अमेरिकी नव उपनिवेश दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिकों के अपराध
अमेरिकी नव उपनिवेश दक्षिण कोरिया
में अमेरिकी सैनिकों के अपराध साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं. एक घटना में एक दक्षिण कोरियाई
पर हमला कर फरार हुए अमेरिकी सेना (USFK) के
सैनिक ‘A’ को घटना के लगभग एक महीने बाद,
पिछले 16 अप्रैल
2026 को गिरफ्तार किया गया. लेकिन पुलिस ने अमेरिकी सैनिक के बारे में कहा कि
“गिरफ्तारी वारंट पर विचार किया जा रहा है.
पिछले 21 मार्च की सुबह, सियोल के मौज मस्ती वाले होंगदे इलाके के एक क्लब में दो अमेरिकी सैनिकों ने एक दक्षिण कोरियाई पर हमला किया. पीड़ित की नाक टूट गई और उसे लगभग 4 सप्ताह तक इलाज की आवश्यकता वाली गंभीर चोटें आईं. उस समय घटनास्थल पर एक अमेरिकी सैनिक को पकड़ लिया गया था, लेकिन ‘A’ भाग गया.
अमेरिकी सैनिक ‘A’ टैक्सी का उपयोग कर भागा था, लेकिन उसने टैक्सी का किराया नकद में चुकाया,
इसलिए पुलिस के लिए उसका पीछा करना आसान नहीं था.
‘A’ के साथ मिलकर हमला करने वाले दूसरे
अमेरिकी सैनिक ‘B’ ने भी अपने साथी ‘A’ की पहचान उजागर नहीं की, जिससे पुलिस जांच को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
यदि कोई दक्षिण कोरियाई हमला करके
जानबूझकर फरार हो जाता और बाद में पकड़ा जाता, तो सबूत मिटाने आदि के आरोप में उसके गिरफ्तार होने की संभावना बहुत
अधिक होती. पर ये तो दक्षिण कोरिया का मालिक अमेरिका है.
लेकिन घटना वाले दिन मौके पर पकड़े
गए ‘B’ और बाद में पकड़े गए ‘A’, दोनों की गिरफ्तारी की कोई खबर अभी तक नहीं आई है.
केवल इस मामले में ही नहीं, बल्कि
अमेरिकी सैनिकों द्वारा किए गए अपराधों में भी अक्सर बाद में यह जानना मुश्किल
होता है कि मामला कैसे समाप्त हुआ और अपराध करने वाले अमेरिकी सैनिकों को क्या सजा
मिली.
17 दिसंबर 2024 को ग्योंगगी प्रांत के फ्यंगथेक स्टेशन के पास अमेरिकी सेना के
सार्जेंट ‘C’ ने एक किशोर को पीटकर उसका जबड़ा
तोड़ दिया. उस समय पीड़ित किशोर का इलाज करने वाले डॉक्टर ने कहा, “यह आश्चर्य की बात है कि वह मरा नहीं,” और “चोटें इतनी गंभीर हैं कि जीवनभर विकलांगता रह
सकती है.”
उस समय भी अमेरिकी सैनिक ‘C’ को गिरफ्तार नहीं किया गया.
अमेरिकी सैनिक अपराध करें तब भी
कोरियाई जांच एजेंसियों द्वारा उन्हें हिरासत में लेकर जांच करना बहुत दुर्लभ है.
इसका कारण अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य स्थिति समझौता (SOFA) है.
जांच और मुकदमा चलाना भी आसान नहीं
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार
विदेशी सेना को उस देश की कानूनी व्यवस्था का पालन करना चाहिए जहाँ वह तैनात है.
लेकिन विदेशी सेना को अपने विशेष सैन्य मिशनों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए
कुछ सुविधाएँ और विशेषाधिकार दिए जाते हैं. SOFA इसी उद्देश्य से बनाया जाता है.
अमेरिका- दक्षिण कोरिया SOFA
1966 में हस्ताक्षरित हुआ और 1967 में लागू हुआ. इसमें दक्षिण कोरिया में अमेरिकी
सेना की कानूनी स्थिति, सुविधाएँ, क्षेत्र और आपराधिक न्यायाधिकार आदि निर्धारित किए गए हैं.
यह समझौता नाम के लिए ही सही मुख्य
पाठ, सहमति अभिलेख (Minutes of
Agreement) और समझ बिंदुओं (Understandings)
से मिलकर बना है.
