उकसावे की कारवाई
अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य
अभ्यास जनवादी कोरिया के प्रति स्पष्ट उकसावे की कार्रवाई है.
अमेरिका और दक्षिण कोरिया आगामी 9
से 19 मार्च
तक संयुक्त सैन्य अभ्यास “फ्रीडम शील्ड” आयोजित करने जा रहे हैं.
इसके परिणामस्वरूप कोरियाई
प्रायद्वीप में सैन्य तनाव बढ़ने की संभावना है और पहले से ही ठप पड़े संवाद की
संभावनाएँ और भी कमजोर हो जाएंगी.
“फ्रीडम शील्ड” सहित विभिन्न अमेरिका-दक्षिण
कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास स्पष्ट रूप से जनवादी कोरिया के खिलाफ उकसावे की
कार्रवाई हैं और अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया स्थिति बिगाड़ने की जिम्मेदारी से बच
नहीं सकते.
सैन्य अधिकारियों के इस दावे के
विपरीत कि यह एक रक्षात्मक अभ्यास है, अमेरिका-दक्षिण
कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास वास्तव में जनवादी कोरिया पर कब्जा करने के उद्देश्य
से आक्रामक अभ्यास हैं.
ये अभ्यास अमेरिका-दक्षिण कोरिया
संयुक्त कमान की ऑपरेशन योजना 5015 आदि के
अनुसार आयोजित किए जाते हैं, और इन
योजनाओं के सार्वजनिक हिस्सों को देखने मात्र से ही उनकी आक्रामक प्रकृति स्पष्ट
हो जाती है.
ऑपरेशन योजना 5015 के प्रारंभिक भाग में जनवादी कोरिया द्वारा
दक्षिण कोरिया पर हमले की परिकल्पना की गई है और उसे विफल करने की योजना शामिल है.इसी
कारण सैन्य अधिकारी इसे रक्षात्मक अभ्यास बताते हैं.
हालाँकि, इसके बाद के भाग में केवल जनवादी कोरियाई सेना को पीछे हटाने तक सीमित
न रहकर सैन्य सीमा रेखा के उत्तर में आगे बढ़कर जनवादी कोरिया पर कब्जा और शासन
स्थापित करने की योजना शामिल है. अर्थात इस अभ्यास का अंतिम उद्देश्य जनवादी
कोरिया पर कब्जा करना है.इसलिए यह स्पष्ट रूप से आक्रामक सैन्य अभ्यास है.
अतीत में अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन
अभ्यासों को दो भागों—पहला रक्षा और दूसरा आक्रमण—में आयोजित करते थे, लेकिन हाल के वर्षों में पहले भाग को हटाकर सीधे
दूसरे भाग से शुरू किया जा रहा है, जिससे
इसका आक्रामक स्वरूप और स्पष्ट हो गया है.
इसके अतिरिक्त इस ऑपरेशन योजना में जनवादी
कोरिया के हमले के बिना भी उस पर पूर्व-आक्रमण करने की योजना शामिल है.
विशेष रूप से इसमें तथाकथित “सिर
काटने की कार्रवाई” (नेतृत्व को निशाना बनाने वाला ऑपरेशन) भी शामिल है, जो हाल ही में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ
किए गए ऑपरेशन से मिलता-जुलता बताया जाता है.
2 फरवरी को अमेरिकी सेना की विशेष
अभियान इकाई और अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त डिवीजन ने दक्षिण कोरियाई सेना के
साथ दिन-रात संयुक्त हवाई हमला अभ्यास किया.
10 फरवरी को अमेरिकी युद्ध विभाग और
इंडो-पैसिफिक कमान द्वारा जारी सामग्री के अनुसार अमेरिका-दक्षिण कोरिया विशेष
बलों ने ऐसा अभ्यास किया जो वेनेजुएला के राष्ट्रपति दंपति के अपहरण जैसे ऑपरेशन
से मिलता-जुलता बताया गया.
