आखिर जनवादी कोरिया केवल दक्षिण कोरिया के लिए ही कोई गुंजाइश क्यों नहीं छोड़ता?

 


कोरियाई वर्कर्स पार्टी की केंद्रीय समिति के सामान्य मामलों के विभाग की प्रमुख कॉमरेड किम य जंग, ने 20 अगस्त 2026 को एक वक्तव्य जारी कर दक्षिण कोरियाई कटपुतली ली जे म्यंग सरकार की कड़ी आलोचना की. एक दिन पहले जहाँ उन्होंने अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यासउल्ची फ्रीडम शील्ड’ में कमी सहित समग्र अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर अपना रुख व्यक्त किया था, वहीं इस दिन उन्होंने केवल ली जे म्यंग सरकार को निशाना बनाते हुए कहा:

इस अवसर पर यह विचार आता है कि क्यों न वे पूरी तरह से अपनी अधीनस्थ स्थिति को ठीक से समझें और अपने अस्तित्व का उत्तर तलाशें. अब समय आ गया है कि ‘कठपुतली’ की उस नियति को, जिसमें जाने के लिए कोई जगह नहीं और आने के लिए कोई जगह नहीं, वे स्वयं समझें.”

इस तरह, उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास में कमी को अवसर बनाकर अंतर-कोरियाई संवाद की संभावना पैदा करने की कोशिश कर रही ली जे म्यंग सरकार के लिए जनवादी कोरिया ने वास्तव में रत्ती भर भी जगह नहीं छोड़ी.

अमेरिका के लिए गुंजाइश छोड़ता जनवादी कोरिया

लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए जनवादी कोरिया के पास एक गुंजाइश है.

सबसे पहले, कॉमरेड किम य जंग ने 19 तारीख को जारी अपने वक्तव्य में कहा, “जहाँ तक अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यास में कमी की बात है, हम समझते हैं कि उस पर टिप्पणी करने का भी कोई मूल्य नहीं है और हमें इसमें बिल्कुल भी रुचि नहीं है.” अभ्यास के दौरान 20 तारीख को जनवादी कोरिया ने पूर्वी सागर की ओर लगभग 10 ऐसी प्रक्षेपण वस्तुएँ भी दागीं, जिन्हें कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल माना गया.

लेकिन कॉमरेड किम य जंग ने यह गुंजाइश छोड़ी:

हमारे राष्ट्राध्यक्ष (राज्य मामलों के आयोग के अध्यक्ष कॉमरेड किम जंग उन ) के ट्रंप के प्रति व्यक्तिगत रूप से अच्छी यादें और भावनाएँ हैं, यह बात वे पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुके हैं. दोनों नेताओं के संबंध अभी भी अच्छे हैं.”



हालाँकि उन्होंने इसके साथ एक शर्त भी जोड़ी:

फिर भी, अमेरिका की हमारे देश के प्रति शत्रुतापूर्ण नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और अमेरिका तथा उसके अनुयायी आज इस क्षण भी हमारे देश के खिलाफ शत्रुतापूर्ण सैन्य गतिविधियाँ जोर-शोर से चला रहे हैं. इसी प्रकार, अमेरिका और जनवादी कोरिया के दोनों देशों के नेताओं के बीच अच्छे संबंधों से अलग, अपने देश की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाली ताकतों को नियंत्रित करने के लिए हमारे द्वारा किए जाने वाले संप्रभु कार्य अत्यंत सामान्य, सटीक और आवश्यक हैं—यह याद रखना चाहिए.”

कॉमरेड किम य जंग की स्थिति को इस रूप में समझा जा सकता है कि समस्या अमेरिका की जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण नीति है और यदि इसे समाप्त किया जाता है तो जनवादी कोरिया -अमेरिका शिखर सम्मेलन असंभव नहीं होगा.

इस प्रकार, जनवादी कोरिया ली जे म्यंग के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ रहा है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के लिए रास्ता खुला रख रहा है.

तो फिर जनवादी कोरिया अमेरिका से वास्तव में क्या चाहता है? इतना तो स्पष्ट है कि केवल अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यास में कमी पर्याप्त नहीं है.

