यूक्रेन में जनवादी कोरिया के सैनिक (?)-3

जनवादी कोरिया के खिलाफ झूठ बोलने का प्रचार युद्ध जारी है! 

कई पश्चिमी पत्रकार, राजनेता और तथाकथित विशेषज्ञ मतिभ्रम की दुनिया में जी रहे हैं, एक ऐसी दुनिया जिसमें डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की कोरियाई पीपुल्स आर्मी के काल्पनिक सैनिक यूक्रेन में पश्चिमी सभ्यता को खतरे में डाल रहे हैं! .


अभी ताजातरीन मामला यह है कि यूक्रेन ने दावा किया है कि उसने रुस के कुर्स्क से जनवादी कोरिया के दो सैनिक जिंदा गिरफ्तार किए हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर उन सैनिकों की तस्वीरें जारी की हैं.

 


 यूक्रेनी सुरक्षा ब्यूरो ने भी घोषणा की, "क्योंकि कैदी यूक्रेनी, अंग्रेजी या रूसी नहीं बोल सकते हैं, इसलिए हम एक कोरियाई दुभाषिया के माध्यम से जानने की कोशिश कर रहे हैं".

सुरक्षा ब्यूरो के अनुसार, एक का जन्म 1999 में हुआ था और वह 2016 से स्काउट स्नाइपर के रूप में सेवा कर रहा है, और दूसरा 2005 में पैदा हुआ था और 2021 से सैनिक सेवा में है.

हालाँकि, 1999 में जन्मे इस व्यक्ति के जबड़े में चोट लगी है और वह बोलने में असमर्थ है.

ज़ेलेंस्की ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सवालों के जवाब देते हुए इन दो सैनिकों का 2 मिनट और 55 सेकंड का वीडियो भी जारी किया.

 वीडियो में पूछताछ इस तरह से की गई जैसे कि एक यूक्रेनी अधिकारी ने एक प्रश्न पूछा, और दूसरे व्यक्ति ने इसका कोरियाई में अनुवाद किया और जनवादी कोरिया के के सैनिक से अनौपचारिक भाषा में प्रश्न पूछा.

पर इसमें कई झोल है. यह कुछ बातों से ही पता चल जाता है.

 सबसे पहले अगर हम ध्यान दें तो कोरियाई दुभाषिए के सवाल और उसके जबाब के बीच की आवाज उछलती है. और यह चीज वीडियो एडिट करते समय होती है. यह एक ऐसी चीज जिसमें पिछली आवाज के साथ संबंध तब अप्राकृतिक हो जाता है जब मूल आवाज को हटा दिया जाता है और उसके बाद आने वाली आवाज को फारवर्ड किया जाता है या कोई अलग आवाज डाली जाती है.

यह अजीब है कि पूछताछ प्रक्रिया के वीडियो का कोई भी हिस्सा एडिट नहीं किया गया था, लेकिन केवल ऑडियो एडिट किया गया.

दूसरे, इस वीडियो में कुछ ऐसे शब्द बोले गए हैं जिसे जनवादी कोरिया के नागरिक बोलते ही नहीं हैं. इसमें तथाकथित जनवादी कोरिया का सैनिक अपने साथियों के लिए " सहकर्मी (동료)" शब्द बोला है जबकि वहाँ सहकर्मी के लिए "काॅमरेड (동지)" बोला जाता है.


जेलेंस्की ने कुछ दिन के बाद "तथाकथित जनवादी कोरिया के सैनिक" से पूछताछ का एक और वीडियो जारी किया.

 


 इस वीडियो में 2005 में जन्मे और 2021 से सेवारत सैनिक ही दिखाई देता है.

इसमें भी वो सैनिक रूसी उच्चारण में कोरियाई भाषा बोलता है. और रुस को "रसिया" बोल रहा है, जबकि जनवादी कोरिया में रुस को " रोसिया" कहा जाता है.

जब उससे पूछा गया कि वह किस उम्र में सेना में भर्ती हुआ तो उसका जबाब 17 साल था, जबकि वह 2005 में पैदा हुआ और 2021 में सेना में भर्ती हुआ तो उस वक्त उसकी उम्र 16 साल होगी. यहाँ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कोरिया (दक्षिण) में कोई भी बच्चा पैदा होने के समय एक साल का होता है, पर जनवादी कोरिया उम्र के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक का इस्तेमाल करता है जिसमें बच्चे के पैदा होने के बाद उसकी उम्र की गणना की जाती है.


