5 वर्षों में रक्षा शक्ति की मजबूती
जनवादी कोरिया ने 19-25 फरवरी
को आयोजित कोरिया की वर्कर्स पार्टी की 9वीं कांग्रेस में
प्रस्तुत कार्य समीक्षा रिपोर्ट के माध्यम से पिछले 5 वर्षों की रक्षा
शक्ति मजबूती के परिणामों को पेश किया और भविष्य के लक्ष्य भी सार्वजनिक किए.
परमाणु संपन्न राज्य की स्थिति का स्थायीकरण
जनवादी कोरिया ने मूल्यांकन किया कि “सबसे महत्वपूर्ण और सामरिक महत्व
रखने वाली बात गणतंत्र [जनवादी कोरिया] की परमाणु संपन्न राज्य के रूप में स्थिति को
अपरिवर्तनीय रूप से स्थायी बनाना था.”
रक्षा शक्ति में परमाणु हथियारों का अनुपात पूर्णतः महत्वपूर्ण कहा जा
सकता है.
परमाणु संपन्न राज्य और गैर-परमाणु राज्य के बीच एक ऐसी दरार है जिसे
पाटा नहीं जा सकता.
इसलिए जनवादी कोरिया ने परमाणु संपन्न राज्य की स्थिति को स्थायी रूप
से मजबूत करने को “सबसे महत्वपूर्ण और सामरिक महत्व” वाला बताते हुए सबसे पहले रखा.
जनवादी कोरिया ने 8 सितंबर 2022 को
‘परमाणु शक्ति नीति के बारे में’ कानून पारित कर परमाणु हथियार सिद्धांत को निर्धारित
किया, और 26-27 सितंबर 2023 को
संविधान के अनुच्छेद 58 में “जनवादी लोकतांत्रिक गणराज्य कोरिया
[जनवादी कोरिया] एक जिम्मेदार परमाणु संपन्न राज्य के रूप में देश के अस्तित्व के अधिकार
और विकास के अधिकार की गारंटी देने, युद्ध को रोकने और
क्षेत्र तथा विश्व में शांति और स्थिरता की रक्षा करने के लिए परमाणु हथियार विकास
को उच्च स्तर तक ले जाता है” यह वाक्यांश जोड़कर परमाणु संपन्न राज्य की स्थिति को
स्पष्ट किया.
जनवादी कोरिया ने कहा, “अब हमारी परमाणु
शक्ति किसी भी आक्रामक युद्ध को भौतिक रूप से शक्तिशाली रूप से रोकने का अपना कर्तव्य
जिम्मेदारी से निभा रहा है,” और “वास्तव में हमारे पास युद्ध को ही रोकने
की क्षमता है और किसी भी ताकत ने यदि हम पर हमला किया तो तुरंत जवाबी कार्रवाई करने
की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं.”
आम तौर पर परमाणु संपन्न राज्यों के बीच एक-दूसरे के परमाणु हमले से संयुक्त
विनाश की आशंका के कारण युद्ध न करने का ‘पारस्परिक सुनिश्चित विनाश’ का सिद्धांत काम
करता है, और गैर-परमाणु राज्य परमाणु प्रतिशोध के डर से परमाणु संपन्न राज्य पर
हमला नहीं करते, यह सामान्य ज्ञान है.
अर्थात परमाणु संपन्नता अपने आप में युद्ध निरोधक शक्ति के रूप में कार्य
करती है.
साथ ही जनवादी कोरिया ने मूल्यांकन किया कि परमाणु हथियार “सुरक्षा वातावरण
के दिन-प्रतिदिन तीव्र होते क्षेत्र में शक्ति संतुलन की गारंटी देते हैं.”
पूर्वी एशिया क्षेत्र जनवादी कोरिया-चीन-रूस और अमेरिका-जापान-दक्षिण
कोरिया के बीच टकराव का स्थान है, जहाँ शीत युद्ध की व्यवस्था अभी भी बनी
हुई है.