पिछले फरवरी में आयोजित कोरियाई वर्कर्स पार्टी की 9वीं कांग्रेस में राज्य मामलों के आयोग के अध्यक्ष कॉमरेड किम जंग उन  ने कहा था:

यदि अमेरिका कोरियाई लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्य [जनवादी कोरिया ] के संविधान में निर्धारित हमारे देश की वर्तमान स्थिति का सम्मान करता है और हमारे देश के प्रति शत्रुतापूर्ण नीति को वापस लेता है, तो हमारे पास भी अमेरिका के साथ अच्छे संबंध न रखने का कोई कारण नहीं है.”

इसके माध्यम से जनवादी कोरिया की माँगों को दो बिंदुओं में संक्षेपित किया जा सकता है.

पहला है जनवादी कोरिया के प्रति शत्रुतापूर्ण नीति को समाप्त करना. जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण नीति में अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसे जनवादी कोरिया को लक्षित सैन्य कदम भी शामिल हैं और जनवादी कोरिया पर लगाए गए प्रतिबंध जैसे आर्थिक दबाव भी.

दूसरा है जनवादी कोरिया के संविधान में निर्धारित उसकी राष्ट्रीय स्थिति का सम्मान करना. इसका अर्थ है परमाणु निरस्त्रीकरण की माँग बंद करना और एक ‘रणनीतिक राज्य’ के रूप में जनवादी कोरियाके प्रभाव को स्वीकार करना.

19 तारीख को दक्षिण कोरिया आए चीन के विदेश मंत्री कॉमरेड वांग यी से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह जनवादी कोरिया -अमेरिका शिखर सम्मेलन की मध्यस्थता करेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया:अमेरिका को लंबे समय से चली आ रही अपनी जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण नीति को बदलना चाहिए.”अर्थात जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण नीति को समाप्त करना सभी बदलावों की पहली सीढ़ी है.

अमेरिका भी शायद अच्छी तरह जानता है कि जनवादी कोरिया की माँगें क्या हैं. इसलिए इस बार राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यास में कमी की. उसने यह भी स्वीकार किया कि जनवादी कोरिया के पास 57 परमाणु हथियार हैं और जब पत्रकार ने पूछा कि “क्या अभी भी जनवादी कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण लक्ष्य है?”, तो उसने कहा, “मैं उस बारे में बात नहीं करना चाहता.” इस तरह उन्होंने ‘परमाणु निरस्त्रीकरण’ शब्द तक नहीं निकाला. इससे पहले वो यह भी कह चुका है  कि परमाणु हथियार रखने वाले देशों के साथ अच्छे संबंध रखना चाहिए. जनवादी कोरिया की माँगों के करीब जाने का उसका प्रयास स्पष्ट दिखाई देता है. अमेरिका के भीतर भी ऐसी आवाजें उठ रही हैं कि  ट्रंप जनवादी कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के संबंध में अस्पष्ट रुख अपना रहा है  और इसे लेकर ‘चिंता’ है.

दूसरी ओर, अमेरिकी Wall Street Journal ने 18 तारीख को अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए रिपोर्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने सलाहकारों पर दबाव डाल रहा है कि वे जल्द से जल्द इस शरद ऋतु में जनवादी कोरिया -अमेरिका शिखर सम्मेलन आयोजित कराने का रास्ता तलाशें. कई मीडिया संस्थानों का अनुमान है कि नवंबर में चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के अवसर पर जनवादी कोरिया -अमेरिका शिखर सम्मेलन कराने की कोशिश की जाएगी. नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव भी होने हैं, इसलिए  ट्रंप भी उससे पहले शिखर सम्मेलन कराने के लिए जल्दबाजी करेगा .

कठपुतली दक्षिण कोरिया को आखिर क्या करना चाहिए?

जनवादी कोरिया अमेरिका के विपरीत दक्षिण कोरिया की ओर कोई गुंजाइश नहीं छोड़ रहा है. क्यों? ली जे म्यंग को आखिर क्या और कैसे करना चाहिए ताकि अंतर-कोरियाई शिखर सम्मेलन हो सके?

उदाहरण के लिए,  ली ने इस बार स्वतंत्रता दिवस के भाषण में निम्नलिखित दो घोषणाएँ की होतीं तो कैसा होता?

