दक्षिण कोरिया के प्रति रुख
जनवादी
कोरिया ने 19–25 फरवरी के
बीच आयोजित कोरिया की वर्कर्स पार्टी की 9वीं कांग्रेस में प्रस्तुत कार्य-सार
रिपोर्ट के माध्यम से दक्षिण कोरिया के प्रति अपने रुख की फिर से पुष्टि की.
ली जे म्यंग
सरकार के सत्ता में आने के बाद भी जमे हुए जनवादी कोरिया -दक्षिण कोरिया संबंधों में इस वर्ष कुछ
सकारात्मक संकेत दिखाई देंगे—ऐसी उम्मीद करने वालों की भविष्यवाणी इस बार भी गलत
साबित हुई.
परिणामस्वरूप,
जनवादी कोरिया की
दक्षिण-कोरिया नीति में बिल्कुल भी परिवर्तन नहीं हुआ.
सत्ता बदल गई, लेकिन जनवादी कोरिया ने फिर से जोर देकर कहा कि उसने पहले ही “दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों को सबसे शत्रुतापूर्ण राज्य-से-राज्य संबंध के रूप में स्थापित करने का अंतिम और महत्वपूर्ण निर्णय” ले लिया है.
जनवादी
कोरिया ने कहा कि “इस वर्ष की शुरुआत में
भी दक्षिण कोरिया ने हमारे गणराज्य (जनवादी कोरिया) के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ
जैसी गंभीर कार्रवाई करके यह स्पष्ट कर दिया कि वह भरोसेमंद और सह-अस्तित्व वाला
पड़ोसी नहीं है.”
यहाँ ड्रोन
घुसपैठ की घटना का फिर से उल्लेख किया गया.
बेशक दक्षिण
कोरियाई सरकार ने कहा कि यह घटना सरकार के स्तर पर नहीं बल्कि एक व्यक्ति का अपराध
था.
एकीकरण मंत्री छंग दोंग
यंग ने सीधे खेद व्यक्त किया और राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने मार्च 1 आंदोलन दिवस के भाषण में
कहा कि“यह कभी नहीं
होना चाहिए था” और“इसे किसी भी
बहाने से सही नहीं ठहराया जा सकता.”
लेकिन आरोपी
ओ नामक व्यक्ति का राष्ट्रीय खुफिया सेवा और सैन्य खुफिया एजेंसी से संबंध सामने
आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या यह सचमुच किसी व्यक्ति का अकेला अपराध था.
इसके अलावा,
ड्रोन घुसपैठ की जानकारी
अमेरिकी सेना को भी अवश्य रही होगी, और दक्षिण कोरियाई सेना के ऑपरेशन नियंत्रण से जुड़े
मूलभूत सीमाओं के कारण पुनरावृत्ति रोकने का आश्वासन भी जनवादी कोरिया को भरोसा
नहीं दे सकता.
दक्षिण
कोरिया हमेशा हमारे पतन की कोशिश करता रहा
जनवादी
कोरिया का दावा है कि “दक्षिण कोरिया की पिछली सभी सत्ताधारी
शक्तियों ने हमारे साथ वास्तविक मेल-मिलाप और एकता की इच्छा नहीं की, बल्कि उन्होंने चालाकी
से मेल-मिलाप और सहयोग के अवसरों का उपयोग करके हमारी समाज में अपनी संस्कृति
फैलाने और इसके माध्यम से हमारे परिवर्तन तथा अंततः हमारे तंत्र के पतन की साजिश
रची.”
यह दावा
केवल पीपुल्स पावर पार्टी की सरकारों पर ही नहीं बल्कि डेमोक्रेटिक पार्टी की
सरकारों पर भी लागू किया गया.
हालाँकि
डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकारों ने सार्वजनिक रूप से कभी “अवशोषण द्वारा एकीकरण” या
“जनवादी कोरिया का पतन” की बात नहीं कही.
लेकिन
वास्तविक नीतियों या व्यवहारों को देखें तो उन्हें जनवादी कोरिया के पतन की दिशा
में जाने वाला माना जा सकता है.