विशेष रूप से अमेरिका दक्षिण कोरिया और जापान में विशाल भू-जल-वायु सेना
तैनात करता है और लगातार संयुक्त अभ्यास करता हुआ युद्ध की तैयारी करता है,
इसलिए शक्ति संतुलन में जरा सी भी असंतुलन होने पर तुरंत युद्ध छिड़ने
का जोखिम सदैव बना रहता है.
जनवादी कोरिया मानता है कि यदि उसके पास परमाणु हथियार नहीं होते तो अमेरिका
आक्रमण कर देता और यह पूर्वी एशियाई युद्ध में बदल जाता.
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला और ईरान पर आक्रमण को देखते हुए जनवादी
कोरिया की चिंता को अत्यधिक नहीं कहा जा सकता.
जनवादी कोरिया के राज्य परमाणु शक्ति घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय समाज
में यह तर्क उठने लगा कि जनवादी कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण व्यावहारिक रूप से असंभव
हो गया है, और अमेरिका में भी जनवादी कोरिया को परमाणु संपन्न राज्य कहने के उदाहरण
बढ़ रहे हैं.
इस बारे में जनवादी कोरिया ने समझाया, “अब कोई भी हमारे
देश की युद्ध निरोधक शक्ति को लेकर राजनीतिक और भौतिक रूप से असंवैधानिक कार्यों की
आशा नहीं कर सकता.”
जनवादी कोरिया का तर्क है कि चूँकि संविधान में परमाणु संपन्नता स्पष्ट
की गई है, इसलिए जनवादी कोरिया से परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग करना ‘असंवैधानिक
कार्य’ है.
परमाणु क्षमता को मजबूत करने के लिए सभी शर्तों और संभावनाओं को सर्वोच्च
प्राथमिकता देना
जनवादी कोरिया ने अगले 5 वर्षों के दौरान
परमाणु क्षमता को और अधिक बढ़ाने पर जोर दिया.
जनवादी कोरिया ने कहा, “वर्तमान में हमारी
पार्टी की परमाणु क्षमता वृद्धि की रेखा हमारे परमाणु प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शोध
समूहों और उत्पादकों की सक्रिय गतिविधियों और उच्च तकनीकी क्षमता द्वारा सटीक रूप से
क्रियान्वित की जा रही है, और इसकी संभावनाएँ अत्यंत संतोषजनक हैं.”
“आगे वार्षिक आधार पर राज्य परमाणु शक्ति को मजबूत करने की संभावनापूर्ण योजना है,
और परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने तथा परमाणु प्रयोजन साधनों और उपयोग
क्षेत्रों का विस्तार करने के कार्यों को पूरी ताकत लगाने जा रहे हैं.”
परमाणु हथियारों का निरंतर उत्पादन कर भंडार बढ़ाने के साथ-साथ परमाणु
हथियारों के वाहक साधनों, अर्थात् मिसाइलों, रॉकेट
लॉन्चरों, टारपीडो, बम आदि विविध प्रकार के हथियारों का विकास
और केवल जमीन ही नहीं, बल्कि हवा, समुद्र
और पानी के अंदर भी उपयोग किए जा सकने वाले स्थानिक विस्तार की बात कही गई.
वर्तमान में जनवादी कोरिया जमीन पर विभिन्न मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चरों
से परमाणु हमला कर सकता है, युद्धपोतों और पनडुब्बियों के माध्यम से
परमाणु हमला, और परमाणु टारपीडो से परमाणु हमला संभव है.
अभी जनवादी कोरिया ने जो विकसित नहीं किया है, वह वायु
सेना की परमाणु शक्ति है.
अतः लड़ाकू विमान या बमवर्षकों से गिराए जाने वाले बम या हवा से जमीन
पर मार करने वाली मिसाइलों में परमाणु हथियार लगाने का शोध भी किए जाने की संभावना
है.
साथ ही जनवादी कोरिया ने कहा, “परमाणु शक्ति की
तैयारी की स्थिति को सदा बनाए रखना चाहिए और राज्य परमाणु निरोधक शक्ति के घटक भागों
की परिचालन प्रभावशीलता पर विश्वास रखने के लिए निरंतर परीक्षण और अभ्यास किए जाने
चाहिए,” और यह “अपने आप में युद्ध निरोधक शक्ति का जिम्मेदारीपूर्ण प्रयोग है.”