पहला, जनवादी कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण की नीति को समाप्त करने की घोषणा.

ली ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में कहा था कि वे “जनवादी कोरियाई शासन का सम्मान” करेंगे. यदि जनवादी कोरियाई शासन का सम्मान करना है तो जनवादी कोरिया के संविधान को स्वीकार करना होगा. और जनवादी कोरिया ने अपने संविधान में परमाणु हथियार रखने की स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्ज किया है. इसलिए यदि जनवादी कोरियाई व्यवस्था का सम्मान करना है, तो जनवादी कोरिया के परमाणु हथियार रखने को भी स्वीकार करना होगा.

देश और विदेश में पहले से ही यह आकलन काफी लोकप्रिय हो रहा है कि जनवादी कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण अब पुरानी पड़ चुकी माँग है, इसे वैसे भी लागू नहीं किया जा सकता और व्यावहारिक रूप से असंभव परमाणु निरस्त्रीकरण की माँग पर जोर देने के कारण अन्य सभी नीतियाँ बेकार हो रही हैं. यहाँ तक कि ट्रंप भी यह कहने की स्थिति में है कि जनवादी कोरियाके पास 57 परमाणु हथियार हैं और वह परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे में बात नहीं करना चाहता .

लेकिन दक्षिण कोरिया में जनवादी कोरियाकी परमाणु निरस्त्रीकरण नीति में संशोधन तो दूर, इस तथ्य को भी स्वीकार नहीं किया जा रहा कि जनवादी कोरिया के पास परमाणु हथियार हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को लेकर कठपुतली दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक ने 20 तारीख को कठपुतली संसद की रक्षा समिति की पूर्ण बैठक में जनवादी कोरिया के परमाणु हथियारों की संख्या को “आमतौर पर लगभग 80 से 120” बताते हुए सुधार किया, लेकिन साथ ही कहा कि “जनवादी कोरियाके परमाणु हथियार रखने की स्थिति को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता.” यह एक विरोधाभासी बयान है. शायद उसे स्वयं भी इस विरोधाभास का एहसास हुआ, इसलिए उसने आगे कहा, “इसे हमारी मानसिकता और रणनीतिक स्थिति कहा जा सकता है.”

क्या इसका अर्थ यह है कि जनवादी कोरिया का परमाणु-हथियार संपन्न देश होना एक तथ्य है, लेकिन दक्षिण कोरिया की नजर में जनवादी कोरिया परमाणु हथियार-विहीन देश है? ऐसी असामान्य स्थिति में अंतर-कोरियाई समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता.

यदि ली जे म्यंग साहसपूर्वक और अभूतपूर्व रूप से यह घोषणा कर दे किअब से हम जनवादी कोरियासे परमाणु निरस्त्रीकरण की माँग नहीं करेंगे,” तो जनवादी कोरिया दक्षिण कोरिया को वर्तमान से अलग नजरिए से देखेगा.

दूसरा, अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास को रोकने की घोषणा.

हर देश अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए सैन्य अभ्यास करता है. लेकिन गौर करने पर पता चलता है कि जनवादी कोरिया स्वतंत्र रूप से सैन्य अभ्यास करता है और संयुक्त सैन्य अभ्यास नहीं करता. जबकि वह रूस और चीन के साथ स्पष्ट रूप से सैन्य गठबंधन संबंध रखता है.

स्थिति को उलटकर देखें. यदि जनवादी कोरिया रूस और चीन के साथ ऐसा संयुक्त सैन्य अभ्यास करता जिसमें दक्षिण कोरिया को शत्रु माना जाता, तो वह इसे बिल्कुल स्वीकार नहीं कर सकता.

तो क्या दक्षिण कोरिया स्वतंत्र निर्णय लेते हुए  (जो वह ले भी नहीं सकता ) अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए सैन्य अभ्यास जारी रखते हुए, जनवादी कोरिया को शत्रु मानने वाले अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यास और अमेरिका-दक्षिण कोरिया -जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास को रोक नहीं सकता?(ख्याली पुलाव).

