविकता में यह संख्या संभवतः इससे काफी कम थी.कुछ पश्चिमी
मीडिया संस्थानों ने यह संख्या 10,000 से 11,000 के बीच बताई है.
लेख एक बार फिर प्रतिबंधों के
उल्लंघन (Sanctions Breaking) की पुरानी दलील
प्रस्तुत करता है.
यह भी एक विकृत चित्रण है, क्योंकि यह जनवादी
कोरिया की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की अनदेखी करता है.
जनवादी कोरिया को प्रतिबंध तोड़ने या उनसे बचने की
आवश्यकता ही नहीं है, क्योंकि वह अपनी अधिकांश आवश्यक वस्तुएँ स्वयं बना सकता
है—एक कलाई घड़ी से लेकर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) तक.
ह्वासंग स्ट्रीट जैसी परियोजनाएँ जनवादी कोरियाई श्रमिकों द्वारा बनाई गईं, न कि रूसी या चीनी मजदूरों द्वारा, और न ही बाहरी धन से.
जनवादी कोरिया में निर्माण कार्यों में तेज़ी वास्तव में यूक्रेन युद्ध से पहले ही शुरू हो
चुकी थी.
यह वृद्धि 2016–2017 में प्रारंभ हुई थी और कुछ हद तक 2012 में भी, जब छांगजिन स्ट्रीट का निर्माण किया गया था.
वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की 8वीं केंद्रीय समिति के 9वें पूर्ण अधिवेशन में यह बताया गया था किराष्ट्रीय आर्थिक विकास के 12 लक्ष्य पूर्ण कर लिए गए.
इनमें शामिल थे—
- अनाज उत्पादन – 103%
- विद्युत उत्पादन – 100%
- कोयला – 100%
- नाइट्रोजन उर्वरक – 100%
- रोल्ड स्टील – 102%
- अलौह धातु – 131%
- लकड़ी – 109%
- सीमेंट – 101%
- सामान्य कपड़ा – 101%
- समुद्री उत्पाद – 105%
- रेल माल परिवहन – 106%
- निर्माणाधीन आवास – 109%
साथ ही—
- मोटर वाहन उत्पादन – 220%
- ट्रांसफॉर्मर – 208%
- बेयरिंग – 121%
- विद्युत जस्ता – 140%
- सीसा – 121%
- कागज़ – 113%
- नमक – 110%
- सौंदर्य प्रसाधन – 109%
- फ्लैट ग्लास – 100%
- मैग्नेशिया क्लिंकर – 104%
तथा उत्पादन योजना का अनुशासन स्थापित किया गया.
2020 (जो 8वीं पार्टी कांग्रेस से ठीक पहले का वर्ष था) की तुलना में 2023 में—
- आयरन ट्राइऑक्साइड उत्पादन 3.5 गुना
- पिग आयरन 2.7 गुना
- रोल्ड स्टील 1.9 गुना
- मशीन टूल्स 5.1 गुना
- सीमेंट 1.4 गुना
- नाइट्रोजन उर्वरक 1.3 गुना
बढ़ा तथा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 1.4 गुना वृद्धि हुई.
लेख में मिरे साइंटिस्ट्स
स्ट्रीट के पिज़्ज़ा रेस्तराँ को नया बताया गया है. जबकि रेस्तराँ 2017 में ही खुल चुका था.
लेख में एक पुराना दावा दोहराया गया है कि फ्यंगयांग वह शहर है जहाँ केवल "देश का अभिजात
वर्ग" रहता है.यह पूरी तरह निरर्थक बात है.
फ्यंगयांग के अनेक निवासी वास्तव में—
- औद्योगिक श्रमिक,
- वेट्रेस,
- दुकान सहायक,
- चालक,
- रेलवे कर्मचारी
आदि हैं.
वास्तव में फ्यंगयांग श्रमिकों का शहर, अर्थात सर्वहारा (Proletarian) का शहर है.
लेख में जनवादी कोरिया के बारे में अनेक झूठे आरोप लगाए
गए हैं, जिनमें से कुछ तो वास्तव में हास्यास्पद हैं. क्योंकि फिर वही पुरानी बातें
दुहराई गई है जैसे कि साइबर युद्ध, हैकिंग जिनका जनवादी कोरिया बार-बार खंडन कर चुका है.
लेख यह भी दावा करता है कि जनवादी कोरिया की आधी आबादी कुपोषित है.
किन्तु इसके समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया
गया है.बल्कि लेख का शेष भाग स्वयं इस दावे का खंडन करता प्रतीत होता है.
इसी प्रकार यह कहा गया है कि जनवादी कोरिया का GDP अमेरिका के GDP का 1 प्रतिशत से भी कम है.
यह आँकड़ा पश्चिमी अनुमानों पर आधारित है, जो जनवादी कोरिया के GDP का अत्यधिक कम आकलन
करते हैं तथा क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity - PPP) की अनदेखी करते हैं.
वास्तव में 1980 के दशक की शुरुआत में ही जनवादी कोरिया की प्रति व्यक्ति GDP 1,200 अमेरिकी डॉलर से अधिक थी.