दूसरे शब्दों में, “यदि शत्रु हमारे राज्य के विरुद्ध सैन्य
कार्रवाई करता है तो हम कभी भी भीषण जवाबी हमला कर सकते हैं, यह क्षमता
हमारे पास है, यह उन्हें भलीभाँति समझा देना चाहिए.”
जनवादी कोरिया ने कहा, “विभिन्न परमाणु हथियारों
की सैन्य उपयोगिता बढ़ाने के लिए पूरक हमले के साधनों और परिचालन सहायता प्रणालियों
को अद्यतन किया जाएगा, और परमाणु ट्रिगर, अर्थात
एकीकृत परमाणु संकट प्रतिक्रिया प्रणाली के संचालन एवं परीक्षण, परमाणु
हथियारों के प्रबंधन व्यवस्था और परिचालन क्रियाओं में निपुणता प्राप्त करने के लिए
विभिन्न अभ्यासों के माध्यम से परमाणु युद्ध बल की यथार्थ युद्ध क्षमता को उच्च स्तर
तक ले जाकर किसी भी समय, अप्रत्याशित परिस्थितियों में भी परमाणु
ढाल शीघ्र एवं सटीक रूप से संचालित हो सके, इसके लिए युद्ध की
तैयारी को पूर्ण रूप से सुनिश्चित किया जाएगा.”
साथ ही “परमाणु प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निरंतर विकास को संभव बनाने
के लिए सभी शर्तों और संभावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए सहायता दी
जाएगी, तथा परमाणु संबंधी सुविधाओं की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को और मजबूत
करने के लिए मजबूत कदम उठाए जाएंगे.”
हाल ही में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला और ईरान पर आक्रमण के माध्यम से
विभिन्न देश कई सबक ले रहे हैं.
अमेरिकी आक्रमण में सबसे घातक पहलू आश्चर्यजनक रूप से कमान केंद्र पर
हमला करके कमान व्यवस्था को पंगु बना देना है ताकि जवाबी हमला न किया जा सके.
साथ ही परमाणु सुविधाओं पर बमबारी करना या गुप्त एजेंटों अथवा आंतरिक
सहयोगियों के माध्यम से परमाणु सुविधाओं या सैन्य ठिकानों को अव्यवस्थित करने वाली
कार्रवाइयाँ भी प्रभावी होती हैं.
जनवादी कोरिया इनके लिए तैयारी करके अमेरिका को आक्रमण का कोई अवसर न
दिखाने का प्रयास कर रहा है.
रक्षा विकास के लिए पंचवर्षीय योजना का क्रियान्वयन
जनवादी कोरिया ने जनवरी 2021 में 8वीं
पार्टी कांग्रेस के माध्यम से रक्षा विकास पंचवर्षीय योजना को अपनाया.
जिसके मुख्य लक्ष्य ▲ परमाणु हथियारों का लघुकरण और सामरिक उपयोग▲अति-विशाल परमाणु
हथियारों का उत्पादन ▲15,000 किलोमीटर
की मारक क्षमता के भीतर हमले की सटीकता में सुधार ▲हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकास एवं शामिल
करना ▲पानी
के अंदर और जमीन पर ठोस ईंधन इंजन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास
▲परमाणु
पनडुब्बी और पानी के अंदर से प्रक्षेपित परमाणु सामरिक हथियारों का अधिग्रहण ▲सैन्य टोही उपग्रह
का संचालन ▲500 किलोमीटर
की अग्रिम गहराई तक संचालन योग्य मानव रहित टोही विमान का विकास आदि थे.
जनवादी कोरिया ने 9वीं पार्टी कांग्रेस में मूल्यांकन किया
कि “सामरिक प्रकृति की प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण, विभिन्न क्षेत्रों
में विकास उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं, जिससे राज्य की सैन्य
शक्ति संरचना में परिवर्तन और नवीकरण के क्षेत्र में स्पष्ट क्रांति आई है” लेकिन विस्तृत
उपलब्धियाँ सार्वजनिक नहीं कीं.
