ईरान की स्थिति पर जनवादी कोरिया का बयान
ईरान पर इज़राइल के हमले के संबंध
में जनवादी कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का वक्तव्य
जनवादी कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रविवार 1 मार्च 2026 को निम्नलिखित प्रेस वक्तव्य जारी किया:
अमेरिका के सक्रिय समर्थन और संरक्षण
के तहत इज़राइल द्वारा ईरान पर किया गया सैन्य हमला तथा उसमें शामिल होकर अमेरिका
द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई, शुरू
से अंत तक अपनी प्रकृति में एक अवैध आक्रामक कृत्य और संप्रभुता के सबसे घृणित
उल्लंघन का रूप है.
ईरान के विरुद्ध लंबे समय से क्षेत्र
में जारी अमेरिकी सैन्य धमकी का वास्तविक सैन्य आक्रमण में परिणत होना पहले से ही
संभावित अनुमान के दायरे में था, और यह
अमेरिकी प्रभुत्ववादी तथा दुष्ट प्रवृत्ति का एक निश्चित तार्किक परिणाम है.
जनवादी कोरिया अमेरिका और इज़राइल के
उस निर्लज्ज दुष्कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करता है, जिसमें वे मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय कानून से ऊपर अपने घरेलू
कानून को रखते हैं और अपने स्वार्थी तथा प्रभुत्ववादी महत्वाकांक्षाओं को साकार
करने के लिए सैन्य शक्ति के दुरुपयोग में संकोच नहीं करते.
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा
देखे गए अमेरिकी प्रभुत्ववादी कृत्य वैश्विक शांति और स्थिरता को नष्ट करने में
उसकी विध्वंसकारी भूमिका और उसके गंभीर परिणामों का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं.
तानाशाही की मनमानी और एकतरफा
कार्रवाइयाँ, जिनका शक्तिशाली प्रतिरोध और समुचित
प्रतिक्रिया से सामना नहीं होता, न केवल
क्षेत्रीय स्थिति से सीधे जुड़े देशों को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करती हैं,
बल्कि यह भी चिंता उत्पन्न करती हैं कि उनका
राजनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक रूप से उस
क्षेत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिसका वर्तमान ईरानी स्थिति से कोई संबंध नहीं है.
विश्व एक बार फिर उस इतिहास को
रेखांकित करता है जिसमें अमेरिका ने दशकों पहले अपने प्रभुत्ववादी हितों के लिए
मध्य पूर्व में शांति को नष्ट किया, किंतु
अंततः भू-राजनीतिक विफलता और रणनीतिक पराजय का सामना किया.
अमेरिका और इज़राइल द्वारा किया गया
यह आक्रामक युद्ध, जिसे किसी भी आधार पर उचित नहीं
ठहराया जा सकता, किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य
नहीं हो सकता.
क्षेत्र के संबंधित और रुचि रखने
वाले पक्षों को चाहिए कि वे झूठी शांति के बहाने आक्रमण और युद्ध का विकल्प चुनने
वाले अपराधियों के वास्तविक स्वरूप को सही ढंग से समझें और मध्य पूर्व की
परिस्थिति को पुनः शांति और स्थिरता की दिशा में मोड़ने के लिए अपनी समुचित
जिम्मेदारी निभाएँ.
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