अमेरिकी नव उपनिवेश दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिकों के अपराध-2

 


अमेरिका  अपने नव उपनिवेश दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बिना किसी सूचना के बार-बार अत्यंत खतरनाक जैव-रासायनिक प्रयोग करता रहा है.

विशेष रूप से, अमेरिकी सेना द्वारा प्रयोग किया गया एन्थ्रेक्स मिट्टी, समुद्र और मानव शरीर—सबको व्यापक रूप से प्रदूषित करने की क्षमता रखता है, इसलिए इसे जैव-रासायनिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

उदाहरण के लिए, एन्थ्रेक्स से दूषित मिट्टी काली पड़ जाती है और उपयोग योग्य नहीं रहती. यदि एन्थ्रेक्स श्वसन तंत्र आदि के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर जाए, तो “एन्थ्रेक्स रोग” फैल जाता है.

यदि कोई व्यक्ति हवा में फैले एन्थ्रेक्स को सांस के जरिए अंदर ले ले और एन्थ्रेक्स रोग हो जाए, तो मृत्यु दर 80~95% तक पहुंच जाती है. कहा जाता है कि यदि 100 किलोग्राम एन्थ्रेक्स को कोरियाई प्रायद्वीप के ऊपर फैलाया जाए, तो 30 लाख लोग संक्रमित होकर मर सकते हैं.

इसके अलावा, भले ही एन्थ्रेक्स को निष्क्रिय कर दिया गया हो, फिर भी आसपास के वातावरण के अनुसार उसके दोबारा सक्रिय होने का खतरा हमेशा बना रहता है.

इसी कारण जैविक हथियार निषेध संधि (BWC) एन्थ्रेक्स के विकास, भंडारण, परिवहन और उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित करती है. अमेरिका और दक्षिण कोरिया दोनों ने इस संधि की पुष्टि की है.

लेकिन अप्रैल 2015 में जीवित एन्थ्रेक्स को एक साधारण कागज़ के डिब्बे में पैक करके अमेरिकी कुरियर कंपनी “FedEx” के माध्यम से दक्षिण कोरिया के ओसान अमेरिकी सैन्य अड्डे पर लाया गया.

इस संबंध में अमेरिका ने कहा कि “डिलीवरी दुर्घटना” हुई थी, लेकिन अमेरिकी सैन्य अड्डा दूषित नहीं हुआ और अमेरिकी सैनिकों के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ा. साथ ही उसने यह भी हास्यास्पद दावा किया कि “प्रयोगशाला को ब्लीच से साफ कर दिया गया, इसलिए अब सब सुरक्षित है.”

अमेरिका को जीवित एन्थ्रेक्स के आयात की जानकारी होने के बावजूद उसने कोई सूचना नहीं दी. उसने पूरी तरह केवल अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा की चिंता की और दक्षिण कोरिया के प्रति “जो करना है कर लो” जैसा रवैया अपनाया.

अमेरिका की घोषणा के अनुसार, अमेरिकी सेना 2015 से पहले भी 2009~2014 के बीच 15 बार एन्थ्रेक्स के नमूने दक्षिण कोरिया लाई थी और योंगसान अमेरिकी सैन्य अड्डे पर प्रयोग किए गए थे. यह भी कहा गया कि 2015 में ओसान अड्डे पर लाए गए नमूनों में एन्थ्रेक्स के साथ-साथ प्लेग बैक्टीरिया भी था.

यहाँ तक कि यह दावा भी सामने आया कि अमेरिका ने एन्थ्रेक्स से 1 लाख गुना अधिक विषैला और “धरती का सबसे शक्तिशाली विष” कहे जाने वाले बोटुलिनम-A को भी दक्षिण कोरिया में लाया. दक्षिण कोरियाई दैनिक हान्ग्योरेह ने 19 अक्टूबर 2019 को “जुपिटर प्रोग्राम” के हवाले से कहा कि बोटुलिनम-A भी प्रयोगों के दायरे में शामिल था और संदेह जताया कि अमेरिका इसे भी चुपके से दक्षिण कोरिया लाया हो सकता है.

 यह ठीक-ठीक नहीं पता है कि अमेरिका ने दक्षिण कोरिया में कितने जैव-रासायनिक प्रयोग किए हैं.

अमेरिका ने जापानी साम्राज्य की जीवाणु युद्ध इकाई 731 से प्राप्त तकनीक के आधार पर एन्थ्रेक्स, ब्लैक डेथ बैक्टीरिया आदि जैव-रासायनिक हथियार विकसित किए और कोरियाई युद्ध के दौरान उनका उपयोग भी किया. यह Needham Report और CIA Report के माध्यम से सत्यापित तथ्य बताया जाता है.

अमेरिका ने कोरियाई युद्ध के बाद भी दक्षिण कोरिया में जैव-रासायनिक युद्ध को मानकर प्रयोग जारी रखे.

दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर एन्थ्रेक्स लाना जैविक युद्ध की तैयारी के लिए बनाए गए “जुपिटर प्रोग्राम” का हिस्सा था.


इससे पहले, सितंबर 1998 में अमेरिका ने दुनिया के अमेरिकी सैन्य अड्डों में सबसे पहले ओसान अमेरिकी सैन्य अड्डे पर एन्थ्रेक्स प्रयोग सुविधा स्थापित की थी. साथ ही अमेरिकी सैनिकों को बड़े पैमाने पर एन्थ्रेक्स वैक्सीन दी गई, जिसे जनवादी कोरिया के खिलाफ जीवाणु युद्ध की तैयारी माना जाता है.