उदाहरण के
लिए, डेमोक्रेटिक
पार्टी संसद में बहुमत होने के बावजूद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, जो जनवादी कोरिया को
“विरोधी राज्य संगठन” घोषित करता है, उसे समाप्त नहीं कर रही.
आज भी इस
कानून को समाप्त करने का विधेयक संसद में प्रस्तुत है, लेकिन सरकार और सत्तारूढ़ दल उस पर चर्चा भी
नहीं कर रहे.
इसके अलावा 2
मार्च को ली जे म्यंग सरकार ने अभिनेता म्यंग ग्ये नाम को “इबुक-5-दो समिति” के अंतर्गत ह्वांगहे
प्रांत के गवर्नर के रूप में नियुक्त किया.
संविधान के
अनुसार जनवादी कोरिया का क्षेत्र भी दक्षिण कोरिया का क्षेत्र माना जाता है,
इसलिए वहाँ के लिए भी
स्थानीय प्रशासन प्रमुख नियुक्त किए जाते हैं—यह एक अजीब परंपरा है जो जारी है.
पहले की
सरकारें इसे औपचारिक संस्था मानकर कम प्रसिद्ध व्यक्तियों को नियुक्त करती थीं,
लेकिन ली जे म्यंग सरकार
ने एक प्रसिद्ध व्यक्ति को नियुक्त कर इसे सुर्ख़ियों में ला दिया.
जनवादी
कोरिया की दृष्टि से यह भी संकेत हो सकता है कि ली जे म्यंग सरकार भी अवशोषण
द्वारा एकीकरण या जनवादी कोरिया के पतन की उम्मीद रखती है.
इसी कारण जनवादी
कोरिया ने कहा कि “दक्षिण कोरिया की
वर्तमान सरकार का बाहरी तौर पर दिखाया गया नरम रुख एक अपरिपक्व धोखाधड़ी और घटिया
नाटक है.”
जनवादी
कोरिया पर आक्रमण की आशंका
जनवादी
कोरिया ने कहा कि उसकी दक्षिण कोरिया नीति
“अस्थायी सामरिक उपाय
नहीं बल्कि राष्ट्रीय हित और सम्मान की रक्षा तथा राज्य और जनता की वर्तमान और
भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक विकल्प है.”
इसके तहत जनवादी
कोरिया ने
- संवाद और सहयोग के
लिए बने संस्थानों को समाप्त किया
- संबंधित कानून और
समझौते रद्द किए
- दक्षिणी सीमा
क्षेत्र के सभी संपर्क मार्गों को पूरी तरह बंद करने के उपाय किए
- और सीमा क्षेत्रों
को सैन्य किलेबंदी में बदलने की प्रक्रिया शुरू की.
जनवादी
कोरिया-दक्षिण कोरिया के बीच रेलवे और सड़कों को बंद करना तथा सैन्य विभाजन रेखा
के आसपास किलेबंदी करना इस बात का संकेत है कि जनवादी कोरिया
दक्षिण से
आक्रमण की संभावना मानकर तैयारी कर रहा है.
दक्षिण
कोरिया में कुछ लोग इसे “अतिरंजित प्रतिक्रिया” कहते हैं, लेकिन 13 जनवरी 2025 को MBC रेडियो कार्यक्रम में पूर्व सांसद किम जोंग दे द्वारा दिए
गए खुलासे के अनुसार इसे केवल अतिरंजना नहीं कहा जा सकता.
उसके अनुसार
15 नवंबर 2023
को राष्ट्रपति कार्यालय
के निर्देश पर संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ ने पश्चिमी मोर्चे पर जनवादी कोरिया की
4वीं सेना को निशाना
बनाने की योजना बनाई थी.
इस योजना का
उद्देश्य था जनवादी कोरिया की सैन्य सुविधाओं, संचार इकाइयों और बैरकों को नष्ट कर देना
ताकि वह कई वर्षों तक किसी उकसावे की कल्पना भी न कर सके.
एकतरफा
स्थिति बदलने की कोशिश बंद करो
जनवादी कोरिया ने चेतावनी दी:“जब तक दक्षिण कोरिया हमारे साथ सीमा साझा करता है, सुरक्षित रहने का उसका एकमात्र रास्ता यह है कि वह हमें छेड़ना बंद कर दे.”