इस बार भी अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यास में कमी करते हुए केवल अवधि कम नहीं की गई, बल्कि कुछ बाहरी गतिशील सैन्य अभ्यास दोनों देशों ने अलग-अलग किए. एक सैन्य अधिकारी ने कहा, “अमेरिकी पक्ष ने अलग से करने की इच्छा व्यक्त की है. इस बात पर चर्चा चल रही है कि कौन-से अभ्यास अलग-अलग किए जाएंगे.”

तो आगे यह भी कहा जा सकता है कि संयुक्त सैन्य अभ्यास नहीं करेंगे और दक्षिण कोरियाई सेना अकेले अभ्यास करेगी(?).

यदि  ली ने कहा होता, “आगे से अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यास नहीं किया जाएगा. इस बार का उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास भी दक्षिण कोरियाई सेना अलग से करेगी,” तो संभवतः जनवादी कोरिया की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक होती.

पर जाहिर है अमेरिकी गुलाम दक्षिण कोरिया ऐसा कर ही नहीं सकता

यदि ली जे म्यंग ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में उपर्युक्त घोषणाएँ की होतीं तो अमेरिका की प्रतिक्रिया कैसी होती? क्या अमेरिका इसे दक्षिण कोरिया द्वारा नया रास्ता, नई नीति और नया निर्णय लेने के रूप में देखता?

नहीं. वह गाली-गलौज करते हुए हंगामा खड़ा कर देता कि “क्या यह पागलपन है?” वह टैरिफ बम गिराता, उसकी क्रेडिट रेटिंग घटाता, शेयर बेचता और विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाता.

यदि अमेरिका इस तरह पूरी ताकत से हमला करता है तो परजीवी दक्षिण कोरिया को घातक चोट लगती. Samsung Electronics और SK Hynix के शेयरों में भारी गिरावट आती. केवल शेयरों में गिरावट नहीं होती, बल्कि यदि सेमीकंडक्टर आदि पर भारी टैरिफ लगा दिया जाता तो बिक्री तेजी से गिरती और कंपनियाँ स्वयं संकट में पड़ जातीं. यदि दोनों कंपनियाँ खत्म हो जाएँ तो दक्षिण कोरिया भी खत्म हो जाएगा. दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार को नियंत्रित करने वाली इन दो कंपनियों के शेयरों में गिरावट पूरे शेयर बाजार के पतन में बदल जाएगी. यही तथाकथित “आर्थिक सुपरपावर” दक्षिण कोरिया की असलियत है .

यदि अमेरिकी पूँजी ज्वार के उतरने की तरह बाहर निकलने लगे तो विनिमय दर भी तेजी से बढ़ेगी. अभी 1 डॉलर के मुकाबले 1,500 वॉन के स्तर से मुश्किल से 1,300 वॉन के स्तर तक नीचे आई है, लेकिन यह सीधे 2,000 या 3,000 वॉन तक पहुँच सकती है. तब आयातित वस्तुओं की कीमतें आसमान छू जाएँगी. पेट्रोल की कीमत भी तेजी से बढ़कर प्रति लीटर 2,000 वॉन से 3,000–4,000 वॉन तक पहुँच सकती है. शहर की गैस की कीमत भी बढ़ेगी और सर्दियों में भारी हीटिंग बिल आएगा तथा अपार्टमेंट के प्रबंधन शुल्क भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच जाएँगे. रेस्तराँ की लागत बढ़ेगी और ग्राहक घटेंगे, जिससे बड़ी संख्या में कारोबार बंद होने लगेंगे.

धुर दक्षिणपंथी पीपुल पावर पार्टी यह कहते हुए हंगामा करेगी कि उसे अवसर मिल गया है. वह कहेगी कि यह सब राष्ट्रपति की गलती है और महाभियोग की माँग करेगी.

जनमत कैसा होगा? लोग राष्ट्रपति ली जे म्यंग  का समर्थन नहीं करेंगे और तुरंत नई जनवादी कोरिया नीति वापस लेने की माँग करेंगे. ऐसा जनमत बनेगा कि जब लोगों की आजीविका तुरंत तबाह हो रही है तब सरकार ने कोई उपाय किए बिना केवल सिद्धांतों को आगे रखकर अविवेकपूर्ण जनवादी कोरिया नीति अपनाई. यदि इसके बावजूद सरकार जनवादी कोरिया नीति को आगे बढ़ाती रही तो राष्ट्रपति को सत्ता से हटाने के लिए विद्रोह हो सकता है. पार्क चुंग-ही की तरह सरकार या सेना भी पहले कार्रवाई कर सकती है.