समझौता देशों के बीच किया गया मूल
अंतरराष्ट्रीय संधि दस्तावेज है, जो
कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है. सहमति अभिलेख समझौते की विस्तृत व्याख्या का
दस्तावेज होता है. समझ बिंदु उससे भी अधिक व्यावहारिक और प्रक्रियात्मक मामलों को
दर्ज करते हैं.
अमेरिका-दक्षिण कोरिया SOFA की धारा 22 “आपराधिक न्यायाधिकार” से संबंधित है. इसमें यह तय किया गया है कि जांच
और मुकदमा कौन करेगा और अपराध करने वाले अमेरिकी सैनिकों की हिरासत किसके पास होगी.
SOFA के अनुसार यदि अमेरिकी सैनिक अपराध
करता है, तो दक्षिण कोरिया को प्राथमिक
न्यायिक अधिकार प्राप्त होता है.
लेकिन वास्तविकता में अपराध करने
वाले अमेरिकी सैनिकों का दक्षिण कोरियाई अदालत में खड़ा होना बहुत दुर्लभ है.क्योंकि
इसमें कई “विषैले प्रावधान” मौजूद हैं.
सबसे पहले, SOFA की धारा 22(3)(a)(2) के अनुसार यदि अपराध “आधिकारिक कर्तव्य के दौरान किए गए कार्य या चूक”
से जुड़ा हो, तो दक्षिण कोरिया न्यायिक अधिकार का
प्रयोग नहीं कर सकता. सरल शब्दों में, यदि
अमेरिकी सैनिक ड्यूटी के दौरान अपराध करता है, तो दक्षिण कोरिया उस पर मुकदमा नहीं चला सकता.
ड्यूटी पर था या नहीं, इसका निर्धारण अमेरिकी सेना करती है. दक्षिण
कोरिया आपत्ति करे तो भी उसका अधिक प्रभाव नहीं पड़ता.
इसी कारण 2002 में हुई मिडिल स्कूल छात्राओं की बख्तरबंद वाहन से कुचलकर मौत वाली
घटना विवाद का विषय बनी थी. उस समय संबंधित अमेरिकी सैनिकों को ड्यूटी पर माना गया,
इसलिए उन पर दक्षिण कोरियाई अदालत में नहीं बल्कि
अमेरिकी सैन्य अदालत में मुकदमा चला और वे बरी हो गए.
इसके अलावा, SOFA की धारा 22(3)(d) में कहा गया है कि “यदि प्राथमिक अधिकार रखने वाला देश दूसरे देश के
अनुरोध को विशेष महत्व का मानता है, तो उसे
उस अनुरोध पर अनुकूल विचार करना चाहिए.”
अर्थात, भले ही दक्षिण कोरिया के पास प्राथमिक न्यायिक अधिकार हो, यदि अमेरिकी पक्ष न्यायिक अधिकार छोड़ने का
अनुरोध करे, तो दक्षिण कोरिया को “अनुकूल विचार”
कर अधिकार सौंपना होगा.
अमेरिका-दक्षिण कोरिया संबंधों की
प्रकृति को देखते हुए, अमेरिकी अनुरोध को कोरियाई पुलिस या
अभियोजन पक्ष द्वारा अस्वीकार करना कठिन होता है.
और SOFA की धारा 22(3) के
सहमति अभिलेख में तो स्पष्ट रूप से दक्षिण कोरिया द्वारा न्यायिक अधिकार छोड़ने का
प्रावधान भी मौजूद है. इसमें कहा गया है कि जब तक दक्षिण कोरिया यह न माने कि
न्यायिक अधिकार का प्रयोग “विशेष रूप से महत्वपूर्ण” है, तब तक अमेरिकी अनुरोध पर उसे अधिकार छोड़ना होगा.
जब न्यायिक अधिकार नहीं होता,
तो आमतौर पर जांच आगे नहीं बढ़ाई जाती और मामला
बंद कर दिया जाता है. इसलिए अमेरिकी सैनिकों द्वारा अपराध करने पर भी अधिकांश
मामलों में उन्हें सजा नहीं मिलती.
इसी कारण अमेरिकी सैनिकों के अपराधों
में अभियोजन दर कम है. अमेरिकी सैनिकों के अपराधों की अभियोजन दर औसतन 25% है, जबकि
घरेलू अपराधों की दर 35% है —
यानी 10% कम.
गिरफ्तार अवस्था में मुकदमा — आसमान
से तारे तोड़ने जैसा
यदि दक्षिण कोरियाई जांच एजेंसियाँ
कठिनाई से न्यायिक अधिकार प्राप्त भी कर लें, तब भी अमेरिकी सैनिकों पर गिरफ्तार अवस्था में मुकदमा चलना लगभग असंभव
है.