ऐसा प्रतीत होता है कि जनवादी कोरिया
को उकसाने के लिए जानबूझकर इस सामग्री को सार्वजनिक किया गया.इस प्रकार अमेरिका-दक्षिण
कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास जनवादी कोरिया को उकसाने वाला स्पष्ट आक्रामक अभ्यास
है.
इसके अलावा जब भी ऐसे अभ्यास आयोजित
होते हैं, तो कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास
अमेरिकी परमाणु विमानवाहक पोत समूह, रणनीतिक
बमवर्षक और परमाणु पनडुब्बियाँ तैनात की जाती हैं, जो आमतौर पर अमेरिका द्वारा अन्य देशों पर हमले में अग्रिम पंक्ति के
हथियार माने जाते हैं.
पिछले वर्ष जून में जब अमेरिका ने
ईरान पर हमला किया था, तब भी B-2 रणनीतिक बमवर्षकों का उपयोग कर बंकर भेदी बम गिराए गए थे.
जब इस प्रकार के अभ्यास नियमित रूप
से किए जाते हैं और अमेरिकी सेना कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास तैनात होती है,
तो कभी भी युद्ध शुरू होने की संभावना बन जाती है.
इसी कारण जनवादी कोरिया अभ्यास शुरू होने से पहले ही उच्च स्तर की युद्ध तैयारी
में चला जाता है.
साथ ही अग्रिम मोर्चे पर वास्तविक
युद्ध जैसी परिस्थितियों में होने वाले फील्ड अभ्यासों से आकस्मिक टकराव की
संभावना भी बढ़ जाती है.
इसी वजह से जब भी अमेरिका-दक्षिण
कोरिया संयुक्त अभ्यास होते हैं, सैन्य
अधिकारी अग्रिम इकाइयों को निर्देश देते हैं कि “जनवादी कोरिया की उकसावे वाली
कार्रवाई की संभावना है, इसलिए
तत्काल प्रतिक्रिया देने की तैयारी बनाए रखें.”
अर्थात जनवादी कोरिया को उकसाने वाले
अभ्यास किए जाते हैं और यदि जनवादी कोरिया प्रतिक्रिया देता है तो उसे “उकसावे” के
रूप में परिभाषित कर हमला करने का आधार बनाया जाता है.
इस दृष्टि से देखा जाए तो यह दक्षिण
कोरिया की पूर्व सरकार द्वारा युद्ध को भड़काने के लिए जनवादी कोरिया में ड्रोन
भेजने और संयुक्त सैन्य अभ्यास करने जैसी कार्रवाइयों से अलग नहीं लगता.
इन अभ्यासों की उकसावे वाली प्रकृति
को विपरीत स्थिति की कल्पना करके और स्पष्ट समझा जा सकता है.
यदि जनवादी कोरिया, चीन और रूस की सेनाएँ जनवादी कोरिया में एकत्र
होकर दक्षिण कोरिया की कथित उकसावे की कार्रवाई की कल्पना करते हुए उस पर हमला और
कब्जा करने का वार्षिक बड़ा संयुक्त अभ्यास करें, तो क्या उसे केवल रक्षात्मक अभ्यास कहकर नजरअंदाज किया जा सकता है?
अमेरिका-दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य
अभ्यास केवल जनवादी कोरिया ही नहीं बल्कि चीन और रूस को भी उकसाने की प्रकृति रखते
हैं.
इन अभ्यासों में इस्तेमाल होने वाले
रणनीतिक हथियार जनवादी कोरिया के साथ-साथ चीन और रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्रों पर
भी हमला करने में सक्षम हैं.
इसी कारण जब भी अमेरिका-दक्षिण
कोरिया या अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान संयुक्त अभ्यास होते हैं अथवा अमेरिका
कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास रणनीतिक हथियार तैनात करता है, तो चीन और रूस भी रणनीतिक बमवर्षकों को उड़ाकर जवाबी प्रतिक्रिया देते
हैं.
ऐसे संयुक्त सैन्य अभ्यास जारी रहने
पर संवाद की संभावना कम होती जाएगी और केवल युद्ध का खतरा बढ़ेगा.

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