चूँकि ऐसी स्थिति पहले से स्पष्ट रूप से अनुमानित है, राष्ट्रपति ली ऐसा अभूतपूर्व और साहसिक निर्णय बिल्कुल नहीं ले सकता . पता नहीं वे इसके बारे में सोचता है  या नहीं. लेकिन सोचता  हो या न सोचता  हो, वह निर्णय नहीं ले पाएगा. यही उस दक्षिण कोरिया की वास्तविकता है जो आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के बजाय बाहरी निर्भरता वाली परजीवी अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हुआ है.

यदि अमेरिका पहले कदम उठाए तो स्थिति अलग होगी

यदि अमेरिका स्वयं पहले जनवादी कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण की माँग छोड़ दे, अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यास पूरी तरह बंद कर दे और जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण नीति भी समाप्त कर दे, तो क्या होगा?

तब जनवादी कोरिया द्वारा निर्धारित शर्तें पूरी हो जाएँगी, इसलिए जनवादी कोरिया -अमेरिका संवाद शुरू होगा. जनवादी कोरिया -अमेरिका राजनयिक संबंध भी स्थापित हो सकते हैं, आदान-प्रदान और आवागमन शुरू हो सकते हैं.

तब ऊपर कही गई दोनों घोषणाएँ अपने आप लागू हो चुकी मानी जाएँगी. चूँकि अमेरिका-दक्षिण कोरिया  संयुक्त सैन्य अभ्यास अमेरिका ने रोक दिया, इसलिए हमें अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं होगी. और चूँकि परमाणु निरस्त्रीकरण की माँग अमेरिका ने पहले ही छोड़ दी, इसलिए दक्षिण कोरिया  भी अकेले उस पर अड़े नहीं रह सकता और अनिच्छा से ही सही, उसे वापस ले सकता है .

ऐसी स्थिति में यदि अमेरिका विरोध करे तो क्या होगा? जैसा ऊपर कहा गया, टैरिफ बम सहित विभिन्न आर्थिक दबाव डाले जाने से दक्षिण कोरियाई परजीवी अर्थव्यवस्था संकट में आ जाएगी.

लेकिन एक बदली हुई परिस्थिति होगी. अमेरिका स्वयं यह सब कर रहा हो और केवल दक्षिण कोरिया को ऐसा करने से रोक रहा हो, तो यह किसी की भी नजर में तार्किक नहीं लगेगा.

जब चीन के विदेश मंत्री कॉमरेड वांग यी दक्षिण कोरिया आए, तो कठपुतली दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून ने कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण और शांति की प्राप्ति के लिए अपनी सरकार के प्रयासों को समझाते हुए जनवादी कोरिया की शीघ्र संवाद में वापसी के लिए चीन की रचनात्मक भूमिका का अनुरोध किया. दूसरे शब्दों में, उन्होंने कहा, “हम इतनी मेहनत कर रहे हैं, इसलिए आप अंतर-कोरियाई संवाद के लिए पुल बना दीजिए.”

लेकिन कॉमरेड वांग यी ने केवल सैद्धांतिक उत्तर दिया. इसके बाद उन्होंने अमेरिका से जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण नीति समाप्त करने का आग्रह किया. चीन की नजर से भी, जब तक अमेरिका की जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण नीति मौजूद है, दक्षिण कोरिया कुछ नहीं कर सकता.

अमेरिका को जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण नीति समाप्त करनी होगी, तभी अंतर-कोरियाई संबंध एक कदम भी आगे बढ़ सकते हैं. यह कड़वा और दुखद है, लेकिन दक्षिण कोरिया ऐसा ही देश है. यह वास्तविकता स्वीकार करनी होगी.

ली जे म्यंग सरकार वह काम भी नहीं करेगी जो वह कर सकती है

ऐसी स्थिति में, अमेरिका के पहले कदम उठाने से पहले क्या दक्षिण कोरिया कुछ कर सकता है ?