SOFA की धारा 22(5)(d) के अनुसार अपराध करने वाले अमेरिकी सैनिक को
अदालत द्वारा अंतिम सजा सुनाए जाने तक अमेरिकी सैन्य पुलिस की हिरासत में रखा जाता
है. यानी उस पर बिना गिरफ्तारी के मुकदमा चलता है.
गिरफ्तार अवस्था में मुकदमा केवल तब
संभव है जब अमेरिकी सैनिक ने हत्या, बलात्कार,
अपहरण, अवैध
मादक पदार्थों का व्यापार, आगजनी,
हथियारबंद डकैती, मारपीट से मृत्यु, शराब
पीकर वाहन चलाने से मौत, दुर्घटना
के बाद फरार होने जैसे गंभीर अपराध किए हों.
साथ ही यदि सबूत मिटाने या भागने की
आशंका हो, तब भी गिरफ्तारी संभव है.
लेकिन भले ही अमेरिकी सैनिक ने गंभीर
अपराध किया हो, SOFA के समझ बिंदुओं में ऐसे प्रावधान हैं
जिनके जरिए वह बिना गिरफ्तारी के मुकदमा झेल सकता है.
यदि दक्षिण कोरिया गंभीर अपराध में
मुकदमे से पहले हिरासत की मांग करता है, तो
अमेरिकी पक्ष उस पर “पर्याप्त विचार” करेगा.
इसका अर्थ है कि यदि अमेरिकी पक्ष
विचार करने के बाद मना कर दे, तो
दक्षिण कोरिया के पास कोई विकल्प नहीं बचता. तब आरोपी अमेरिकी सैन्य पुलिस की
हिरासत में ही रहता है.
होटल जैसी जेल
यदि अमेरिकी सैनिक जेल में बंद होता है, तो उसे दक्षिण कोरियाई कैदियों की तुलना में बिल्कुल अलग सुविधाएँ मिलती हैं.
1968 में बने SOFA समझौता अभिमत संख्या 13 में “SOFA
कैदियों के लिए न्यूनतम हिरासत मानक” निर्धारित
किए गए.
अमेरिकी सैनिकों को कम से कम 6.69
वर्गमीटर का कमरा दिया जाता है. लगभग 4.5 वर्गमीटर के रहने वाले हिस्से में डाइनिंग टेबल,
रेफ्रिजरेटर, ओवन, गैस स्टोव और माइक्रोवेव जैसी
सुविधाएँ होनी चाहिए. इसके अलावा व्यायाम उपकरण और मनोरंजन सुविधाएँ भी उपलब्ध
होनी चाहिए.
अमेरिकी सैनिक अमेरिकी सैन्य अड्डे
से लाई गई सामग्री से स्वयं खाना पकाते हैं.
दूसरी ओर, दक्षिण कोरियाई कैदियों के मामले में लगभग समान आकार के कमरे में कम
से कम 6 लोग रहते हैं. और ऐसी अतिरिक्त
सुविधाएँ बिल्कुल नहीं होतीं.
इसी कारण अमेरिकी सैनिकों की हिरासत
सुविधाओं को लेकर लगातार यह आलोचना होती रही है कि “यह दक्षिण कोरियाई जेल है या
होटल?”
दक्षिण कोरिया SOFA के कारण अपराध करने वाले अमेरिकी सैनिकों की ठीक
से जांच और मुकदमा नहीं कर सकता. और यदि मुश्किल से जांच और गिरफ्तारी हो भी जाए,
तो अमेरिकी सैनिक आरामदायक स्थानों में समय
बिताते हैं.
इसी कारण अमेरिकी सैनिक दक्षिण
कोरिया को अपना “खेल का मैदान” समझकर खुलेआम अपराध करते हैं.
मई 2025 में दक्षिण कोरिया के न्याय मंत्रालय द्वारा प्रकाशित 『2024 न्याय वार्षिकी』 के अनुसार अमेरिकी सैनिकों के
अपराधों में वृद्धि हुई है.
अमेरिकी सैनिकों के अपराधों की संख्या इस प्रकार रही:
2015 — 387 मामले
2016 — 388 मामले
2017 — 374 मामले
2018 — 351 मामले
2019 — 444 मामले
2020 — 541 मामले
2021 — 457 मामले
2022 — 521 मामले
2023 — 599 मामले
2024 — 635 मामले
लेकिन आँकड़ों में दर्ज न होने वाले
अपराध इससे अधिक हो सकते हैं.


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