इन सारी बातों से यह स्पष्ट हो जाता है कि कोरियाई दिखने वाला सैनिक कहीं का भी हो, जनवादी कोरिया का तो बिल्कुल नहीं है. जेलेंस्की और उसके गुर्गों ने अपना होमवर्क ठीक से नहीं किया.


इसके अलावा वीडियो में दिख रहा सैनिक तीन तकियों के उपर अपनी सर रखकर लेटा हुआ है. यह भी संदेहास्पद है. चूँकि वह एक सिपाही था जो बैठ सकता था, तो क्या यह बेहतर नहीं होता कि उसे बैठा कर पूछताछ की जाती? यदि उसे लेटना ही था तो एक तकिये पर लेटकर वह पूछताछकर्ता को देखते हुए जबाब दे सकता था. ऐसे में शक होता है कि तीन तकियों का उपयोग कुछ सामने देखने के लिए तो नहीं किया गया था? वीडियो को देखने से ही पता चल जाता है कि सैनिक उत्तर देते समय पूछताछकर्ता की ओर देखने के बजाय आगे की ओर देख रहा है. ऐसा प्रतीत होता है मानो वह अपने सामने कुछ पढ़ रहा है.


 इसके अलावा यूक्रेन की स्पेशल ऑपरेशन फोर्स(SOF) द्वारा युद्ध में मारे गए तथाकथित जनवादी कोरिया के सैनिक के पास मिले सुसाइड नोट और दोस्त को भेजे जाने वाली चिट्ठी को सबूत के तौर पेश किया गया. पर ऐसे सबूतों की खुद दक्षिण कोरिया में रह रहे जनवादी कोरिया के भगोड़ों ने एक टीवी कार्यक्रम में धज्जियाँ उड़ा दीं.


 वे भगोड़े जो खुद एक समय जनवादी कोरिया के नागरिक रह चुके थे , उन्होंने भी कबूल किया कि जनवादी कोरिया के सैनिकों की यूक्रेन में मौजूदगी महज एक अफवाह से ज्यादा कुछ नहीं.


 सबसे पहले, उन्होंने 'मारे गए तथाकथित जनवादी कोरियाई सैनिक की बाहों में मिले सुसाइड नोट के बारे में कहा

उन भगोड़ों में एक कुवैत में जनवादी कोरिया का राजदूत भी रह चुका था उसने कहा कि उसे नहीं लगता कि यह जनवादी कोरिया में लिखा गया था और यह जनवादी कोरिया की भाषा शैली भी नहीं है ( अगर कोई भी कोरिया विशेषज्ञ जिसे उत्तर और दक्षिण कोरियाई भाषा शैली में मूलभूत अंतर पता है वो भी आसानी से बता सकता/सकती है कि जनवादी कोरिया में इस तरह से नहीं लिखा जाता है) उसने आगे कहा कि नोट के नीचे पिन को फिन(핀) लिखा गया है (फिन दक्षिण कोरिया में लिखा जाता है) जबकि जनवादी कोरिया में पिन को पीन(삔) लिखा जाता है. इसके अलावा जनवादी कोरिया की कोरियाई भाषा शैली में शब्द अंतराल कम होते हैं पर इस चिट्ठी में शब्द अंतराल ज्यादा हैं और इस तरह से दक्षिण कोरिया में लिखा जाता है.


इसके अलावा एक और चिट्ठी जिसे मारा गया सैनिक अपने दोस्त को भेजना चाहता था, उसमें भी कई गड़बड़ियां पाई गईं.

चिट्ठी में लिखा था " प्यारे कोरिया और माता पिता की बाहों को छोड़कर रुस में अपना जन्मदिन मना रहे मेरे सबसे प्रिय काॅमरेड साथी सोंग जी म्यंग के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूँ और जन्मदिन की बधाई देता हूँ ".

ऐसे वाक्य को देखकर ही जनवादी कोरिया के भगोड़ों ने कहा कि इसे किसी कोरियाई भाषा जानने वाले अनाड़ी ने इसे यूक्रेन में लिखा है. जनवादी कोरिया में ऐसे लिखते ही नहीं हैं. क्योंकि जनवादी कोरिया में " प्यारे कोरिया को छोड़कर " लिखा ही नहीं जाता ब्लकि उसकी जगह " देश (पितृभूमि) को छोड़कर (조국을 떠나)" या "(वर्कर्स) पार्टी माँ की बाहों को छोड़कर (어머니 당의 품을 떠나)" लिखा जाता है.