तथापि पिछले 5 वर्षों के जनवादी कोरियाई समाचारों का
सारांश लें तो उपरोक्त अधिकांश लक्ष्य प्राप्त कर लिए गए प्रतीत होते हैं, केवल
परमाणु पनडुब्बी अभी पूरी नहीं हुई लगती है.
महासागर में जा सकने वाला चलंत समग्र मिसाइल अड्डा
जनवादी कोरिया ने कहा, “गणतंत्र की सशस्त्र
सेनाओं को किसी भी शत्रु पर विचारधारात्मक एवं आध्यात्मिक रूप से, सैन्य
एवं तकनीकी रूप से विजय प्राप्त करने वाली विश्व की सर्वशक्तिशाली आधुनिक सेना के रूप
में निरंतर विकसित एवं सुदृढ़ किया जाना चाहिए,” और अगले 5 वर्षों
में किए जाने वाले कार्यों को प्रस्तुत किया.
सबसे पहले, “परंपरागत हथियारों को विश्व स्तरीय शक्तिशाली
हथियारों में अद्यतन करने के कार्य को दृढ़ता से आगे बढ़ाना पार्टी की मजबूत सेना निर्माण
की उपलब्धि में महत्वपूर्ण कार्य के रूप में प्रस्तुत किया गया.”
राज्य मामलों के अध्यक्ष कॉमरेड किम जंग उन ने 11-12 सितंबर 2025 को
रक्षा विज्ञान अकादमी के अधीनस्थ अनुसंधान संस्थान का दौरा करते हुए कहा था,
“आगे पार्टी की 9वीं कांग्रेस रक्षा निर्माण के क्षेत्र
में परमाणु शक्ति और परंपरागत शक्ति के समानांतर विकास की नीति प्रस्तुत करेगी.”
इसलिए इस बार पार्टी कांग्रेस में ‘परमाणु शक्ति, परंपरागत
शक्ति और समानांतर नीति’ आने की उम्मीद थी, लेकिन इसे सार्वजनिक
रूप से स्पष्ट नीति के रूप में नहीं रखा गया, केवल परंपरागत हथियारों
के विकास पर महत्वपूर्ण रूप से जोर दिया गया और विस्तृत सामग्री सार्वजनिक नहीं की
गई.
साथ ही “नौसेना के सतही एवं पनडुब्बी बलों के परमाणु हथियारीकरण को केंद्र
में रखते हुए नौसेना की परिचालन क्षमता को तीव्र एवं निरंतर रूप से अद्यतन करने को
बहुत महत्वपूर्ण अर्थ दिया गया.”
वायु सेना से संबंधित सामग्री अलग से सार्वजनिक नहीं की गई, केवल
नौसेना को सार्वजनिक किया गया, जिससे यह प्रतीत होता है कि नौसेना को प्राथमिकता
देकर विकसित करने का लक्ष्य है.
विशेष रूप से राज्य मामलों के अध्यक्ष कॉमरेड किम जंग उन ने 3-4 मार्च को विध्वंसक
‘ छोई ह्यां हो’(최현호) के
प्रशिक्षण का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और 10 मार्च को वीडियो
कॉन्फ्रेंस से निरीक्षण करते हुए नौसेना के सतही बल के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण निर्देश
दिए.
जनवादी कोरिया के समाचारों के अनुसार अगले 5 वर्षों
में प्रति वर्ष 2 विध्वंसक बनाने की योजना है, जिसमें 5,000 टन
श्रेणी के ‘छोई ह्यां श्रेणी के अतिरिक्त 8,000 टन श्रेणी के विध्वंसक
का भी नया विकास किया जाएगा, तथा 3,000 टन से कम के जहाजों
में ही मुख्य तोप लगाने और विध्वंसकों में मुख्य तोप के स्थान पर हाइपरसोनिक मिसाइलें
अतिरिक्त रूप से लगाने का निर्देश दिया गया.