साथ ही उसने
कहा कि चाहे दक्षिण कोरिया किसी के साथ भी गठबंधन करे या अपना रक्षा बजट कितना भी
बढ़ाए, परमाणु
शक्ति द्वारा निर्मित कोरियाई प्रायद्वीप की रणनीतिक स्थिति नहीं बदलेगी.
जनवादी कोरिया के अनुसार दक्षिण कोरिया को यह “असंभव भ्रम” छोड़ देना चाहिए कि वह शक्ति के बल पर किसी को दबा सकता है.
दक्षिण
कोरिया का पूर्ण पतन संभव
जनवादी
कोरिया ने कहा कि अब जब दक्षिण कोरिया को लेकर उसकी सभी पूर्व धारणाएँ समाप्त हो
चुकी हैं, तो उसकी
सैन्य प्रतिक्रिया की नीति मूल रूप से बदल गई है.
पहले जनवादी
कोरिया दक्षिण कोरिया को “एक ही जाति” मानकर सैन्य प्रतिक्रिया में संयम रखता था,
लेकिन अब उसे सिर्फ शत्रु
राष्ट्र माना जाएगा.
इसका अर्थ
यह भी हो सकता है कि परमाणु हथियारों का प्रथम उपयोग भी संभव है.
जनवादी कोरिया ने चेतावनी दी:“यदि परमाणु शक्ति के दरवाजे पर दक्षिण कोरिया की हल्की और गैर-जिम्मेदाराना हरकतें हमारी सुरक्षा के लिए खतरा मानी गईं, तो हम किसी भी कार्रवाई की शुरुआत कर सकते हैं.उस कार्रवाई के परिणामस्वरूप दक्षिण कोरिया के पूर्ण पतन की संभावना को नकारा नहीं जा सकता.”
यहाँ “पूर्ण
पतन” का मतलब केवल सरकार का पतन नहीं बल्कि पूरे राज्य-तंत्र का पतन माना जा
सकता है.
एक संभावित
नया कारक: जनवादी कोरिया -अमेरिका संवाद
यदि किसी
स्थिति में अमेरिका जनवादी कोरिया के प्रति अपनी शत्रु नीति समाप्त कर दे, तो अमेरिका-जनवादी
कोरिया वार्ता की संभावना खुल सकती है.
यदि ऐसा हुआ
और जनवादी कोरिया अमेरिका से सीधे बातचीत करते हुए दक्षिण कोरिया को बाहर रखने की
मांग करे, तो अमेरिका
दक्षिण कोरिया की अनदेखी कर सकता है.
ऐसी स्थिति
में अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन पर निर्भर दक्षिण कोरिया गहरे संकट में पड़ सकता
है.
यह स्थिति
अतीत में कही जाने वाली “ 통미봉남”(अमेरिका से संवाद, दक्षिण कोरिया की उपेक्षा) नीति से भी
आगे जा सकती है.
क्योंकि यदि
अमेरिका-जनवादी कोरिया संबंध सामान्य होते हैं तो यह शांति संधि और राजनयिक
संबंधों तक भी पहुँच सकता है, जिससे पूर्वी एशिया की शक्ति-व्यवस्था में
बड़ा बदलाव आ सकता है.
यह 1979
में अमेरिका-चीन संबंध
सामान्य होने जैसी घटना हो सकती है, जब ताइवान एक झटके में “राज्य” से “गैर-राज्य” की स्थिति
में चला गया था.
हालाँकि आज जनवादी कोरिया और दक्षिण कोरिया दोनों संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं, इसलिए स्थिति बिल्कुल वैसी नहीं होगी.
लेकिन अमेरिका द्वारा अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन समाप्त करना और अमेरिकी सेना को वापस बुलाना असंभव नहीं है.
अमेरिका पहले भी आपत्ति के बावजूद THAAD मिसाइल प्रणाली को चुपचाप हटा चुका है.
इसलिए यह भी
संभव है कि अमेरिका भविष्य में अफगानिस्तान जैसी अचानक वापसी जैसी स्थिति
पैदा कर दे.

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