स्वाभाविक रूप से, मानवाधिकारों के संबंध में भी वही पुराना आरोप दोहराया गया है कि—
"यह दुनिया के सबसे बड़े मानवाधिकार उल्लंघन करने वाले
देशों में से एक है."
क्या जनवादी कोरिया ने किसी पड़ोसी देश के विरुद्ध नरसंहार (Genocide) किया है?
क्या वह शरणार्थी शिविरों पर
बमबारी कर रहा है?
साम्राज्यवादी शक्तियाँ दावा करती हैं कि जनवादी कोरिया
में लाखों लोग श्रम शिविरों में बंद हैं. यदि ऐसा होता तो वे शिविर अत्यंत विशाल
होते और वहाँ भारी संख्या में सुरक्षा कर्मी होते. लेकिन जनवादी कोरिया की अनेक
बार यात्रा करने वाले लोगों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें ऐसा कुछ भी
दिखाई नहीं दिया.
इसके अतिरिक्त जनवादी कोरिया एक अत्यंत शांत और स्थिर देश
है. वहाँ व्यस्त सड़कों पर आपातकालीन वाहनों को तेज़ी से दौड़ते हुए शायद ही कभी
देखा जाता है.
यदि साम्राज्यवादी शक्तियों के मानवाधिकार और जबरन श्रम
शिविरों संबंधी आरोप सही होते, तो सड़कों पर पुलिस
और सुरक्षा बल बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार कर ट्रकों में भरकर श्रम शिविरों
या एकाग्रता शिविरों में भेजते दिखाई देते. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं दिखा.
वहां दिल्ली और लंदन की तरह भारी हथियारों से लैस पुलिस
भी नहीं देखी जा सकती —न सड़कों पर, न रेलवे स्टेशनों पर
और न ही हवाई अड्डों पर.
वास्तव में मानसुदे असेंबली हॉल, जहाँ जनवादी कोरिया की संसद सर्वोच्च जनसभा (Supreme People's Assembly) स्थित है, उसके आसपास आराम से पैदल घूमा जा सकता है .
दिल्ली और लंदन जैसी राजधानियों में संसद के आसपास का
क्षेत्र प्रतिबंधित होता है, जहाँ सशस्त्र पुलिस
गश्त करती है और आवाजाही नियंत्रित रहती है.
लेकिन फ्यंगयांग में मानसुदे असेंबली हॉल के आसपास ऐसा
कोई पुलिस या सुरक्षा घेरा नहीं दिखाई देता है .
जनवादी कोरिया एक स्थिर, शांतिपूर्ण और एकात्म (Single-hearted Unity) पर आधारित समाज है. वहाँ आतंकवाद या दंगे नहीं होते.
जनवादी कोरिया में सशस्त्र बलों और नागरिकों के बीच एकता
है; इसलिए लोग सेना से भयभीत नहीं होते और न ही उससे घृणा करते हैं."
कहा जा सकता है कि 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने जनवादी कोरिया के विरुद्ध लगाए जाने वाले पुराने आरोपों और बदनाम करने वाले प्रचार को केवल एक नए रूप में प्रस्तुत किया है.
इस वीडीयो में यह बात
भी कही गयी है कि वेनेज़ुएला के जैसी दिक्कत जनवादी कोरिया को क्यों नहीं होती? मैं
तो ये कहना चाहता हूँ कि क्यूबा में भी लोगों को क्यों दिक्कत हो रही है कड़े
आर्थिक प्रतिबन्ध तो जनवादी कोरिया पर भी हैं और क्यूबा से भी कठोर हैं. stastista.
com वेबसाईट के मुताबिक
जनवादी कोरिया पर 2,098 तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं, और क्यूबा पर 208 तरह के प्रतिबंध लगे हैं.
क्या आपने कभी सुना
है कि जनवादी कोरिया की मदद करो ? क्यूबा की मदद के लिए तो दुनिया भर से आवाजें
उठती रहती हैं. क्यूबा और वेनेज़ुएला जैसे देशों ने समाजवादी प्रणाली को तो लागू किया
पर वे स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता भूल गए और चीन और रूस जैसी बड़ी ताकतों पर निर्भर
रहे. और नतीजा क्या निकला वही पूंजीवादी सुधार और उसके साथ साम्राज्यवादी पूंजी की
घुसपैठ. अब अमेरिका को शायद ही क्यूबा में तख्तापलट करने की जरुरत पड़े. बड़ी ताकतों और दूसरे
देशो पर निर्भर रहने से क्यूबा जैसा ही हश्र होता है. क्यूबा के इस तरह के पतन पर
घोर अफसोस है.
आज इस बात की आवश्यकता है कि जनवादी कोरिया के जूछे
विचार को पढ़ा और समझा जाए. सिर्फ मार्क्सवाद -लेनिनवाद के संयोंजन वाली जूछे जैसी
परम शक्तिशाली विचारधारा ही पूरी दुनिया से साम्राज्यवाद को जड़ से उखाड़ सकती है.

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