विध्वंसकों को महासागर में प्रवेश करने वाले चलंत समग्र मिसाइल अड्डों
के रूप में बनाने का विचार प्रतीत होता है.
जनवादी कोरिया ने “जनसेना की युद्ध संचालन क्षमता को सुदृढ़ करने में
महत्वपूर्ण प्रगति” प्राप्त करने के लिए “सैन्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के तीव्र
विकास और आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत सेना निर्माण के दो प्रमुख मोर्चों
– सैन्य शिक्षा क्रांति और प्रशिक्षण क्रांति – को और उच्च स्तर तक ले जाने” की मांग
की, और “राजनीतिक-वैचारिक मजबूत सेना निर्माण को मजबूत सेना निर्माण का प्रथम
सामरिक कार्य” बनाकर निरंतर आगे बढ़ाने की भी मांग की.
जनवादी कोरियाई मैजिनो रेखा का निर्माण
रिपोर्ट में सैन्य ठिकानों को मानकीकरण द्वारा अद्यतन करने के उपायों
की तलाश करते हुए नए सैन्य अधोसंरचनाओं का निर्माण” करने की योजना भी बताई गई.
विशेष रूप से “दक्षिण कोरिया से सटी दक्षिणी सीमा रेखा को यथाशीघ्र किलेबंद
करने और सीमा रक्षा व्यवस्था तथा अग्नि शक्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के पार्टी के
सैन्य-सामरिक निर्देश को जिम्मेदारी से लागू” करने पर जोर दिया गया.
सीमा किलेबंदी तब की जाती है जब शत्रु के आक्रमण की आशंका हो.
इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण 1929-1938 में फ्रांस द्वारा
जर्मनी के साथ सीमा पर निर्मित मैजिनो रेखा है.
मैजिनो रेखा जर्मनी के आश्चर्यजनक हमले को रोककर मुख्य सेना को सीमा तक
पहुँचने का समय प्रदान करने के लिए निर्मित विशाल भूमिगत एवं सतही सुविधा थी.
फ्रांस ने 750 किलोमीटर लंबाई, 20 किलोमीटर
चौड़ाई के स्थान में कंटीले तार और टैंक रोधी अवरोधों के अलावा 142 किले,
352 बंकर, 78 आश्रय स्थल, 5,000 से
अधिक चौकियाँ बनाईं, और विशाल भूमिगत किलों में 500-1,000 सैनिक
रह सकते थे.
साथ ही किलों, बंकरों और आश्रय स्थलों को जोड़ने वाली
भूमिगत रेलवे भी बनाई.
यह इतनी शक्तिशाली रक्षात्मक व्यवस्था थी कि जर्मनी को मैजिनो रेखा से
परिक्रमा करके फ्रांस पर हमला करना पड़ा.
इस प्रकार सीमा किलेबंदी आक्रमण के लिए नहीं, बल्कि
रक्षा के लिए होती है.
जनवादी कोरिया-दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य सीमा रेखा 238 किलोमीटर
है जो मैजिनो रेखा का एक-तिहाई है, और दोनों छोर समुद्र से घिरे हैं,
इसलिए परिक्रमा भी संभव नहीं.
अतः जनवादी कोरिया के सीमा किलेबंदी समाप्त करने के बाद उसपर आक्रमण करना
अत्यंत कठिन हो जाएगा.
और यदि अमेरिका- दक्षिण कोरिया का जनवादी कोरिया पर आक्रमण करने का कोई
इरादा नहीं है तो उसकी सीमा किलेबंदी का विरोध करने का कोई कारण भी नहीं होगा.
नए गुप्त हथियार और विशिष्ट सामरिक हथियार
जनवादी कोरिया ने बताया कि पार्टी केंद्रीय सैन्य आयोग ने “हमारी सेना
में नए गुप्त हथियारों और विशिष्ट सामरिक संपत्तियों को शामिल करने के संबंध में महत्वपूर्ण
कार्य प्रस्तुत किए और संबंधित विभागों में तैयार किए गए नए रक्षा विकास योजनाओं का
गहन परीक्षण किया, तथा विश्वसनीयता और जिम्मेदारी के साथ दूरगामी
योजनाओं को स्वीकृत किया.”