इसके अलावा इस चिट्ठी में औपचारिक और अनौपचारिक दोनों में एक ही व्यक्ति के लिए काॅमरेड लिखा गया है .जनवादी कोरिया में काॅमरेड को औपचारिक तौर पर दोंगजी (동지) और अनौपचारिक तौर पर दोंगमू (동무) कहा जाता है. वहाँ आप एक ही आदमी के लिए दोंगजी और दोंगमू का प्रयोग एक साथ नहीं कर सकते. पर इस चिट्ठी में ऐसा किया गया है और जनवादी कोरिया का व्यक्ति ऐसा कर ही नहीं सकता.

 

यूक्रेन के इन सबूतों में जनवादी कोरिया के भगोड़ों द्वारा इतनी गड़बड़ी खोजे जाने के बाद उस टीवी कार्यक्रम ने प्रस्तोता को कहना पड़ गया कि यदि यूक्रेन को जनवादी कोरिया के सैनिकों की मौजूदगी के बारे में सबूत ही बनाने हैं तो हमारे कार्यक्रम में उपस्थित इन भगोड़ों का इस्तेमाल करें. खुद भगोड़ों ने भी कहा कि कृपया यूक्रेन से संपर्क करें और उन्हें हमसे मिलने आने के लिए कहें.


अपनी करारी हार से बौखलाया फासिस्ट कुत्ता जेलेंस्की अमेरिका और उसके गुलाम दक्षिण कोरिया से सैनिक मदद लेने के लिए जनवादी कोरिया के सैनिकों की मौजूदगी की झूठी अफवाह फैला रहा है और पश्चिमी काॅरपोरेट मीडिया उसे हाथों हाथ ले रहा है.


 जनवादी कोरिया के सैनिकों के यूक्रेन में होने की कहानियाँ इराक युद्ध के दौरान बताए गए झूठ के समान हैं, कि इराक में "सामूहिक विनाश के हथियार" थे, यहां तक ​​कि इराकी आईसीबीएमएस 45 मिनट में लंदन पहुंच सकता था! . इनमें से कुछ भी सच नहीं था और इराक में कभी कोई 'सामूहिक विनाश के हथियार' नहीं पाए गए। फिर भी पश्चिमी मुख्यधारा मीडिया के बड़े हिस्से और टोनी ब्लेयर जैसे राजनेताओं ने इसे हठपूर्वक आगे बढ़ाया. तथाकथित मुख्यधारा के मीडिया पत्रकारों की याददाश्त छोटी होती है और वे इतिहास नहीं जानते.


अब तक यूक्रेन में जनवादी कोरिया सैनिकों की उपस्थिति के लिए पेश किए गए सारे सबूत संदेहास्पद हैं. कथित रूप से पकड़े गए सैनिकों के फ़ुटेज में संभवतः ऐसे सैनिक दिखाई दे रहे हैं जो जनवादी कोरिया से नहीं हैं. ये रूस के कोरियाई, बुरयाती या तुवा के लोग हैं. यहाँ तक कि वीडियो में दिख रहे दो सैनिकों के पास से रुस के तुवा रिपब्लिक का पहचान पत्र मिला. अक्टूबर 2022 में अल जजीरा ने बताया कि बुरयाती यूक्रेन में रूसी सेना के लिए लड़ रहे थे.

इसके अलावा यह भी पता चला है कि यूक्रेन में तथाकथित पकड़े गए जनवादी कोरिया के सैनिक वास्तव में विशेष सैन्य अभियान में दक्षिण कोरियाई वालंटियर्स थे.

स्पष्ट है दक्षिण कोरियाई फासीवादी कठपुतलियाँ और यूक्रेनी नाज़ी दोनों यूक्रेन में जनवादी कोरिया के बारे में बहुत बड़ा झूठ फैला रहे हैं और इन्हें पश्चिम में तथाकथित मुख्यधारा के पत्रकारों और अभिजात वर्ग के राजनेताओं द्वारा दोहराया जा रहा है.

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