ली जे म्यंग सरकार के शुरुआती दौर में जनवादी कोरिया की ओर प्रसारित किए जाने वाले लाउडस्पीकर प्रसारण को बंद किया गया तो जनवादी कोरियाने भी दक्षिण कोरिया की ओर प्रसारण बंद कर दिया. किसी हद तक इसका प्रभाव दिखाई दिया. लेकिन अब इतना पर्याप्त नहीं है.

यदि  यह स्वीकार कर लिया जाए कि दक्षिण कोरिया अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को सहन नहीं कर सकता और देखा जाए कि दक्षिण कोरिया कम-से-कम क्या कर सकता है.

पहला, दक्षिण कोरियाई संविधान के अनुच्छेद 3 में क्षेत्रीय प्रावधान को बदलना.

वर्तमान संविधान पूरे कोरियाई प्रायद्वीप को दक्षिण कोरिया का क्षेत्र घोषित करता है. इसलिए संवैधानिक रूप से जनवादी कोरिया भी दक्षिण कोरिया का  क्षेत्र है.

यह न केवल वास्तविकता के साथ विरोधाभास है, बल्कि इसी कारण जनवादी कोरियासे  संबंधित सभी नीतियाँ उलझ जाती हैं. दक्षिण कोरियाई कठपुतली राष्ट्रपति चाहे कितनी भी बार यह वादा करे कि वे बलपूर्वक एकीकरण नहीं करेगा , उसका कोई अर्थ नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि संविधान में जबरन एकीकरण पहले से ही दर्ज है.

यदि कहा गया है कि जनवादी कोरियाई शासन का सम्मान किया जाएगा, तो जनवादी कोरिया की उपेक्षा करने वाले इस प्रावधान को समाप्त करना चाहिए.

दूसरा, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में बदलाव.

यदि तत्काल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को समाप्त करना कठिन है तो कम-से-कम कुख्यात अनुच्छेद 7 (प्रशंसा और प्रोत्साहन आदि) को समाप्त किया जा सकता है.

नहीं, यदि उसे तत्काल समाप्त करना भी कठिन है, तो कम-से-कम पहले इसकी घोषणा करके प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.

इस प्रकार अपनी क्षमता की सीमा के भीतर इच्छा-शक्ति दिखाने के बाद यदि हम जनवादी कोरियासे मिलने का प्रस्ताव रखें, तो क्या जनवादी कोरिया सकारात्मक मूल्यांकन या प्रतिक्रिया नहीं देगा?

ऐसा होने पर पीपुल पावर पार्टी और चोसन इल्बो-चुंगआंग इल्बो- दोंगा इल्बो जैसे दक्षिण कोरियाई रूढ़िवादी मीडिया में हंगामा मचेगा. जनता की राय कैसी होगी? शायद तत्काल विरोध करने वालों की संख्या अधिक होगी. वास्तव में, यदि राष्ट्रपति बहुत अच्छा काम भी करे तो समर्थन और विरोध का अनुपात शायद 4:6 होगा.

ऐसी स्थिति में क्या राष्ट्रपति ली दृढ़ता से इसे आगे बढ़ा पाएगा?

अब तक राष्ट्रपति ली के कदमों को देखकर ऐसा नहीं लगता. जब उसे लगता है कि कोई मामला शोरगुल पैदा करेगा तो वे उसे छूता तक नहीं. इसलिए अंतर-कोरियाई संबंधों को सुधारने के लिए  ली द्वारा वास्तविक कार्रवाई करने की संभावना 0 प्रतिशत है. राष्ट्रपति यह नहीं कर सकता. यही वर्तमान दक्षिण कोरिया की वास्तविकता है.

ली की डेमोक्रेटिक पार्टी भी ऐसी ही है. यदि उसे लगता है कि तत्काल चुनाव में वोट कम हो जाएँगे, तो वह पूरी तरह उससे दूरी बना लेती है. बल्कि जो सांसद अंत तक अपनी आवाज उठाते रहते हैं, उन्हें कट्टरपंथी बताकर अलग-थलग कर देगी.