जिसमें ▲“संचित प्रौद्योगिकियों को समेकित कर अधिक
शक्तिशाली भूमि एवं पनडुब्बी प्रक्षेपण प्रकार की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल”
▲“विविध कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त मानव रहित
हमला” ▲“आवश्यकता पड़ने पर शत्रु देश के उपग्रहों
पर हमला करने के लिए विशिष्ट हथियार” ▲“शत्रु
की कमान के केंद्र को पंगु बनाने के लिए अत्यंत शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक युद्ध हथियार
प्रणाली” ▲“अधिक उन्नत टोही उपग्रह” आदि शामिल थे .
निःसंदेह जनवादी कोरिया ‘गुप्त’ हथियार या ‘विशिष्ट’ सामरिक हथियार क्या
हैं, यह सार्वजनिक नहीं करेगा, इसलिए उपर्युक्त
जानकारी से ही अनुमान लगाना होगा.
वर्तमान में रूस की नवीनतम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल RS-28 सरमत
में ये क्षमताएँ हैं.
दूसरा प्रस्तुत कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त मानव रहित हमला विमान यूक्रेन
युद्ध या ईरान युद्ध में सक्रिय रूप से उपयोग हो रहे आत्मघाती ड्रोन के अलावा भूमि
पर युद्ध रोबोट, ड्रोन बोट तक विस्तारित किया जा सकता है.
हाल ही में सार्वजनिक किए गए चीन के पूर्वी थिएटर कमान के 72वीं
सेना समूह के उभयचर आक्रमण प्रशिक्षण के दृश्यों में चीन द्वारा गौरवान्वित ‘भेड़िया
रोबोट’ समुद्री सेना से पहले तट पर उतरकर शत्रु की रक्षात्मक स्थिति को भेदते हुए दिखाया
गया, जिसने सनसनी फैला दी.
बताया जाता है कि राइफल से लैस भेड़िया रोबोट की सटीकता 92% थी.
ऐसे रोबोटों में डीपसीक जैसी चीनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता लगाई जाती है.
साथ ही यूक्रेन द्वारा ड्रोन बोट से रूसी युद्धपोतों और नौसैनिक अड्डों
पर हमला कर रूसी नौसेना को अक्षम करने के उदाहरण, या ईरान द्वारा अमेरिकी
विमानवाहक पोत पर ड्रोन बोट भेजकर उसे ईरान से दूर पीछे हटने पर मजबूर करने के मामलों
से ड्रोन बोट का सामरिक महत्व भी ऊंचा आंका जा रहा है.
तीसरा, उपग्रह आक्रमण हथियार (ASAT) वर्तमान
में अमेरिका, रूस, चीन द्वारा विकसित कर परीक्षण पूरा कर लिया
गया है.
उपग्रह आक्रमण हथियारों में भूमि या लड़ाकू विमान से प्रक्षेपित किए जाने
वाले अवरोधक मिसाइल, लेजर अवरोधन, आत्मघाती
उपग्रह आदि शामिल हैं.
लेजर अवरोधन के मामले में वास्तविक उपग्रह को नष्ट (हार्ड किल) करना भी
होता है, लेकिन सेंसर जैसी विशिष्ट कार्यक्षमताओं को केवल निष्क्रिय (सॉफ्ट किल)
करने का तरीका भी होता है, और लेजर प्रक्षेपित करने का स्थान भी भूमि,
विमान, उपग्रह आदि विविध होते हैं.
साथ ही रेडियो हमले से उपग्रह को अस्थायी रूप से पंगु बनाने की प्रौद्योगिकी
या हैकिंग भी मौजूद है.
हाल ही में अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स द्वारा संचालित स्टारलिंक उपग्रहों
का युद्ध में उपयोग किया जा रहा है और शत्रु देशों में सामाजिक अव्यवस्था उत्पन्न करने
में भी इस्तेमाल हो रहा है, जिससे उपग्रह हमला क्षमता का महत्व बढ़
रहा है.
