सीमाओं से परे और आधुनिक दुनिया में जूछे
अधिकांश विदेशी लोग अक्सर यह मान
लेते हैं कि जूछे केवल जनवादी कोरिया के भीतर मौजूद एक विचारधारा है. विदेशी
मीडिया ने इसे एक पुरानी और कठोर विचारधारा के रूप में प्रस्तुत किया है, जो पूरी तरह जनवादी कोरियाई राज्य सरकार पर अपने
अस्तित्व के लिए निर्भर है. हालांकि, यह
दृष्टिकोण न केवल गलत है, बल्कि
यह न केवल इस विचारधारा की विश्वसनीयता बल्कि उन अनेक विद्वानों के लिए भी
हानिकारक है जो कई देशों में जूछे का अध्ययन और शोध कर रहे हैं तथा इसे एक
राजनीतिक सिद्धांत मानते हैं.
हालांकि जूछे अभी भी राजनीतिक
विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में अन्य मुख्यधारा की विचारधाराओं
की तुलना में एक छोटी विचारधारा है, लेकिन
इसे धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय मान्यता और ध्यान मिलना शुरू हुआ है. यह किसी नाटकीय
या सुर्खियाँ बटोरने वाले तरीके से नहीं, बल्कि
एक शांत रूप में हो रहा है जिसे यदि ध्यान से न देखा जाए तो आसानी से नज़रअंदाज़
किया जा सकता है. इसका एक संकेत उन अनेक स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समूहों तथा
संस्थानों का अस्तित्व है जो जूछे को एक राजनीतिक सिद्धांत के रूप में सीखने और
चर्चा करने के लिए समर्पित हैं. ये संगठन केवल जूछे के अस्तित्व के लिए लाभकारी
नहीं हैं, बल्कि महत्वपूर्ण इसलिए भी हैं
क्योंकि वे जूछे को गंभीरता से लेते हैं, जिससे
इसकी सामग्री का अध्ययन और अधिक विकास संभव हो पाता है. ये समूह वर्षों से,
कुछ तो दशकों से मौजूद हैं. वे उन राजनीतिक
वैज्ञानिकों, चिंतकों और दार्शनिकों का केंद्र हैं
जो राजनीतिक सिद्धांतों के अन्य रूपों में रुचि रखते हैं जिन्हें मुख्यधारा
पूंजीवादी मीडिया द्वारा अनदेखा और बदनाम किया जाता है. हालांकि सदस्यता के लिहाज
से ये समूह बड़े नहीं हैं, लेकिन
वे सक्रिय और समर्पित हैं.
लोगों को जूछे और अन्य सीमित
राजनीतिक विचारधाराओं के अध्ययन की ओर आकर्षित करने वाली बात हमेशा वैसी नहीं होती
जैसी मुख्यधारा मीडिया बताती है. यह जरूरी नहीं कि जनवादी कोरिया के प्रति प्रशंसा
हो, बल्कि यह आत्मनिर्भरता के विचार के
प्रति जिज्ञासा, राजनीतिक दर्शन का अध्ययन करने का
प्रेम, या समाज में सामान्य और सही मानी
जाने वाली चीजों से आगे देखने की इच्छा भी हो सकती है. कई जूछे विद्वानों के लिए,
अनिश्चितता और सीमाओं से भरी दुनिया में यह
सिद्धांत वैश्विक व्यवस्था पर एक अनोखा दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकता है.
जूछे अध्ययन समूह केवल समाजवादी
देशों में ही नहीं हैं, बल्कि दुनिया के कई अन्य क्षेत्रों
में भी आसानी से पाए जा सकते हैं. एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक, जूछे अध्ययन समूह और अन्य समान संस्थान सार्वजनिक
रूप से कार्य करते हैं और इस सिद्धांत से संबंधित उपलब्ध सामग्रियों के साथ
स्वतंत्र रूप से संवाद करते हैं. अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आत्म-नियंत्रण और
स्वायत्तता का विचार उन लोगों से गहराई से जुड़ता है जिन्होंने उपनिवेशवाद या
विदेशी हस्तक्षेप का अनुभव किया है. इन स्थानों में जूछे बाहरी शक्तियों और
प्रभुत्व के विरुद्ध एक वैचारिक प्रतिक्रिया जैसा दिखाई दे सकता है. इस संदर्भ में
जूछे राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उत्तर-उपनिवेशवाद के सिद्धांत जैसा
प्रतीत होता है.
इंटरनेट ने भी जूछे के प्रसार और
अनेक नए अध्ययन समूहों तथा शोध संस्थानों के गठन में बड़ी भूमिका निभाई है. पहले जूछे
से संबंधित अध्ययन सामग्री और ग्रंथों तक पहुंच बहुत सीमित थी. लेकिन अब इंटरनेट
के कारण कई अनुवादित ग्रंथ, चर्चाएँ
और अध्ययन सामग्री मुफ्त या बहुत कम लागत पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं. इससे इस सिद्धांत
तक पहुंच बढ़ी है और यही जूछे पर अनौपचारिक चर्चाओं और बहसों की बढ़ती प्रवृत्ति
का एक बड़ा कारण है. इसके अतिरिक्त, इसका
अर्थ यह भी है कि कभी-कभी लोग संयोगवश जूछे तक पहुँच जाते हैं. सामाजिक विज्ञान का
अध्ययन करने वाला कोई छात्र मुख्यधारा समाजवाद, मार्क्सवाद और लेनिनवाद जैसे अधिक चर्चित सिद्धांतों के साथ इस
सिद्धांत से भी परिचित हो सकता है. यह लगभग विडंबना ही है कि पूंजीपतियों द्वारा
विकसित तकनीक ने लोगों को अनेक समाजवादी विचारधाराओं और सिद्धांतों से परिचित
कराया है.
ये विकास जूछे और किसी हद तक अन्य
छोटी विचारधाराओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. यह दर्शाता है कि कोई भी विचारधारा
विलुप्त नहीं हुई है या पूरी तरह अपने मूल स्थान तक सीमित नहीं है. जूछे के मामले
में यह हर जगह मौजूद है. इंटरनेट पर कुछ क्लिक करने भर से कोई व्यक्ति सैकड़ों या
हजारों अध्ययन सामग्रियों तक पहुँच सकता है. यह भी दिखाता है कि भले ही इसका दर्शक
वर्ग छोटा हो, जूछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलता और
विकसित होता रहा है.
अंततः, जूछे की बढ़ती प्रतिष्ठा और ध्यान यह स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि
विचार किस प्रकार सीमाओं को पार करते हैं. लोग लगातार नए ज्ञान और नए सिद्धांतों
की तलाश में रहते हैं जो इस अत्यंत अस्थिर दुनिया में प्रतिदिन उभरती अनेक
समस्याओं का बेहतर समाधान दे सकें. इस संदर्भ में जूछे केवल जीवित ही नहीं है,
बल्कि फल-फूल भी रहा है.

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