पिछले स्वतंत्रता दिवस पर दक्षिण कोरियाई नागरिक संगठनो ने होनाम क्षेत्र में बनने वाले सेमीकंडक्टर कारखाने के सामने स्थित ग्वांगजू सैन्य हवाई अड्डे के सामने राष्ट्रव्यापी विशाल ‘मोमबत्ती मार्च’ आयोजित किया. इसका उद्देश्य होनाम सेमीकंडक्टर परियोजना में हस्तक्षेप करने वाले अमेरिकी सातवें वायुसेना के खिलाफ विरोध करना था.

तब ली जे म्यंग सरकार में प्रधानमंत्री रह चुके डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता किम मिन-सक (उस समय पार्टी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार) ने 11अगस्त  को X पर उस मोमबत्ती मार्च का पोस्टर साझा करते हुए लिखा:

होनाम सेमीकंडक्टर परियोजना की सफलता के लिए किसी को भी किसी भी प्रकार के राजनीतिक दृष्टिकोण से बचना चाहिए. होनाम की जनता की तीव्र आकांक्षा गंभीर है. मैं आग्रह करता हूँ कि इसे नागरिकों की नजर से देखें.”

उसने नागरिक संगठन के प्रदर्शन को ‘राजनीतिक दृष्टिकोण’ बताकर उसका विरोध किया. कुछ मीडिया संस्थानों ने इसकी व्याख्या इस रूप में की कि “किम ने कुछ नागरिक संगठनों द्वारा अमेरिका-विरोधी विवाद पैदा करने के उद्देश्य से आयोजित प्रदर्शन की योजना पर कड़ी चिंता व्यक्त की.”

इसके अलावा, उसी दिन के मोमबत्ती मार्च में डेमोक्रेटिक पार्टी के ग्वांगजू ग्वांगसान-उल निर्वाचन क्षेत्र के सांसद इम मून-यंग ने वीडियो संदेश भेजकर समर्थन किया. लेकिन एक दिन के भीतर उसने ‘माफी पत्र’ जैसा एक बयान जारी किया और कहा:

हम अपने महत्वपूर्ण सहयोगी अमेरिका के साथ संघर्ष पैदा करने वाली नागरिक आंदोलन की पद्धति के विरोध में हैं.”

और उसने अपना वीडियो बधाई संदेश वापस ले लिया.

यही डेमोक्रेटिक पार्टी का स्तर है और यही ली जे म्यंग सरकार का स्तर है. जब मोमबत्ती आंदोलन से जुड़े नागरिक अमेरिका की निंदा करते हैं तो वे डरकर विरोध करने लगते हैं. उन्हें डर है कि कहीं वे खुद ‘अमेरिका-विरोधी’ न दिखाई देने लगें.

सरकार द्वारा महत्वाकांक्षी ढंग से आगे बढ़ाई जा रही तीन प्रमुख मेगा-परियोजनाओं में से सबसे महत्वपूर्ण होनाम सेमीकंडक्टर क्लस्टर अमेरिकी हस्तक्षेप को रोकने के बिना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता.

अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने होनाम सेमीकंडक्टर परियोजना की खबर सुनकर खुले तौर पर कहा कि वे चाहते हैं कि Samsung Electronics और SK Hynix अमेरिका में उत्पादन सुविधाएँ बनाएँ.

अमेरिकी सातवीं वायुसेना ने कहा कि ग्वांगजू सैन्य हवाई अड्डा उसके लिए महत्वपूर्ण रूप से इस्तेमाल होने वाली सुविधा है और दक्षिण कोरिया को उसके साथ परामर्श करना चाहिए.

इतना ही नहीं. 18 तारीख के JoongAng Ilbo की रिपोर्ट “[एक्सक्लूसिव] अमेरिका: ‘अमेरिका में निवेश का पहला क्षेत्र—मेमोरी चाहिए’… होनाम निवेश की घोषणा के बाद दबाव” के अनुसार, 13 तारीख को आयोजित राष्ट्रपति कार्यालय की एक गोपनीय व्यापार बैठक में अमेरिका की मेमोरी सेमीकंडक्टर निवेश की माँग मुख्य मुद्दा बन गई.