चौथा, अत्यंत शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक युद्ध हथियार
प्रणाली में सबसे पहले सुपर ईएमपी (विद्युत चुम्बकीय स्पंद) बम का ध्यान आता है.
अंतरिक्ष (100 किलोमीटर की ऊंचाई) के निकट उच्च ऊंचाई
पर परमाणु बम विस्फोट करके पृथ्वी पर तीव्र विद्युत चुम्बकीय तरंग भेजने वाला सुपर
ईएमपी बम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को पंगु बनाने वाला अत्यंत शक्तिशाली हथियार है.
हालाँकि अमेरिका-दक्षिण कोरिया की कमान व्यवस्था ने ईएमपी हमले के विरुद्ध
सुरक्षात्मक उपाय कर लिए हैं, जिससे प्रभावशीलता कम हो सकती है,
और इसके प्रभाव अत्यधिक व्यापक होते हैं, जिससे
जनवादी कोरिया को भी नुकसान पहुँच सकता है – यह एक समस्या है.
अतः विद्युत चुम्बकीय तरंगों की सुरक्षा को भेदकर “कमान केंद्र को पंगु”
बनाने के लिए किसी प्रकार की प्रौद्योगिकी पर शोध किए जाने की संभावना है.
अंत में, उन्नत टोही उपग्रह प्रक्षेपित किए जाने
की संभावना है.
जनवादी कोरिया ने 21 नवंबर 2023 को
माल्लिग्योंग-1 का प्रक्षेपण सफल किया था, लेकिन 28 मई
2024 को माल्लिग्योंग 1-1 का प्रक्षेपण विफल रहा, और उसके
बाद अतिरिक्त टोही उपग्रह प्रक्षेपित नहीं किए.
निम्न कक्षा में परिक्रमा करने वाले टोही उपग्रहों का जीवनकाल छोटा होता
है, और वास्तविक समय में निरंतर टोही के लिए कई टोही उपग्रहों की आवश्यकता
होती है, इसलिए जनवादी कोरिया शीघ्र ही माल्लिग्योंग-2 आदि
नए प्रकार के टोही उपग्रह प्रक्षेपित कर सकता है.
इस बीच जनवादी कोरिया ने “सामरिक शत्रुओं का सामना करने के लिए सामरिक
हथियार प्रणालियाँ, और विशेष रूप से दक्षिण कोरिया क्षेत्र
को नियंत्रित करने के लिए मुख्य हमले के साधनों – 600 मिलीमीटर रॉकेट
लॉन्चर और नए 240 मिलीमीटर रॉकेट लॉन्चर प्रणालियाँ, परिचालन-सामरिक मिसाइल
– को वार्षिक आधार पर बढ़ाकर तैनात करके हमले की घनत्व और निरंतरता को बड़े पैमाने
पर बढ़ाने” की योजना भी बताई.
जनवादी कोरिया ने 600 मिलीमीटर अति-विशाल रॉकेट लॉन्चर के बाद
मौजूदा 240 मिलीमीटर रॉकेट लॉन्चर में भी मार्गदर्शन क्षमता जोड़कर उन्हें मिसाइल
की तरह उपयोग करने योग्य बनाया है.
240 मिलीमीटर रॉकेट लॉन्चर एक पुराना हथियार
है, जिसका भंडार बहुत अधिक है, इसलिए पुराने लॉन्चरों
और नए मार्गदर्शन युक्त लॉन्चरों को मिलाकर दागना बहुत मुश्किल से निपटाया जा सकेगा.
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता
है कि जनवादी कोरिया :
- परमाणु शक्ति को और मजबूत करेगा
- पारंपरिक और परमाणु दोनों सैन्य क्षमताओं को
विकसित करेगा
- आधुनिक युद्ध के अनुरूप प्रशिक्षण और तकनीकी
विकास करेगा
इस प्रकार, वह अपनी सैन्य शक्ति को “विश्व की सबसे शक्तिशाली
आधुनिक सेना” के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखता है.


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