2015 में एन्थ्रेक्स आयात का खुलासा होने के बाद भी अमेरिका ने दक्षिण कोरिया में अपने प्रयोग बंद नहीं किए.

अमेरिकी रक्षा विभाग की “2019 वित्तीय वर्ष जैव-रासायनिक रक्षा कार्यक्रम” बजट रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि अमेरिका 2016 से बुसान बंदरगाह के Pier 8 पर जैविक युद्ध की तैयारी के लिए जुपिटर प्रोग्राम चला रहा है. इसमें यह भी लिखा था कि प्रयोगों में जीवित जैविक एजेंट (बैक्टीरिया) शामिल हैं.

अमेरिकी सेना के Edgewood Chemical Biological Center (ECBC) के जैवविज्ञान विभाग के प्रमुख और जुपिटर प्रोग्राम के निदेशक डॉ. पीटर इमैनुएल ने दिसंबर 2018 में अमेरिकी सैन्य मीडिया “CBRNe Portal” को इंटरव्यू दिया.

डॉ. इमैनुएल ने दक्षिण कोरिया में जुपिटर प्रोग्राम चलाने के कारण के बारे में कहा:

यदि हम चाहें, तो (दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य अड्डों के) किसी भी स्थान पर प्रयोग कर सकते हैं, और (दक्षिण कोरिया) भू-राजनीतिक रूप से ऐसा “मित्रवत देश”(इसे “हमारा अड्डा” पढ़ा जाए) है जहाँ अमेरिकी सैन्य संसाधन केंद्रित हैं. ऐसे प्रयोग सफल भी हो सकते हैं और असफल भी. इसलिए हम ऐसे क्षेत्र में प्रयोग करना चाहते हैं जो मित्रवत हो, भू-राजनीतिक रूप से जुड़ा हो और जहाँ कुछ हद तक स्थिति को नियंत्रित किया जा सके.”

दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सेना की स्थिति को निर्धारित करने वाले SOFA समझौते में यह प्रावधान नहीं है कि खतरनाक हथियारों के आयात या बड़े सैन्य अभियानों तथा प्रशिक्षण के समय दक्षिण कोरियाई पक्ष को पहले से सूचना दी जाए.

अमेरिकी पक्ष द्वारा अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भेजे जाने वाले सभी सैन्य सामान भी दक्षिण कोरियाई सीमा शुल्क जांच से गुजरे बिना सीधे प्रवेश कर जाते हैं.

यह भी सामने आया कि अमेरिकी सेना की जैव-रासायनिक प्रयोगशालाएँ गुनसान अमेरिकी अड्डे, सियोल योंगसान बेस, प्योंगतैक कैंप हम्फ्रीज़ और चुंगचोंग क्षेत्र में अमेरिकी सेना के Public Health Command के अधीन प्रयोगशालाओं में भी मौजूद हैं.

अर्थात  दक्षिण कोरिया अमेरिका के लिए ऐसी प्रयोगशाला है जहाँ वह कभी भी आसानी से जैव-रासायनिक पदार्थ ला सकता है और प्रयोग कर सकता है.

एन्थ्रेक्स आयात घटना को अब 11 वर्ष हो चुके हैं.लेकिन आज भी पूरे दक्षिण कोरिया में फैले अमेरिकी सैन्य अड्डों पर अमेरिकी सेना कौन-कौन से प्रयोग कर रही है और क्या छिपा रही है—इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है.

अमेरिका अब भी दक्षिण कोरिया में अपने सैन्य अड्डों का उपयोग आधार के रूप में कर रहा है, और यह अनुमान लगाया जाता है कि इस समय भी वह दक्षिण कोरिया का मजाक उड़ाते हुए जैव-रासायनिक प्रयोग जारी रखे हुए है.

अमेरिका ने जुपिटर प्रोग्राम को पूरक करने वाला “CENTO” प्रोग्राम भी दक्षिण कोरिया में विकसित किया और प्रयोगों के लिए पूरे दक्षिण कोरिया  के अमेरिकी अड्डों पर रोगजनक पदार्थ वितरित किए.

अमेरिका का दावा है कि CENTO प्रोग्राम से जुड़े प्रयोग इस वर्ष तक चलेंगे, लेकिन यह भी केवल उसका एकतरफा दावा है—वास्तव में प्रयोग कब तक जारी रहेंगे, यह कोई नहीं जानता.

इस वर्ष अमेरिका द्वारा लड़े गए ईरान युद्ध के दौरान मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर लगातार हमले हुए, जिसने दक्षिण कोरिया के लोगों को गहरा झटका दिया क्योंकि पूरे दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं.

अमेरिका ईरान युद्ध के अपने मनचाहे परिणाम न मिलने के बावजूद जनवादी कोरिया कोरिया-चीन-रूस को उकसा रहा है और युद्ध की संभावना की बात कर रहा है.

यदि कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास युद्ध छिड़ जाए और अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला हो, जिससे एन्थ्रेक्स जैसे जैव-रासायनिक पदार्थ बाहर निकल जाएँ, तो क्या होगा?

यह स्पष्ट है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला होने के बाद “घटना के बाद सुधार” करने से नुकसान को रोका नहीं जा सकता.

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