सरकार अब तक ऊर्जा क्षेत्र को अमेरिका में निवेश की पहली परियोजना के रूप में देख रही थी, लेकिन अचानक अमेरिका द्वारा सेमीकंडक्टर निवेश की जोरदार माँग किए जाने से स्थिति कठिन हो गई. बैठक में यह राय सामने आई कि Samsung Electronics और SK Hynix पहले ही होनाम क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश का वादा कर चुके हैं, इसलिए अमेरिका में भी अतिरिक्त निवेश करना कठिन है. रिपोर्ट में कहा गया कि इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ पर्दे के पीछे तीखी बातचीत चल रही है.

एक अनाम सूत्र ने यह भी कहा:यह केवल एक-दो बार विरोध करके खत्म हुई बात नहीं है. दबाव अभी भी जारी है.”

इस प्रकार, अमेरिका स्पष्ट रूप से होनाम सेमीकंडक्टर परियोजना का विरोध और उसमें बाधा डाल रहा है, लेकिन ली जे म्यंग सरकार और डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिका को उकसाना नहीं चाहते और इस मुद्दे को दबाकर रख रहे हैं.

स्वतंत्रता-समर्थक ताकतों को दक्षिण कोरिया का नेतृत्व करना चाहिए

सरकार और डेमोक्रेटिक पार्टी का स्तर यही है. यह कठोर वास्तविकता है कि ली जे म्यंग सरकार का अमेरिका से मुक्त होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बनना असंभव है.

इसलिए यदि जनवादी कोरिया केवल अमेरिका के लिए गुंजाइश छोड़े और दक्षिण कोरिया की पूरी तरह उपेक्षा करे तो भी कुछ नहीं किया जा सकता. दुख हो तो भी इसे सहना होगा. दुखद है, लेकिन यही दक्षिण कोरिया का वास्तविकता है.

इसीलिए इंतजार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है कि अमेरिका जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण नीति समाप्त करे और जनवादी कोरिया -अमेरिका शिखर सम्मेलन के माध्यम से जनवादी कोरिया -अमेरिका राजनयिक संबंध स्थापित करे तथा कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति को पूरी तरह बदल दे.

जनवादी कोरिया -अमेरिका राजनयिक संबंध स्थापित हो जाने मात्र से कोरियाई प्रायद्वीप की समस्या पूरी तरह हल नहीं हो जाएगी.

1917 में रूस में क्रांति हुई और बाद में 1922 में सोवियत संघ का जन्म हुआ. अमेरिका ने राजनयिक संबंध स्थापित करने से इनकार किया, लेकिन अंततः 1933 में उसने राजनयिक संबंध स्थापित किए.

लेकिन अमेरिका ने सोवियत संघ के प्रति शत्रुतापूर्ण गतिविधियाँ जारी रखीं और उसकी व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए साजिशें भी चलाता रहा.

इसी प्रकार, केवल जनवादी कोरिया -अमेरिका राजनयिक संबंध स्थापित हो जाने से यह गारंटी नहीं है कि अमेरिका जनवादी कोरिया -विरोधी शत्रुतापूर्ण गतिविधियाँ छोड़ देगा या शासन परिवर्तन के लिए चलाए जा रहे अभियानों को रोक देगा.

विशेष रूप से यदि दक्षिण कोरिया में पीपुल पावर पार्टी सत्ता में आती है या पुरानी व्यवस्था की ताकतें लगातार प्रभावशाली बनी रहती हैं तो ऐसी गतिविधियाँ और भी गंभीर हो सकती हैं.

यहाँ तक कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी सत्ता में हो, लेकिन डेमोक्रेटिक सरकार अमेरिका की नजरों का ख्याल रखते हुए हर कदम के लिए अमेरिका की ‘मंजूरी’ लेने की कोशिश करे, तो उसके कार्यक्षेत्र की सीमा सीमित ही रहेगी.

अंततः, कोरियाई प्रायद्वीप में शांति, के लिए यही निष्कर्ष निकलता है कि स्वतंत्रता-समर्थक प्रगतिशील ताकतों को दक्षिण कोरियाई समाज का नेतृत्व करना चाहिए.

स्वतंत्रता-समर्थक प्रगतिशील ताकतों को अपनी शक्ति बढ़ानी चाहिए, सामाजिक परिवर्तन का नेतृत्व करने की तैयारी करनी चाहिए और दक्षिण कोरियाई समाज को अधिक स्वतंत्र बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए.


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